धन धन धन धरती रे – Dhan Dhan Dhan Dharti Re (Raajniti)


फ़िल्म: राजनीति (2010)
संगीतकार: प्रीतम चक्रबर्ती
गीतकार: गुलज़ार
गायक/गायिका: शंकर महादेवन, सोनू निगम


बूढ़ा आसमां, धरती देखे रे
धन है धरती रे, धन-धन धरती रे

वो बहता है तो ये धरती सहती है
पीठ पे देह लेकर गंगा बहती है
तारे गिरे हैं कितने
धरती सूरज बुझे हैं कितने
ओ धरती रे धन धरती रे
धन धन धन धरती रे

बंटवारे हो तो ये धरती कटती है
सूखा पड़ता है तो धरती फटती है
एक पल जीती रे, एक पल मरती रे
धन है धरती रे, धन-धन धरती रे

कोई तो धोये ये दाग ज़मीं के
फिर से हरे हो जाएं बाग़ जमीं के
ये सोच के हर दिन हर रात
ओंस उतरती रे
ओ धरती रे धन धरती रे
बूढ़ा आसमां…

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बाबू राव मस्त है मस्त है – Baburao Mast Hai (Once Upon A Time In Mumbai)


फ़िल्म: वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई (2010)
संगीतकार: प्रीतम चक्रबर्ती
गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य
गायक/गायिका: मीका सिंह


अक्खा ये शहर बड़ा, अपनी जेब में पड़ा
खुल्ला राज है बस क्या
उंगली ये ट्रिग्गर पे है, डेरिंग भी जिग़र में है
अपनी ठाठ है बस क्या
ओ अपना टाइम है, ऐश-कैश भी ज़बरदस्त है
अंडरग्राउंड हर चीज़ का, यहां बंदोबस्त है
बाबू राव मस्त है मस्त है
मस्त मस्त है…

ओ कल तक तो चार सिक्के ही जेब में खनखना रहे थे
नोटों के बिस्तर आज है
काले धंधे के बाज़ार में जो बिकता कभी नहीं है
अपने सर पे वो ताज़ है
रोके जो कोई अगर, सीधा ठोक दे उधर
छः फुट गाड़ दे बस क्या
उंगली ये ट्रिग्गर पे है, डेरिंग भी जिग़र में है
अपनी ठाठ है बस क्या
ऐ ब्लैक वाइट में, रॉंग राईट सब, एडजस्ट है
अंडरग्राउंड हर चीज़ का यहां बंदोबस्त है
बाबू राव मस्त है…

ओ दुनिया ये मतलबी है, बड़ी कमीनी जगह है यारों
मांगे कुछ मिलता है कहां
जो चाहे ये वो कॉलर पकड़ के, हम तो निकालते हैं
वट अपना चलता है यहां
ओ अपने पैर के तले, सिस्टम सारा ये चले
जी ले फाड़ के बस क्या
उंगली ये ट्रिग्गर पे है, डेरिंग भी जिग़र में है
अपनी ठाठ है बस क्या
पीछे लाइन में है सब खड़े, अपन फर्स्ट है
अंडरग्राउंड हर चीज़ का यहां बंदोबस्त है
बाबू राव मस्त है…

अपनों से कैसा पर्दा – Apnon Se Kaisa Parda (Once Upon A Time In Mumbai)


फ़िल्म: वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई (2010)
संगीतकार: प्रीतम चक्रबर्ती
गीतकार: इरशाद कामिल
गायक/गायिका: सुनिधि चौहान, राणा मजूमदार


दुनिया में, लोगों को
धोखा कभी हो जाता है
आंखों ही, आंखों में
यारों का दिल खो जाता है
दुनिया में…

दो दिल दोनो जवां, आंखों का है ये बयां
दोनों के दरमियां, कोई भी हो ना यहां
पर्दा पर्दा हां, पर्दा पर्दा हां
अपनों से कैसा पर्दा
मोनिका ओ माय डार्लिंग
मोनिका ओ माय डार्लिंग

दिलबर की, फ़ितरत में, धोखा भी है और चाहत भी
जां जाए, तो जाए, सोचूं क्यूं जब मैंने उलफत की
जाए भी तो कहां, दुश्मन है सारा जहां
जिसपे भी हो गुमां, कहना तू उसका यहां
पर्दा पर्दा हां पर्दा…

हलचल सी, हर पल है, बेदाग़ अपनी जवानी है
बेकल मैं, बेकल तू, बेदर्द दिल की कहानी है
उठता दिल से धुआं, ये दिल है तेरा पता
आजा रह ले यहां, जाएगा अब तू कहां
पर्दा पर्दा हां पर्दा…
मोनिका ओ माय डार्लिंग

ऐ दिल है मुश्किल – Aye Dil Hai Mushkil (Aye Dil Hai Mushkil)




फ़िल्म/एल्बम: ऐ दिल है मुश्किल (2016)
संगीतकार: प्रीतम चक्रवर्ती
गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य
गायक/गायिका: अरिजीत सिंह


तू सफर मेरा, है तू ही मेरी मंज़िल
तेरे बिना गुज़ारा, ऐ दिल है मुश्किल
तू मेरा खुदा, तू ही दुआ में शामिल
तेरे बिना गुज़ारा, ऐ दिल है मुश्किल
मुझे आज़माती है तेरी कमी
मेरी हर कमी को है तू लाज़मी
जूनून है मेरा, बनूं मैं तेरे क़ाबिल
तेरे बिना गुज़ारा, ऐ दिल है मुश्किल

ये रूह भी मेरी, ये जिस्म भी मेरा
उतना मेरा नहीं, जितना हुआ तेरा
तूने दिया है जो, वो दर्द ही सही
तुझसे मिला है तो, इनाम है मेरा
मेरा आसमां ढूंढे तेरी ज़मीं
मेरी हर कमी को है तू लाज़मी
ज़मीं पे ना सही, तो आसमां में आ मिल
तेरे बिना गुज़ारा, ऐ दिल है मुश्किल

माना की तेरी, मौजूदगी से, ये ज़िन्दगानी महरूम है
जीने का कोई दूजा तरीका, ना मेरे दिल को मालूम है
तुझको मैं कितनी, शिद्दत से चाहूं, चाहे तो रहना तू बेखबर
मोहताज मंज़िल, का तो नहीं है, ये एक तरफ़ा मेरा सफ़र
सफ़र, खूबसूरत है मंज़िल से भी
मेरी हर कमी को है तू लाज़मी
अधूरा हो के भी, है इश्क़ मेरा क़ामिल
तेरे बिना गुज़ारा, ऐ दिल है मुश्किल

मेरी रूह का परिंदा फड़फड़ाये, बुलेया – Bulleya (Aye Dil Hai Mushkil)



फ़िल्म/एल्बम: ऐ दिल है मुश्किल (2016)
संगीतकार: प्रीतम चक्रवर्ती
गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य
गायक/गायिका: अमित मिश्रा, शिल्पा राव


मेरी रूह का परिंदा फड़फड़ाये
लेकिन सुकूं का जज़ीरा मिल न पाए
वे की करां, वे की करां
इक बार को तजल्ली तो दिखा दे
झूठी सही मगर तसल्ली तो दिला दे
वे की करां, वे की करां
रांझण दे यार बुल्लेया
सुन ले पुकार बुल्लेया
तू ही तो यार बुल्लेया
मुर्शिद मेरा, मुर्शिद मेरा
तेरा मुकाम कमले
सरहद के पार बुलेया
परवर दिगार बुलेया
हाफ़िज़ तेरा, मुर्शिद मेरा

मैं काबुल से लिपटी तितली की तरह मुहाजिर हूं
एक पल को ठहरूं, पल में उड़ जाऊं
वे मैं ता हूं पगडण्डी लब दी, ऐ जो राह जन्नत दी
तू मुड़े जहां मैं साथ मुड़ जाऊं
तेरे कारवां में शामिल होना चाहूं
कमियां तराश के मैं क़ाबिल होना चाहूं
वे की करां, वे की करां…

रान्झणा वे, रान्झणा वे
जिस दिन से आशना से, दो अजनबी हुए हैं
तन्हाइयों के लम्हें सब मुल्तवी हुए हैं
क्यूं आज मैं मोहब्बत फिर एक बार करना चाहूं
ये दिल तो ढूंढता है, इनकार के बहाने
लेकिन ये जिस्म कोई, पाबंदियां न माने
मिल के तुझे बगावत, खुद से ही यार करना चाहूं
मुझमें अगन है बाकी आज़माले
ले कर रही हूं खुद को मैं तेरे हवाले
वे रान्झणा, वे रान्झणा
रांझण दे यार बुल्लेया…