बीवी और मकान – Songs of Biwi Aur Makan (1966)


फ़िल्म: बीवी और मकान / Biwi Aur Makan (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, आशा भोंसले
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: गुलज़ार
अदाकार: मेहमूद, शबनम, विश्वजीत, कल्पना

दबे लबों से कभी जो कोई सलाम ले ले – 2
मैं आसमाँ की तरह से गूँजूँ – 2 जो नाम ले ले
दबे लबों से कभी जो कोई…

सुनी थी कहानी परियों से – 2
भंवरें मिलेंगे कलियों से
मिलेंगे सुनहरे शहज़ादे – 2
उजली सुनहरी परियों से
उजले रंग लिये खिलते अंग लिये
नील परी से कम तो नहीं हूँ आये कोई थामने
दबे लबों से कभी जो कोई…

अजी इश्क़ पे ज़ोर नहीं है इक बात चली थी ग़ालिब से
हमें हुस्न पे ज़ोर नहीं है कह दो ये हमारी जानिब

सोचा था जो अंग खिलेंगे – 2
हो, बाँधेगा कोई गजरों से
मानेंगे सुनेंगे जो कहेगा – 2
दो रेशमी सी नज़रों से
दिल भी हाज़िर है जाँ भी हाज़िर है
दिल और जान के क़ाबिल कोई आये ज़रा थामने
दबे लबों से कभी जो कोई…


फ़िल्म: बीवी और मकान / Biwi Aur Makan (1966)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: गुलज़ार
अदाकार: मेहमूद, शबनम, विश्वजीत, कल्पना

कितनी अन्जानी सूरतें लेकर लब पे जाने से नाम आते हैं
किसको मालूम था मोहब्बत में ऐसे मक़ाम आते हैं

जाने कहाँ देखा है कहाँ देखा है तुम्हें
जागी-जागी आँखों के सपनों में
जाने कहाँ देखा…

जमना किनारे कभी भीगी-भीगी चोली में
साँवरे के संग कभी गोपियों की टोली में
कहाँ कहाँ पूछा है कहाँ-कहाँ ढूँढा है
जाने कहाँ देखा…

रावी के किनारे जहाँ हीर की सहेलियाँ
पूछती हैं रोज़ वही प्यार की पहेलियाँ
जाने कहाँ देखा…

नील के किनारे कभी शाम के उजाले में
ज़ुलेखा पुकारा है तुमको ख़्यालों में
जाने कहाँ देखा…

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या दिल की सुनो दुनियावालो – Ya Dil Ki Suno Duniyavalon (Anupama)


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: हेमंत कुमार
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, तरुण बोस


या दिल की सुनो दुनियावालो
या मुझको अभी चुप रहने दो
मैं ग़म को खुशी कैसे कह दूँ
जो कहते हैं उनको कहने दो

ये फूल चमन मे कैसा खिला
माली की नज़र मे प्यार नहीं
हँसते हुए क्या क्या देख लिया
अब बहते हैं आँसू बहने दो
या दिल की सुनो…

एक ख्वाब खुशी का देखा नहीं
देखा जो कभी तो भूल गये
माना हम तुम्हें कुछ दे ना सके
जो तुमने दिया वो सहने दो
या दिल की सुनो…

क्या दर्द किसी का लेगा कोई
इतना तो किसी में दर्द नहीं
बहते हुए आँसू और बहें
अब ऐसी तसल्ली रहने दो
या दिल की सुनो…

क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी – Kyun Mujhe Itani Khushi De Di (Anupama)


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: शशिकला, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, तरुण बोस


क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल
कहीं मचल न जाऊँ, कहीं फिसल न जाऊँ
मचल न जाऊँ, फिसल न जाऊँ
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल

एक मैं हूँ और बहारें बेशुमार
हो न जाये आज आँचल तार-तार
धक से हो जाता है मेरा जी जो इतराता है दिल
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल

खिल गई हूँ अपनी सूरत देखकर
लग न जाये मुझको मेरी ही नज़र
ये वो रुत है जिसमें अपने पर ख़ुद आ जाता है दिल
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल

ज़िन्दगी बेताब है मेरे लिये
प्यार रंगीं ख़्वाब है मेरे लिये
सब बहक जाते हैं जाने क्यूँ, जो बहकाता है दिल
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल

कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं – Kuchh Dil Ne Kaha (Anupama)


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर


कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं – 2
ऐसी भी बातें होती हैं – 2
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं

लेता है दिल अंगड़ाइयां, इस दिल को समझाये कोई
अरमान ना आँखें खोल दें, रुसवा ना हो जाये कोई
पलकों की ठंडी सेज पर, सपनों की परियां सोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं – 2
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं

दिल की तस्सली के लिये, झूठी चमक झूठ निखार
जीवन तो सूना ही रहा, सब समझे आयी बहार
कलियों से कोई पूछता, हंसती हैं या रोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं – 2
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं

धीरे धीरे मचल ऐ दिल-ए-बेक़रार – Dheere Dheere Machal (Anupama)


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: शशिकला, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, तरुण बोस


धीरे धीरे मचल ऐ दिल-ए-बेक़रार
कोई आता है
यूँ तड़पके न तड़पा मुझे बालमा
कोई आता है
धीरे धीरे…

उसके दामन की ख़ुशबू हवाओं में है
उसके कदमों की आहट फ़ज़ाओं में है
मुझको करने दे, करने दे सोलह श्रिंगार
कोई आता है
धीरे धीरे मचल…

रूठकर पहले जी भर सताऊँगी मैं
जब मनाएंगे वो, मान जाऊँगी हैं
मुझको करने दे, करने दे सोलह श्रिन्गार
कोई आता है
धीरे धीरे मचल…

मुझको छुने लगीं उसकी पर्छाइयाँ
दिलके नज़दीक बजती हैं शहनाइयाँ
मेरे सपनों के आँगन में गाता है प्यार
कोई आता है

धीरे धीरे मचल…