कलियों का चमन तब बनता है – Kaliyon Ka Chaman Tab Banta Hai (Jyoti)


फ़िल्म: ज्योति (1981)
संगीतकार: बप्पी लाहिड़ी
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक/गायिका: लता मंगेशकर


हमारी इस नज़ाकत को, क़यामत से ना कम समझो
हमें ऐ चाहने वालों, न मिट्टी का सनम समझो

थोड़ा रेशम लगता है, थोड़ा शीशा लगता है
हीरे मोती जड़ते हैं, थोड़ा सोना लगता है
ऐसा गोरा बदन तब बनता है
थोड़ा रेशम लगता है…

दिल को प्यार का रोग लगा के, ज़ख़्म बनाने पड़ते हैं
ख़ून-ए-जिगर से अरमानों के, फूल खिलाने पड़ते हैं
दर्द हज़ारों उठते हैं, कितने कांटे चुभते हैं
कलियों का चमन तब बनता है
थोड़ा रेशम लगता है…

हंस के दो बातें क्या कर ली, तुम तो बन बैठे सैयां
पहले इनका मोल तो पूछो, फिर पकड़ो हमरी बैयां
दिल दौलत दुनिया तीनों, प्यार में कोई हारे तो
वो मेरा सजन तब बनता है
थोड़ा रेशम लगता है…

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ओ पंडितजी मेरे मरने के बाद – Panditji Mere Marne Ke Baad (Roti, Kapda Aur Makan)


फ़िल्म: रोटी कपड़ा और मकान (1974)
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: वर्मा मलिक
गायक/गायिका: लता मंगेशकर


ना धरम बुरा, ना करम बुरा
ना गंगा बुरी, ना जल बुरा

पर पीने वालों को पंडितजी
ना करना कभी नसीहत
पीनेवाला मरते-मरते
बस करता यही वसीयत

ओ पंडितजी मेरे मरने के बाद बस
इतना कष्ट उठा लेना
मेरे मुंह में गंगाजल की जगह
थोड़ी मदिरा टपका देना
पंडितजी मेरे मरने के…

सदियों पुराने मयख़ाने से
थोड़ी मिट्टी मंगवा लेना
उस मिट्टी को समझ के चन्दन
मेरे माथे तिलक लगा देना
पंडितजी मेरे मरने के बाद…

मौत पे मेरी, ओ पीनेवाले
आंख जो तेरी भर आए
पी जाना तू आंख के आंसू
पर कुछ जाम बहा देना
पंडितजी मेरे मरने के बाद…

सफ़र आखिरी लंबा है
कोई साथ में साथी तो चाहिए
झूमती पहुंचूं जन्नत तक
इक बोतल साथ टिका देना
पंडितजी मेरे मरने के बाद…

जाने क्या बात है, जाने क्या बात है – Jaane Kya Baat Hai (Sunny)


फ़िल्म: सनी (1984)
संगीतकार: आर.डी.बर्मन
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक/गायिका: लता मंगेशकर


जाने क्या बात है, जाने क्या बात है
नींद नहीं आती बड़ी लम्बी रात है
जाने क्या बात…

सारी सारी रात मुझे इसने जगाया
जैसे कोई सपना, जैसे कोई साया
कोई नहीं लगता है, कोई मेरे साथ है
जाने क्या बात…

धक-धक कभी से जिया डोल रहा है
घूंघट अभी से मेरा खोल रहा है
दूर अभी तो पिया की मुलाक़ात है
जाने क्या बात…

जब-जब देखूं मैं ये चांद सितारे
ऐसा लगता है मुझे लाज के मारे
जैसे कोई डोली, जैसे बारात है
जाने क्या बात…

ये हैं तेरे करम, कभी ख़ुशी कभी ग़म – Kabhi Khushi Kabhi Gham Title Song


फ़िल्म: कभी ख़ुशी कभी ग़म (2001)
संगीतकार: जतिन-ललित
गीतकार: समीर
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, सोनू निगम


मेरी सांसों में तू है समाया
मेरा जीवन तो है तेरा साया
तेरी पूजा करूं मैं तो हर दम
ये हैं तेरे करम, कभी ख़ुशी कभी ग़म
ना जुदा होंगे हम, कभी ख़ुशी कभी ग़म

सुबह-ओ-शाम चरणों में दीये हम जलायें
देखे जहां भी देखें, तुझको ही पायें
इन लबों पे तेरा बस तेरा नाम हो
प्यार दिल से कभी भी ना हो कम
ये हैं तेरे करम…

ये घर नहीं है, मंदिर है तेरा
इसमें सदा रहे तेरा बसेरा
खुशबुओं से तेरी ये महकता रहे
आये-जाये भले कोई मौसम
ये हैं तेरे करम…

तेरे साथ होंगी मेरी दुआएं
आये कभी ना तुझपे कोई बलाएं
मेरा दिल ये कहे, तू जहां भी रहे
हर घड़ी, हर ख़ुशी चूमे तेरे कदम
ये हैं तेरे करम…

क्या बेबसी है ये, क्या मजबूरियां
हम पास हैं फिर भी कितनी हैं दूरियां
जिस्म तू जान मैं, तेरी पहचान मैं
मिल के भी ना मिले, ये है कैसा भरम
ये हैं तेरे करम…

तुमसे मिलके ज़िन्दगी को यूं लगा – Tumse Milke Zindagi Ko Yun Laga (Chor Police)


फ़िल्म: चोर पुलिस (1983)
संगीतकार: आर.डी.बर्मन
गीतकार: निदा फाज़ली
गायक/गायिका: लता मंगेशकर


तुमसे मिलके ज़िन्दगी को यूं लगा
जैसे हमको सारी दुनिया मिल गयी
दिल में जागी धड़कनों की रागिनी
हर तमन्ना फूल बनके खिल गयी
तुमसे मिलके ज़िंदगी…

होंठों से वादे लिखें, आंखों से आंखें पढ़ें
टूटे ना ये चाहतों का सिलसिला
तुमसे मिलके ज़िन्दगी…

बागों में मौसम खुले, ख़्वाबों के चेहरे धुले
तुमसे पहले हर खुशी थी बेवजह
तुमसे मिलके ज़िंदगी…