शगुन – Songs of Shagoon (1964)


फ़िल्म: शगुन / Shagoon (1964)
गायक/गायिका: सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: खय्याम
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: वहीदा रहमान, कमलजीत

बुझा दिये हैं खुद अपने हाथों, मोहब्बतों के दिये जला के
मेरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं, उम्मीद की बस्तियाँ बसा के

तुझे भुला देंगे अपने दिल से, ये फ़ैसला तो किया है लेकिन
न दिल को मालूम है न हम को, जियेंगे कैसे तुझे भुला के

कभी मिलेंगे जो रासते में, तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे
कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा, तो चुप रहेंगे नज़र झुका के

न सोचने पर भी सोचती हूँ, के ज़िन्दगानी में क्या रहेगा
तेरी तमन्ना को बस में कर के, तेरे खयालों से दूर जाके


फ़िल्म: शगुन / Shagoon (1964)
गायक/गायिका: तलत महमूद, मुबारक बेगम
संगीतकार: खय्याम
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: वहीदा रहमान, कमलजीत

इतने क़रीब आके भी क्या जाने किस लिये – 2
कुछ अजनबी से आप हैं, कुछ अजनबी से हम
कुछ अजनबी से आप हैं
वो एक बात जो थी फ़क़त आप के लिये – 2
वो एक बात कह न सके आप ही से हम – 2
कुछ अजनबी से आप हैं

ऐसी तो कोई क़ैद नहीं दिल की बात पर
अपस की बात है तो डरे क्यों किसी से हम
कुछ अजनबी से आप हैं…

तुम दूर हो तो मौत भी आये न हम को रास – 2
तुम पास तो जान भी दे दे खुशी से हम
कुछ अजनबी से आप हैं…

मौत एक वहम, और हक़ीकत है ज़िंदगी
इक दूसरे को माँगेंगे इस ज़िंदगी से हम
इक दूसरे को माँगेंगे इस ज़िंदगी से हम
इक दूसरे को माँगेंगे


फ़िल्म: शगुन / Shagoon (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: खय्याम
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: वहीदा रहमान, कमलजीत

पर्बतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है
सुरमई उजाला है, चम्पई अंधेरा है

दोनों वक़्त मिलते हैं दो दिलों की सूरत से
आस्मां ने खुश होके रँग सा बिखेरा है

ठहते-ठहरे पानी में गीत सर-सराते हैं
भीगे-भीगे झोंकों में खुशबुओं का डेरा है
पर्बतों के पेड़ों पर…

क्यों न जज़्ब हो जाएं इस हसीन नज़ारे में
रोशनी का झुरमट है मस्तियों का घेरा है
पर्बतों के पेड़ों पर…

अब किसी नज़ारे की दिल को आर्ज़ू क्यों है
जब से पा लिया तुमको सब जहाँ मेरा है

जब से पा लिया तुमको सब जहाँ मेरा है
पर्बतों के पेड़ों पर…


फ़िल्म: शगुन / Shagoon (1964)
गायक/गायिका: जगजीत कौर
संगीतकार: खय्याम
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: वहीदा रहमान, कमलजीत

तुम अपना रंज-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
तुम्हें ग़म की क़सम, इस दिल की वीरानी मुझे दे दो

ये माना मैं किसी क़ाबिल नहीं हूँ इन निगाहों में – 2
बुरा क्या है अगर, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो
तुम अपना…

मैं देखूँ तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है – 2
कोई दिन के लिये, अपनी निगहबानी मुझे दे दो
तुम अपना…

वो दिल जो मैने मांगा था मगर गैरों ने पाया – 2
बड़ी इनायत है अगर, उसकी पशेमानी मुझे दे दो
तुम अपना…


फ़िल्म: शगुन / Shagoon (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: खय्याम
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: वहीदा रहमान, कमलजीत

तुम चली जाओगी पर्छाइयाँ रह जाएंगी
कुछ न कुछ हुस्न की रानाइयाँ रह जाएंगी

सुन के इस झील के साहिल पे मिली हो मुझसे
जब भी देखूँगा यहीं मुझको नज़र आओगी
याद मिटती है न मंज़र कोई मिट सकता है
दूर जाकर भी तुम अपने को यहीं पाओगी
तुम चली जाओगी…

घुल के रह जाएगी झोंकों में बदन की खुशबू
ज़ुल्फ़ का अक्स घटाओं में रहेगा सदियों
फूल चुपके से चुरा लेंगे लबों की सुर्खी
ये जवान हुस्न फ़िज़ाओं में रहेगा सदियों
तुम चली जाओगी…

इस धड़कती हुई शदाब-ओ-हसीन वादी में
यह न समझो कि ज़रा देर का किस्सा हो तुम
अब हमेशा के लिये मेरे मुक़द्दर की तरह
इन नज़ारों के मुक़द्दर का भी हिस्सा हो तुम
तुम चली जाओगी…


फ़िल्म: शगुन / Shagoon (1964)
गायक/गायिका: सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: खय्याम
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: वहीदा रहमान, कमलजीत

ज़िंदगी ज़ुल्म सही ज़ब्र सही ग़म ही सही
दिल की फ़रियाद सही रूह का मातम ही सही
ज़िंदगी ज़ुल्म सही…

हमने हर हाल में जीने की कसम खाई है
अब यही हाल मुक़द्दर है तो शिक़वा क्यों हो
हम सलीके से निभा देंगे जो दिन बाकी हैं
चाह रुसवा न हुई दर्द भी रुसवा क्यों हो
ज़िंदगी ज़ुल्म सही…

हमको तक़दीर से बे-वजह शिकायत क्यों हो
इसी तक़दीर ने चाहत की खुशी भी दी थी
आज अगर काँपती पलकों को दिये हैं आँसू
कल थिरकते हुए होंठों को हँसी भी दी थी
ज़िंदगी ज़ुल्म सही…

हम हैं मायूस मगर इतने भी मायूस नहीं
एक न एक दिन तो यह अश्कों की लड़ी टूटेगी
एक न एक दिन तो छतेंगे यह ग़मों के बादल
एक न एक दिन उजाले की किरण फूटेगी
ज़िंदगी ज़ुल्म सही…

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तेरी आँख के आँसू पी जाऊं – Teri Aankh Ke Ansu Pee Jaoon (Jahan Ara)

फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण



तेरा ग़मख़्वार हूँ लेकिन मैं तुझ तक आ नहीं सकता
मैं अपने नाम तेरी बेकसी लिखवा नहीं सकता

तेरी आँख के आँसू पी जाऊं ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ
तेरे ग़म में तुझको बहलाऊं ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ

ऐ काश जो मिल कर रोते, कुछ दर्द तो हलके होते
बेकार न जाते आँसू, कुछ दाग़ जिगर के धोते
फिर रंज न होता इतना, है तनहाई में जितना
अब जाने ये रस्ता ग़म का, है और भी लम्बा कितना
हालात की उलझन सुलझाऊँ ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ
तेरी आँख के आँसू पी जाऊँ

क्या तेरी ज़ुल्फ़ का लेहरा, है अब तक वही सुनहरा
क्या अब तक तेरे दर पे, देती हें हवाएं पहरा
लेकिन है ये खाम-ओ-खयाली, तेरी ज़ुल्फ़ बनी है सवाली
मोहताज है एक कली की, इक रोज़ थी फूलों वाली
वो ज़ुल्फ़ें परेशां महकाऊं ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ
तेरी आँख के आँसू पी जाऊँ

फिर वही शाम वही ग़म वही तनहाई है – Phir Wohi Shaam Wohi Gham (Jahan Ara)

फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण



फिर वही शाम वही ग़म वही तनहाई है
दिल को समझाने तेरी याद चली आई है

फिर तसव्वुर तेरे पहलू में बिठा जाएगा
फिर गया वक़्त घड़ी भर को पलट आएगा
दिल बहल जाएगा आखिर ये तो सौदाई है
फिर वही शाम…

जाने अब तुझ से मुलाक़ात कभी हो के न हो
जो अधूरी रहे वो बात कभी हो के न हो
मेरी मंज़िल तेरी मंज़िल से बिछड़ आई है
फिर वही शाम…

फिर तेरे ज़ुल्फ़ के रुखसार की बातें होंगी
हिज्र की रात मगर प्यार की बातें होंगी
फिर मुहब्बत में तड़पने की क़सम खाई है
फिर वही शाम…

मैं तेरी नज़र का सुरूर हूँ – Main Teri Nazar Ka Suroor Hoon (Jahan Ara)

फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण



मैं तेरी नज़र का सुरूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
तेरे पास रहके भी दूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
मैं तेरी नज़र का सुरूर हूँ

(मुझे आँख से तो गिरा दिया
कहो दिल से भी क्या भुला दिया) – 2
तेरी आशिक़ी का ग़ुरूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
मैं तेरी नज़र का…

(तेरी ज़ुल्फ़ है मेरे हाथ में
के तू आज भी मेरे साथ है) – 2
तेरे दिल में भी मैं ज़रूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
मैं तेरी नज़र का…

ऐ सनम आज ये क़सम खाएँ – Aye Sanam Aaj Ye Kasam Khayen (Jahan Ara)

फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण



ऐ सनम
ऐ सनम आज ये क़सम खाएँ
मुड़ के अब देखने का नाम ना लें
प्यार की वादियों में खो जाएँ
ऐ सनम आज ये क़सम खाएँ
फ़ासले प्यार के मिटा डालें
और दुनिया से दूर हो जाएँ
ऐ सनम आज ये…

जिस तरफ़ जाएँ बहारों के सलाम आएँगे – 2
आसमानों से भी रंगीन पयाम आएँगे
तेरा जलवा है जहाँ मेरी जन्नत है वहाँ
तेरे होंठों की हँसी सौ बहारों का समाँ
ऐ सनम आज ये…

अपना ईमान फ़क़त अपनी मोहब्बत होगी
हर घड़ी इश्क़ की इक ताज़ा क़यामत होगी
देख कर रंग-ए-वफ़ा मुस्कुराएगा ख़ुदा
और सोचेगा ज़रा इश्क़ क्यों पैदा किया
इश्क़ क्यों पैदा किया – 2
ऐ सनम आज ये…