हल्का-हल्का है मुझे तेरा नशा – Halka Halka Hai Mujhe Tera Nasha (Raees)


फ़िल्म: रईस – Raees (2017)
गायक/गायिका: सोनू निगम, श्रेया घोषाल
गीतकार: जावेद अख्तर
संगीतकार: राम संपत


अंदाज़ तेरे बांके
ना जानू है कहां के
हम्म हम्म…
अंदाज़ तेरे बांके
ना जानू है कहां के

आज भी नई लगे तेरी हर अदा
छल्का-छल्का जो हुस्न तेरा
हल्का-हल्का है मुझे तेरा नशा
हल्का-हल्का है मुझे तेरा नशा

हो हो… तुम जो कहती हो (हा आह)
हूँ मेरी तुम सिर्फ मेरी हो (हा आह)
तो मेरा तुम मन झूम जाता है
मेरा मन झूम-झूम-झुम जाता है
हो… तुम जो कहते हो (हा आह)
मेरे ही तुम बांके रहते हो (हा आह)
तो मेरा मन गीत गाता है
मेरा मन गीत कोई गीत गाता है
हम्म… अंदाज़ तेरे बांके
ना जानू है कहां के
आज भी नई लगे तेरी हर अदा
छल्का-छल्का जो हुस्न तेरा
हल्का-हल्का है मुझे तेरा नशा
हल्का-हल्का है मुझे तेरा नशा

हल्का-हल्का है मुझे तेरा नशा
हल्का-हल्का है मुझे तेरा नशा

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घनन-घनन घिर-घिर आये बदरा – Ghanan Ghanan (Lagaan)


फ़िल्म/एल्बम: लगान (2001)
संगीतकार: ए.आर.रहमान
गीतकार: जावेद अख्तर
गायक/गायिका: अलका याग्निक, उदित नारायण, सुखविंदर सिंह, शंकर महादेवन, शान


घनन-घनन घिर-घिर आये बदरा
घन घनघोर कारे छाये बदरा
धमक-धमक गूंजे बदरा के डंके
चमक-चमक देखो बिजुरिया चमके
मन धड़काये बदरवा, मन धड़काये बदरवा
मन-मन धड़काये बदरवा

काले मेघा, काले मेघा, पानी तो बरसाओ
बिजुरी की तलवार नहीं, बूंदों के बान चलाओ
मेघा छाये, बरखा लाये
घिर-घिर आये, घिर के आये

कहे ये मन मचल-मचल, न यूं चल सम्भल-सम्भल
गये दिन बदल, तू घर से निकल
बरसने वाल है अब अमृत जल

दुविधा के दिन बीत गये, भईया मल्हार सुनाओ
घनन-घनन घिर-घिर…

रस अगर बरसेगा, कौन फिर तरसेगा
कोयलिया गायेगी बैठेगी मुण्डेरों पर
जो पंछी गायेंगे, नये दिन आयेंगे
उजाले मुस्कुरा देंगे अंधेरों पर
प्रेम की बरखा में भीगे-भीगे तनमन
धरती पे देखेंगे पानी का दरपन
जईओ तुम जहां-जहां, देखियो वहां-वहां
यही इक समां कि धरती यहां
है पहने सात रंगों की चूनरिया
घनन-घनन घिर-घिर…

पेड़ों पर झूले डालो और ऊंची पेंद बढ़ाओ
काले मेघा, काले मेघा…

आई है रुत मतवाली, बिछाने हरियाली
ये अपने संग में लाई है सावन को
ये बिजुरी की पायल, ये बादल का आंचल
सजाने लाई है धरती की दुल्हन को
डाली-डाली पहनेगी फूलों के कंगन
सुख अब बरसेगा आंगन-आंगन
खिलेगी अब कली-कली, हंसेगी अब गली-गली
हवा जो चली, तो रुत लगी भली
जला दे जो तन-मन वो धूप ढली
काले मेघा, काले मेघा…

मैं अलबेली, घूमूं अकेली – Main Albeli, Ghoomun Akeli (Zubeidaa)


फ़िल्म/एल्बम: ज़ुबैदा (2001)
संगीतकार: ए.आर.रहमान
गीतकार: जावेद अख्तर
गायक/गायिका: कविता कृष्णमूर्ति, सुखविंदर सिंह


रंगीली हो, सजीली हो
ऊ अलबेली ओ

मैं अलबेली, घूमूं अकेली
कोई पहेली हूं मैं
पगली हवाएं मुझे, जहां भी ले जाए
इन हवाओं की सहेली हूं मैं

तू है रंगीली, हो
तू है सजीली, हो

हिरनी हूं बन में, कली गुलशन में
शबनम कभी हूं मैं, कभी हूं शोला
शाम और सवेरे, सौ रंग मेरे
मैं भी नहीं जानूं, आखिर हूं मैं क्या

तू अलबेली, घूमे अकेली
कोई पहेली है तू
पगली हवाएं तुझे जहां भी ले जाए
इन हवाओं की सहेली है तू

तू अलबेली, घूमे अकेली
कोई पहेली, पहेली

मेरे हिस्से में आई हैं कैसी बेताबियां
मेरा दिल घबराता है मैं चाहे जाऊं जहां
मेरी बेचैनी ले जाए मुझको जाने कहां
मैं एक पल हूं यहां
मैं हूं इक पल वहां

तू बावली है, तू मनचली है
सपनों की है दुनिया, जिसमें तू है पली
मैं अलबेली…

मैं वो राही हूं, जिसकी कोई मंज़िल नहीं
मैं वो अरमां हूं, जिसका कोई हासिल नहीं
मैं हूं वो मौज के जिसका कोई साहिल नहीं
मेरा दिल नाज़ुक है
पत्थर का मेरा दिल नहीं

तू अनजानी, तू है दीवानी
शीशा ले के पत्थर की दुनिया में है चली
तू अलबेली…

महकी महकी है राहें, है ना – Mehki Mehki Hain Rahein, Hai Na (Zubeidaa)


फ़िल्म/एल्बम: ज़ुबैदा (2001)
संगीतकार: ए.आर.रहमान
गीतकार: जावेद अख्तर
गायक/गायिका: अलका याग्निक, उदित नारायण


महकी महकी है राहें
बहकी बहकी है निगाहें, है ना
हाय रे, हाय रे, हाय रे, हाय रे
घेरे हैं जो ये बाहें
पाई है मैंने पनाहें, है ना
हाय रे, हाय रे, हाय रे, हाय रे
गा, तू दिल के तारों पे गा
गीत ऐसा कोई नया
जो ज़िन्दगी में कभी हो ना पहले सुना
पलकों पे सपने सजा
सपनों में जादू जगा
तू मेरी राहों में चाहत की शम्में जला
महकी महकी है राहें…

मेरे दिल ने तोहफ़े ये तुमसे पाए
धूप के ग़म की, तुम लाये साये
मेरी अब जो भी ख़ुशी है
मुझे तुमसे ही मिली है, सुनो ना
तुम्हीं वो चांदनी हो जो
मेरी नज़रों में खिली है
कहीं ये तो नहीं है, वो आंखें हसीं
देखती है जो मुझको पिया
जो भी हूं, तेरी हूं, बस यही गुण है मेरा
गा, तू दिल के…

दिल की ये ज़िद है, दिल का है कहना
साथ तुम्हारे इसको है रहना
चलो कहीं दूर ही जाएं
नयी एक दुनिया बसाएं, सुनो ना
वहां बस मैं और तुम हों
मोहब्बत में हम गुम हों
अब हो उलझान कोई, अब हो बंधन कोई
हो नहीं सकते हम अब जुदा
ये तेरा, ये मेरा आखिरी है फैसला
हम्म…

धीमे धीमे गाऊं – Dheeme Dheeme Gaaun (Zubeidaa)


फ़िल्म/एल्बम: ज़ुबैदा (2001)
संगीतकार: ए.आर.रहमान
गीतकार: जावेद अख्तर
गायक/गायिका: कविता कृष्णमूर्ति


धीमे-धीमे गाऊं, धीरे-धीरे गाऊं
होले-होले गाऊं, तेरे लिये पिया
गुन-गुन मैं गाती जाऊं
छुन-छुन पायल छनकाऊं
सुन-सुन कब से दोहराऊं
पिया पिया पिया

गुलशन महके-महके, ये मन बहके-बहके
और तन दहके-दहके, क्यों है बता पिया
मन की जो हालत है ये, तन की जो रंगत है ये
तेरी मोहब्बत है ये, पिया पिया पिया

ज़िन्दगी में तू आया तो, धूप में मिला साया तो
जागे नसीब मेरे
अनहोनी को था होना, धूल बन गई है सोना
आ के करीब तेरे
प्यार से मुझको तूने छुआ है
रूप सुनहरा तब से हुआ है
कहूं और क्या, तुझे मैं पिया, ओ
तेरी निगाहों में हूं, तेरी ही बाहों में हूं
ख्वाबों की राहों में हूं, पिया पिया पिया
गुन-गुन मैं गाती…

पिया पिया…
मैंने जो खुशी पाई है, झूम के जो रुत आई है
बदले ना रुत वो कभी
दिल को देवता जो लगे, सर झुका है जिसके आगे
टूटे ना बुत वो कभी
कितनी है मीठी, कितनी सुहानी
तूने सुनाई है जो कहानी
मैं जो खो गई, नई हो गई, ओ
आंखों में तारे चमके, रातों में जुगनू दमके
मिट गये निशान गम के, पिया पिया पिया
गुन-गुन मैं गाती…