दिल मेरा दिल है अकेला – Dil Mera Dil Hai Akela (Love Ke Liye Kuchh Bhi Karega)


फ़िल्म: लव के लिए कुछ भी करेगा (2001)
संगीतकार: विशाल भारद्वाज
गीतकार: अब्बास टायरवाला
गायक/गायिका: उदित नारायण


दिल मेरा दिल है अकेला
ढूंढे रे ढूंढे रे लैला
अंजू की आंखों में, पारो की पलकों में
नेहा के नखरे में, नीना के नक़्शे में
गीता के गालों में, बॉबी के बालों में
शालू की हाय गलियों में
दिल मेरा दिल है…

पूजा के पैरों की पूजा करूं
दिल बोले काम ना दूजा करूं
राधा की रौनक से रैना सजे
तो अपने आप ही बंसी बजे
ज्योति की लौ में जलूं
चंचल के संग चलूं
अंजू की आंखों में…

ढूंढूं अनामिका के नाम को
परवाना शमा का हूं शाम को
रूबी की पहनूं अंगूठी में
बातें नहीं करता हूं झूठी मैं
सपना के सपने बुनूं
सीमा में सीमित रहूं
अंजू की आंखों में…

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पा लिया है प्यार तेरा अब नहीं खोना – Paa Liya Hai Pyar Tera (Kyo Kii… Main Jhuth Nahin Bolta)


फ़िल्म: क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता (2001)
संगीतकार: आनंद राज आनंद
गीतकार: देव कोहली
गायक/गायिका: अल्का याग्निक, उदित नारायण


पा लिया है प्यार तेरा अब नहीं खोना
ओ मेरे सोना, तुम मेरे हो ना
पा लिया है प्यार तेरा अब नहीं खोना
ओ मेरी सोना, तुम मेरी हो ना

बड़ी हसरतों से तुझे देखती हूं
तेरे दिल में अपनी जगह ढूंढती हूं
मेरा प्यार तुझसे सदा ये कहेगा
मेरा दिल है तेरा, तेरा ही रहेगा
अच्छा लगता है जानू, फिर से कहो ना
ओ मेरे सोना…

दीवानी हूं तेरी, तू अपना बना ले
इन आंखों में मेरा, सपना सजा ले
मैं तय कर चुका हूं, तुझे ही चुनूंगा
कसम है तेरी, तेरा दूल्हा बनूंगा
कब ले के आओगे बारात ये कहो ना
ओ मेरे सोना…

शावा शावा रूप है तेरा सोणा सोणा – Say Shava Shava (Kabhi Khushi Kabhi Gham)


फ़िल्म: कभी ख़ुशी कभी ग़म (2001)
संगीतकार: आदेश श्रीवास्तव
गीतकार: समीर
गायक/गायिका: अमिताभ बच्चन, सुदेश भोंसले, सुनिधि चौहान, उदित नारायण, आदेश श्रीवास्तव, अल्का याग्निक, अमित कुमार


से शावा शावा…
रूप है तेरा सोणा सोणा
सोणी तेरी पायल
छन छना छन ऐसे छनके
कर दे सबको घायल
कह रहा आंखों का काजल
इश्क़ में जीना मरना
एव्रीबॉडी से शावा शावा माहिया
से शावा शावा…

रूप है मेरा सोणा सोणा
सोणी मेरी पायल
छन छना छन ऐसे छनके
कर दे सबको घायल
कह रहा आंखों का काजल
इश्क़ में जीना मरना
एव्रीबॉडी से शावा शावा माहिया
से शावा शावा…

माहिया वे आजा माही
माहिया वे आजा…

आजा गोरी नच ले, हे शावा
नच ले वे नच ले, हे शावा
आजा गोरी नच ले…

देखा तैनूं पहली-पहली बार वे
होने लगा दिल बेक़रार वे
रब्बा मैनूं की हो गया, दिल जाणिये
हाय मैनूं की हो गया
सुन के तेरी बातें सोणे यार वे
माही मैनूं तेरे नाल प्यार वे
हाय मैं मर जावां दिल जाणिये
हाय मैं मर जावां
से शावा शावा माहिया…
ते शावा शावा भंगड़ा…

इन क़दमों में सांसें वार दे
रब से ज़्यादा तुझे प्यार दे
रब मैनूं माफ़ करे, रब्बा खैरिया
हाय मैनूं माफ़ करे
तुम तो मेरी जिन्द मेरी जान वे
मेरी तू जमीं है, आसमान वे
तुझ बिन मैं की करां, रब्बा खैरिया
हाय वे मैं की करां
से शावा शावा माहिया…
रूप है तेरा सोणा…

उड़ जा काले कावां – Ud Jaa Kaale Kaava (Gadar – Ek Prem Katha)


फ़िल्म: गदर – एक प्रेम कथा (2001)
संगीतकार: उत्तम सिंह
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक/गायिका: उदित नारायण, अल्का याग्निक, निहार


उड़ जा काले कावां तेरे मुंह विच खंड पावां
ले जा तू संदेसा मेरा, मैं सदके जावां
बागों में फिर झूले पड़ गए
पक गयां मिठियां अम्बियां
ये छोटी-सी ज़िन्दगी ते
राता लम्बियां-लम्बियां
ओ घर आजा परदेसी
कि तेरी-मेरी एक जिंदड़ी

छम-छम करता आया मौसम, प्यार के गीतों का
रस्ते पे अंखियां रस्ता देखें, बिछड़े मीतों का
आज मिलन की रात ना छेड़ो बात जुदाई वाली
मैं चुप, तू चुप, प्यार सुने बस, प्यार ही बोले खाली
ओ घर आजा परदेसी…

ओ मितरा, ओ यारा, यारी तोड़ के मत जाना
मैंने जग छोड़ा, तू मुझको, छोड़ के मत जाना
ऐसा हो नहीं सकता, हो जाये तो मत घबराना
मैं दौड़ी आऊंगी, तू बस इक आवाज़ लगाना
ओ घर आजा परदेसी…


उड़ जा काले कावां तेरे मुंह विच खंड पावां
ले जा तू संदेसा मेरा, मैं सदके जावां
बागों में फिर झूले पड़ गए
पक गयां मिठियां अम्बियां
ये छोटी-सी ज़िन्दगी ते
राता लम्बियां-लम्बियां
ओ घर आजा परदेसी
कि तेरी-मेरी एक जिंदड़ी

कितनी दर्द भरी है, तेरी-मेरी प्रेम कहानी
सात समुन्दर जितना अपनी, आंखों में है पानी
मैं दिल से, दिल मुझसे करता, है जब तेरी बातें
सावन आने से पहले हो जाती हैं बरसातें
ओ घर आजा परदेसी…

पर्वत कितने ऊंचे, कितने गहरे होते हैं
कुछ मत पूछो प्यार पे कितने, पहरे होते हैं
इश्क़ में जाने क्या हो जाता, है ये रब ही जाने
तोड़ के सारी दीवारें, मिल जाते हैं दीवाने
ओ ले जा मुझे परदेसी
कि तेरी मेरी एक जिंदड़ी


छम-छम करता आया मौसम, प्यार के गीतों का
रस्ते पे अंखियां रस्ता देखें, बिछड़े मीतों का
सारी-सारी रात जगाये मुझको तेरी यादें
मेरे सारे गीत बने मेरे दिल की फरियादें
ओ घर आजा परदेसी…

धड़क-धड़क धुआं उड़ाए रे – Dhadak Dhadak (Bunty Aur Babli)


फ़िल्म: बंटी और बबली (2005)
संगीतकार: शंकर-एहसान-लॉय
गीतकार: गुलज़ार
गायक/गायिका: उदित नारायण, सुनिधि चौहान, निहिरा जोशी


ये वर्ल्ड है ना वर्ल्ड
इसमें दो तरह के लोग होते हैं
एक, जो सारी ज़िन्दगी एक ही काम करते
और दूसरे जो एक ही ज़िन्दगी में सारे काम कर देते हैं
ये मैं नहीं, ये वो दोनों कहते थे
और कहते क्या थे, करते थे
और ऐसा करते थे, जैसा ना किसी ने किया
और न शायद कोई कर पाएगा

छोटे-छोटे शहरों से, खाली बोर दुपहरों में
हम तो झोला उठा के चले
बारिश कम-कम लगती है, नदियां मद्धम लगती है
हम समंदर के अन्दर चले
ओ हो हो हम चले, हम चले ओए रामचंद रे
धड़क-धड़क, धड़क-धड़क
धुआं उड़ाए रे
धड़क-धड़क, धड़क-धड़क
सिटी बजाये रे
धड़क-धड़क…

ओहो ज़रा रास्ता तो दो
थोड़ा सा बादल चखना है
बड़ा-बड़ा कोयले से
नाम फ़लक पे लिखना है
चांद से होकर सड़क जाती है
उसी पे आगे जा के अपना मकां होगा
हम चले, हम चले…
धड़क-धड़क…

आ तो चले सर पे लिए
अम्बर की ठंडी फुन्कारिया
हम ही ज़मीं, हम आसमां
क़स्बा कस्मा नु खाये बाक़ी जहां
चांद का टिका, मत्थे लगा के
रात दिन तारों में, जीना-वीना इज़ी नहीं
हम चले, हम चले…
धड़क-धड़क…