रोज़ शाम आती थी – Roz Shaam Aati Thi (Imtihan)


फ़िल्म/एल्बम: इम्तिहान (1974)
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
गायक/गायिका: लता मंगेशकर


रोज़ शाम आती थी, मगर ऐसी न थी
रोज़ रोज़ घटा छाती थी, मगर ऐसी न थी
ये आज मेरी ज़िन्दगी में कौन आ गया
रोज़ शाम आती थी…

डाली में ये किसका हाथ, कर इशारे बुलाए मुझे
झूमती चंचल हवा, छू के तन गुदगुदाए मुझे
हौले-हौले, धीरे-धीरे कोई गीत मुझको सुनाए
प्रीत मन में जगाए, खुली आंख सपने दिखाए
ये आज मेरी ज़िन्दगी…

अरमानों का रंग है, जहां पलकें उठाती हूं मैं
हंस-हंस के है देखती, जो भी मूरत बनाती हूं मैं
जैसे कोई मोहे छेड़े, जिस ओर भी जाती हूं मैं
डगमगाती हूं मैं, दीवानी हुई जाती हूं मैं
ये आज मेरी ज़िन्दगी…

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कोई आया आने भी दे – Koi Aaya Aane Bhi De (Kala Sona)


फ़िल्म/एल्बम: काला सोना (1975)
संगीतकार: आर.डी.बर्मन
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
गायक/गायिका: आशा भोंसले


कोई आया, आने भी दे
कोई गया, जाने भी दे
तुझको तो है मस्ती में जीना, जी ले
कोई आया, कोई आया…

तू तो है दीवाना, बहके जा, महके जा
ख़ुशी के नशे में, ऐसे ही मज़े में, आहा
महफ़िल में रंग भरता जा सुबह तलक रंगीले
कोई आया, आने भी दे…

झूमे जा मस्ताने, छेड़े जा तराने
कल क्या हो क्या जाने, जाने ये तुम्हारी बला
आगे भी होने दे अंधेरा, सपने तो हैं चमकीले
कोई आया, आने भी दे…

मुंगड़ा मैं गुड़ की डली – Mungda Main Gud Ki Dali (Inkaar)


फ़िल्म/एल्बम: इनकार (1977)
संगीतकार: राजेश रौशन
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
गायक/गायिका: उषा मंगेशकर


तू मुंगड़ा-मुंगड़ा, मैं गुड़ की डली
मंगता है तो आजा रसिया
नाहीं तो मैं ये चली
तू मूंगड़ा, हां मूंगड़ा…

ले बैयां थाम गोरी गुलाबी
दारू की बोतल छोड़
ओ रे अनाड़ी शराबी
मुंगड़ा-मुंगड़ा-मुंगड़ा मैं गुड़ की डली
ज़रा मेरा नशा भी चख ले
आया जो मेरी गली

आफत की चाल देखे सो लुट जाए
दूं जिस पे नैना डाल
हाथों से प्याला सटक जाए
मूंगड़ा-मूंगड़ा-मूंगड़ा मैं गुड़ की डली
कैसा मुलगा है रे शर्मीला
तुझसे तो मुलगी भली
तू मूंगड़ा मुंगड़ा…

एक बार जान-ए-जाना – Ek Baar Jaan-e-Jaana (Kaala Sona)


फ़िल्म/एल्बम: काला सोना (1975)
संगीतकार: आर.डी.बर्मन
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
गायक/गायिका: आशा भोंसले


एक बार जान-ए-जाना
इकरार करते जाना
झूठ ही कह दो
मेरा दिल रख दो
चाहे फिर तुम न आना
एक बार जाने जाना…

झूठी बातें भी यार की
लगती है बातें प्यार की
हम भी क्या करें
तुम भी क्या करो
देखो ना सनम, अरे हां
एक बार जान-ए-जाना…

तुम जो मिल जाओ एक बार
मैं भी फिसला दूं वो बहार
भूले ना कभी सारी ज़िन्दगी
अल्लाह की कसम, अरे हां
एक बार जाने जाना…

ताक झुम नाचो नशे में – Tak Jhum Naacho Nashe Mein (Kaala Sona)


फ़िल्म/एल्बम: काला सोना (1975)
संगीतकार: आर.डी.बर्मन
गीतकार: मजरूह सुल्तानपुरी
गायक/गायिका: किशोर कुमार, आशा भोंसले


ताक झूम ताक झूम
ताक झूम नाचो नशे में चूर
यारा हमसे है थोड़ी दूर आने वाली बहार
झूमो रे गाओ रे आओ रे आओ

ये कंगन के हाथ, ये पायल के पांव
ये बिंदिया की बस्ती, ये झुमके का गांव
हाय गज़ब कितना सूना था सब
आज होने दो घुंघरू की खनकार
ताक झूम नाचो नशे…

आ डालूं गले, ये बाहों का हार
मैं जीना सिखाऊं, मैं सिखलाऊं प्यार
मिल के सनम आ मनाएंगे हम
आज दिल से दिल मिलने का त्यौहार
ताक झूम नाचो नशे…