दीवाना मैं ना था दीवाना बन गया – Diwana Main Na Tha (Indian)


फ़िल्म: इंडियन (2001)
संगीतकार: आनंद राज आनंद
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक/गायिका: अल्का याग्निक, शान


दीवाना मैं ना था दीवाना बन गया
कब कैसे और क्या अफ़साना बन गया
ना तुझे है ख़बर, ना मुझे है मगर
जाने कब दिल से दिल मिल गया
दीवानी मैं हो गई, दीवाना मैं हो गया
दीवाना तू ना था, दीवाना बन गया
कब कैसे और क्या अफ़साना बन गया

जादू निग़ाहों का तेरी, मुझपे असर कर गया है
दिल दीवाना तुम्हारा, वादा कोई कर गया है
मैंने माना मेरी जां मैंने माना
दिल जो बोला वही कर दिया
दीवानी मैं हो गई…

धड़कने सुन रही हैं, धड़कनों की ज़ुबां को
ऐसा हसीं हो नज़ारा तो, कैसे ना अरमां जवां हो
तेरे बिन एक पल नहीं जीना
मैंने ये फ़ैसला कर लिया
दीवानी मैं हो गई…

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बोलो बोलो क्या बात हुई है – Bolo Bolo Kya Baat Hui Hai (Rehna Hai Tere Dil Mein)


फ़िल्म: रहना है तेरे दिल में (2001)
संगीतकार: हैरिस जयराज
गीतकार: समीर
गायक/गायिका: शान


बोलो बोलो क्या बात हुई है
क्यों है दीवाने इस दिल में हलचल हलचल
फिरता हूं मैं तो गलियों में पागल पागल
तेरे, दिल तेरा दिल कोई ले के गया
ऐसा पहले तो ना हुआ
कम ऑन बेबी, डोंट डू दिस बेबी
छाया है ये कैसा नशा
तू ना जाने हाल मेरा
डोंट यू एवर डू दिस

दिलरुबा मेरी जानेमन
कैसा है ये दीवानापन
तुमसे नज़र जब मिली मैंने ये जाना
जान-ए-वफ़ा प्यार होता है क्या
तुझे इश्क़ हो गया यारा
मारा गया तू बेचारा
दिल आ गया है तेरा किसी पे
मुश्किल है तुझको समझाना
बेचैन तुझको करता है
वो अनजाना दर्द चाहत का
वो नाज़नीन लड़की हसीन
कर के गई है क्या मैं ना जानूं
बोलो बोलो…

देखा जो चोरी-चोरी मैंने तुझे मेरी जान
दिल जाना गोरी-गोरी, तुझको दिया दिल जवां

वो बसी मेरी आंखों में
वो छुपी मेरी सांसों में
आती है रातों को वो मेरे ख़्वाबों में
माने ना दिल अब तो उसके बिना
तेरी नींद ले गई वो तो
तुझे दर्द दे गई वो तो
उस दिल-नशीं के होंठों पे लिख दे
बेताबियों का अफ़साना
है आरज़ू यही परवाने
तेरी जवां धड़कन की
वो अप्सरा है या हूर कोई
लगती मगर मुझे वो दीवानी
ओ बोलो बोलो…

घनन-घनन घिर-घिर आये बदरा – Ghanan Ghanan (Lagaan)


फ़िल्म/एल्बम: लगान (2001)
संगीतकार: ए.आर.रहमान
गीतकार: जावेद अख्तर
गायक/गायिका: अलका याग्निक, उदित नारायण, सुखविंदर सिंह, शंकर महादेवन, शान


घनन-घनन घिर-घिर आये बदरा
घन घनघोर कारे छाये बदरा
धमक-धमक गूंजे बदरा के डंके
चमक-चमक देखो बिजुरिया चमके
मन धड़काये बदरवा, मन धड़काये बदरवा
मन-मन धड़काये बदरवा

काले मेघा, काले मेघा, पानी तो बरसाओ
बिजुरी की तलवार नहीं, बूंदों के बान चलाओ
मेघा छाये, बरखा लाये
घिर-घिर आये, घिर के आये

कहे ये मन मचल-मचल, न यूं चल सम्भल-सम्भल
गये दिन बदल, तू घर से निकल
बरसने वाल है अब अमृत जल

दुविधा के दिन बीत गये, भईया मल्हार सुनाओ
घनन-घनन घिर-घिर…

रस अगर बरसेगा, कौन फिर तरसेगा
कोयलिया गायेगी बैठेगी मुण्डेरों पर
जो पंछी गायेंगे, नये दिन आयेंगे
उजाले मुस्कुरा देंगे अंधेरों पर
प्रेम की बरखा में भीगे-भीगे तनमन
धरती पे देखेंगे पानी का दरपन
जईओ तुम जहां-जहां, देखियो वहां-वहां
यही इक समां कि धरती यहां
है पहने सात रंगों की चूनरिया
घनन-घनन घिर-घिर…

पेड़ों पर झूले डालो और ऊंची पेंद बढ़ाओ
काले मेघा, काले मेघा…

आई है रुत मतवाली, बिछाने हरियाली
ये अपने संग में लाई है सावन को
ये बिजुरी की पायल, ये बादल का आंचल
सजाने लाई है धरती की दुल्हन को
डाली-डाली पहनेगी फूलों के कंगन
सुख अब बरसेगा आंगन-आंगन
खिलेगी अब कली-कली, हंसेगी अब गली-गली
हवा जो चली, तो रुत लगी भली
जला दे जो तन-मन वो धूप ढली
काले मेघा, काले मेघा…

मैं ऐसा क्यूं हूं – Main Aisa Kyun Hoon (Lakshya)


फ़िल्म/एल्बम: लक्ष्य (2004)
संगीतकार: शंकर-एहसान-लॉय
गीतकार: जावेद अख्तर
गायक/गायिका: शान


मैं ऐसा क्यूं हूं, मैं ऐसा क्यूं हूं
मैं जैसा हूं, मैं वैसा क्यूं हूं
करना है क्या मुझको, ये मैंने कब है जाना
लगता है गाऊंगा, ज़िन्दगी भर बस ये गाना
होगा जाने मेरा अब क्या
कोई तो बताए मुझे
गड़बड़ है ये सब क्या
कोई समझाए मुझे
ओ वे ई आय…
मैं ऐसा क्यूं हूं…

अब मुझको ये है करना, अब मुझे वो करना है
आख़िर क्यूं मैं ना जानूं, क्या है कि जो करना है
लगता है अब जो सीधा, कल मुझे लगेगा उल्टा
देखो ना मैं हूं जैसे, बिल्कुल उल्टा-पुल्टा
बदलूंगा मैं अभी क्या
मानूं तो क्या मानूं मैं
सुधारूंगा मैं कभी क्या
ये भी तो ना जानूं मैं
जाने अब मेरा होना क्या
लगता है तुमको क्या
जाने अब मेरा होना क्या है
क्या मैं हूं, जैसा बस वैसा रहूंगा
ओ वे ई आय…
करना है क्या मुझको…

बहती हवा सा था वो, उड़ती पतंग सा था वो – Behti Hawa Sa tha Woh (3 Idiots)


फिल्म: 3 ईडियट्स (2009)
गायक: शान, शांतनु मोइत्रा
गीत: स्वानंद किरकिरे
संगीत: शांतनु मोइत्रा


(बहती हवा सा था वो, उड़ती पतंग सा था वो
कहां गया उसे ढूंढो) – 2

हमको तो राहें थी चलाती
वो खुद अपनी राह बनाता
गिरता संभालता मस्ती में चलता था वो
हमको कल की फिकर सताती,
वो बस आज का जश्न मनाता
हर लम्हे को खुलके जीता था वो
कहां से आया था वो,
छूके हमारे दिल को
कहां गया उसे ढूंढो

सुलगती धुप में छांव के जैसा
रेगिस्तान में गांवे के जैसा
माइंड के घांव पे मरहम जैसा वो
हम सहमे से रहते कुए में
वो नदिया में गोते लगाता
उलटी धारा चीर के तैरता था वो
बादल आवारा था वो,
प्यार हमारा था वो
कहां गया उसे ढूंढो
हमको तो राहें थी चलाती,
वो खुद अपनी राह बनाता
गिरता संभालता मस्ती में चलता था वो
हमको कल की फिकर सताती,
वो बस आज का जश्न मनाता
हर लम्हे को खुलके जीता था वो
कहां से आया था वो,
छूके हमारे दिल को
कहां गया उसे ढूंढो