दो नैन मिले दो फूल खिले – Do Nain Mile Do Phool Khile (Ghunghat)


फ़िल्म/एल्बम: घूंघट (1960)
संगीतकार: रवि
गीतकार: शकील बदायुनी
गायक/गायिका: आशा भोंसले, महेंद्र कपूर


दो नैन मिले, दो फूल खिले
दुनिया में बहार आई
एक रंग नया लायी, एक रंग नया लायी
दिल गाने लगा, लहराने लगा
ली प्यार ने अंगड़ाई
बजने लगी शहनाई, बजने लगी शहनाई
दो नैन मिले…

अरमान भरी नज़रों से बलम
इस तरह हमें देखा न करो
हो जाए ना रुसवा इश्क़ कहीं
दुनिया है बुरी, दुनिया से डरो
दुनिया का मुझे कुछ खौफ़ नहीं
दुनिया तो है हरजाई, और इश्क़ है सौदाई
दो नैन मिले…

ज़ुल्फों की घनी छांव में सनम
दम भर के लिए जीने दे मुझे
इस मस्त नज़र की तुझको कसम
आंखों से ज़रा पीने दे मुझे
पीना तो कोई दुश्वार नहीं
ओ प्यार के शहदायी, बहके तो है रुसवाई
दो नैन मिले…

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जीवन चलने का नाम – Jeevan Chalne Ka Naam (Shor)


फ़िल्म/एल्बम: शोर (1972)
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: राजकवि इंदरजीत सिंह तुलसी
गायक/गायिका: महेंद्र कपूर, मन्ना डे, श्यामा चित्तर


जीवन चलने का नाम
चलते रहो सुबह-ओ-शाम
के रस्ता कट जाएगा मितरा
के बादल छट जाएगा मितरा
के दुःख से झुकना ना मितरा
के एक पल रुकना ना मितरा
जीवन चलने का नाम…

जो जीवन से हार मानता, उसकी हो गयी छुट्टी
नाक चढ़कर कहे ज़िन्दगी, तेरी मेरी हो गयी कुट्टी
के रूठा यार मना मितरा
के यार को यार बना मितरा
ना खुद से रहो खफा मितरा
खुद ही से बने खुदा मितरा
जीवन चलने का नाम…

उजली-उजली भोर सुनाती, तुतले तुतले बोल
अन्धकार में सूरज बैठा, अपनी गठड़ी खोल
के उससे आंख लड़ा मितरा
समय से हाथ मिला मितरा
के हो जा किरण-किरण मितरा
के चलता रहे चलन मितरा
जीवन चलने का नाम…

के चली शाम के रंग महल में, तपती हुई दुपहरी
मिली गगन से सांझ की लाली, लेकर रूप सुनहरी
के रात बिखर जायेगी मितरा
के बात निखर जायेगी मितरा
के सूरज चढ़ जाएगा मितरा
काफिला बढ़ जाएगा मितरा
जीवन चलने का नाम…

हिम्मत अपना दीन धरम है, हिम्मत है ईमान
हिम्मत अल्लाह, हिम्मत वाहगुरू, हिम्मत है भगवान
के इसपे मरता जा मितरा
के सजदा करता जा मितरा
के शीश झुकाता चल मितरा
के जग पर छाता जा मितरा
जीवन चलने का नाम…

छोटा सा इक दीपक है और टीम टीम करती ज्योति
हीरे जैसी आंख से इसके टूट रहे हैं मोती
के नन्हें हाथ जुड़े मितरा, ना इसका बात मुड़े मितरा
अगर ये खो जाएगा मितरा, तो झूठा हो जाएगा मितरा
जीवन चलने का नाम…

इक दुआ बस तुझसे मांगूं, मैं आज बिछा कर पल्ला
मेरे यार की रक्षा करना, कदम-कदम पर अल्लाह
के लब पर यही दुआ मितरा
के बिगड़ी बात बना मितरा
के बेड़ा पार लगा मितरा
तुझे तब कहूं खुदा मितरा
तुझे तब कहें खुदा मितरा
जीवन चलने का नाम…

जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे – Jiske Sapne Humein Roz Aate Rahe (Geet)


फ़िल्म/एल्बम: गीत (1970)
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक/गायिका: महेंद्र कपूर, लता मंगेशकर


जिसके सपने हमें रोज़ आते रहे, दिल लुभाते रहे
ये बता दो, बता दो
ये बता दो कहीं तुम, वही तो नहीं, वही तो नहीं

जब भी झरनों से मैंने सुनी रागिनी
मैं ये समझा तुम्हारी ही पायल बजी
ओ जिसकी पायल पे
ओ जिसकी पायल पे हम दिल लुटाते रहे, जां लुटाते रहे
ये बता दो कहीं तुम…

जिसके रोज़ रोज़ हम गीत गाते रहे, गुनगुनाते रहे
ये बता दो कहीं तुम, वही तो नहीं
वही तो नहीं

ये महकते-बहकते हुए रास्ते
खुल गए आप ही प्यार के वास्ते
दे रही है पता मद-भरी वादियां
जैसे पहले भी हम-तुम मिले हो यहां
ओ कितने जन्मों से
कितने जन्मों से जिसको बुलाते रहे, आज़माते रहे
ये बता दो कहीं तुम…

आज चलो मिलकर हम सब क़व्वाली गायेंगे – Qawwali Gaayenge (Aakraman)


फ़िल्म/एल्बम: आक्रमण (1975)
संगीतकार: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक/गायिका: आशा भोंसले, महेंद्र कपूर


बाग़ की रौनक बन नहीं सकता
कोई फूल अकेला
रंग बिरंगे फूलों से
लगता है यारों मेला

पंजाबी गाएंगे, मराठी गाएंगे
गुजरती गाएंगे, बंगाली गाएंगे
आज चलो मिलकर हम सब क़व्वाली गायेंगे

हंसी आती है हमको आजकल के नौजवानों पर
दवा दर्द-ए-जिगर की ढूंढते हैं जो दुकानों पर
तड़प के प्यार में सीने से बस इलज़ाम मिलता है
वतन की राह में मरने से ही आराम मिलता है
मौसम साल महिना झूठ, मरना सच है, जीना झूठ
इश्क वतन दा सच्ची बात, तेरा हुस्न हसीना झूठ
मौसम साल महिना झूठ, मरना सच है, जीना झूठ
शम्मे वतन पर बने के परवाने जल जाएंगे
आज चलो मिलकर…

यहां पैदा हुए हम या वहां, क्या फर्क पड़ता है
कोई हो रंग, कोई हो जुबां, क्या फर्क पड़ता है
जुबां है इसलिए कि आदमी मतलब है क्या समझे
न समझे इस से भी जो नासमझ उससे खुदा समझे
क्यूं है बहज़ुबानों पर, अपनों और बेगानों पर
अब तक लहराते थे हम, झंडा सिर्फ मकानों पर
क्यूं है बहज़ुबानों पर, अपनों और बेगानों पर
आज तिरंगा दिलों में अपने हम लहराएंगे
आज चलो मिलकर…

चोरी हो गई रात नैन की निंदिया – Chori Ho Gayi Raat Nain Ki Nindiya (Ishara)


फ़िल्म/एल्बम: इशारा (1964)
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, महेंद्र कपूर


चोरी हो गई रात नैन की निंदिया
सपनों में कोई आया, जाग उठी बिंदिया
चोरी हो गई रात नैन की निंदिया
चुभ चुभ गई अंखियों में रंग भरी बिंदिया
चोरी हो गई रात नैन…

दिल ने किसी की जो आहट पाई
रह गई मैं लेके एक अंगड़ाई
जिया जब धड़का तो खुल गई अंखियां
चोरी हो गई रात नयन…

दिन भी गई लेके, रैन भी लेके
वो जो गई मेरा चैन भी ले के
तुम जैसे नैना थे, तुम्हरी सुरतिया
चोरी हो गई रात नयन…

जागी हुई अंखियों में देखके लाली
लावे सब डारन को कजरा की प्याली
समझे नहीं कोई जियरा की बतियां
चोरी हो गई रात नैन…