आई झूम के बसंत झूमो संग संग में – Aai Jhoom Ke Basant Jhoomo Sang Sang


फ़िल्म: उपकार / Upkaar (1967)
गायक/गायिका: शमशाद बेगम, आशा भोसले, मन्‍ना डे, महेन्द्र कपूर
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: प्रेम धवन
अदाकार: मनोज कुमार


पीली पीली सरसों फूली पीली उड़े पतंग
अरे पीली पीली उड़ी चुनरिया पीली पगड़ी के संग
गले लगा के दुश्मन को भी यार बना लो काहे मलंग
आई झूम के बसंत झूमो संग संग में
आई झूम के बसंत झूमो संग संग में
आज रंग लो दिलों को ओ ओ ओ ओ रंग लो रंग लो दिलों को
इक रंग में आई झूम के बसंत
झूमो संग संग में आई झूम के

है ये धरती सभी की गगन सब का
तेरा मेरा ना कहो है ये चमन सबका हो
तेरा मेरा ना कहो है ये चमन सबका
हो तेरा मेरा जो कहे
हो तेरा मेरा जो कहे वो है छोटे दिल का
खरे दिल से बदल ले जो है खोटे दिल का
हो खरे दिल से बदल ले जो है खोटे दिल का
हो कोई छोटा ना बड़ा
कोई छोटा ना बड़ा हो कोई खोटा ना खरा
ओ जीना सीख लो ज़रा इक नये ढंग में आई झूम के
अहा ओ आई झूम के ओहो ओ आई झूम के बसंत
झूमो संग संग में आई झूम के

मेरी हट्टी के लाखों मन दाने दाने
तेरी भट्टी में भून गये जा के ओ जा के
तेरी भट्टी में भुन गये जा के
दिल को रखना ओ बुड्ढे बचा के बचा के
भून डालूँगी में दानों में मिला के
हाये भून डालूँगी में दानों में मिला के
ओ प्यारी
फ़िटे मूँह छोड़ पीछा अर्रे ओ हट्टी वाले
तभी छोडूंगा जब तू ने हाँ की ओ प्यारी
तभी छोडूंगा जब तू ने हाँ की
बुढापे की शरम कर
फ़िटे मूँह बच्चों वाले ओ दो दो बच्चों वाले
इनको भी तो ज़रूरत है मां की ओ प्यारी
इनको भी तो ज़रूरत है मां की
ना ना बापू
क्या है बेटे बापू झूठ ना ऐसे बोल
हम दो हीरे हैं अनमोल हम को भट्टी में ना रोल
अपने दिल के संग में आई झूम के
अहा ओ आई झूम के ओहो ओ आई झूम के बसंत
झूमो संग संग में आई झूम के

आज लागे नहीं धरती पे मेरे पांव रे
बात दिल की चाहे जान ही ले सारा गांव रे
आज लागे नहीं धरती पे मेरे पांव रे
बात दिल की चाहे जान ही ले सारा गांव रे
ओ बरसे प्यार की फुहार हो ओ ओ ओ ओ
बरसे प्यार की फुहार है खुशी का ये मेला
आज रहा ना रहेगा ना कोई भी अकेला
आज रहा है न रहेगा ना कोई भी अकेला
जाने तुझमें क्या है हाय
जाने तुझ में क्या है बस तुझको याद करूं दिन रात
दिल ये चाहे थाम के हाथ चल दूं तेरे संग मैं
आई झूम के आहा ओ आई झूम के
ओहो ओ आई झूम के बसंत झूमो संग संग में
आई झूम के बसंत झूमो संग संग में
आज रंग लो दिलों को ओ ओ ओ ओ ओ रंग लो रंग लो दिलों को
इक रंग में आई झूम के बसंत झूमो संग संग में
आई झूम के बसंत झूमो संग संग में हे हाः
आ हा आ हा आ हा आ हा ओ हो ओ हो ओ हो ओ हो

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दीवानों से ये मत पूछो दीवानों पे क्या गुज़री है – Deewanon Se Ye Mat Poochho


फ़िल्म: उपकार / Upkaar (1967)
गायक/गायिका: मुकेश
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: क़मर जलालाबादी
अदाकार: प्राण, मनोज कुमार, आशा पारेख


दीवानों से ये मत पूछो दीवानों पे क्या गुज़री है
हाँ उनके दिलों से ये पूछो, अरमानों पे क्या गुज़री है
दीवानों से ये मत पूछो…

औरों को पिलाते रहते हैं
और ख़ुद प्यासे रह जाते हैं
ये पीने वाले क्या जाने
पैमानों पे क्या गुज़री है
दीवानों से ये मत पूछो…

मालिक ने बनाया इनसाँ को
इनसान मुहब्बत कर बैठा
वो ऊपर बैठा क्या जाने
इनसानों पे क्या गुज़री है
दीवानों से ये मत पूछो…

ज़माने ने मारे जवाँ कैसे-कैसे – Zamane Ne Maare Jawaan Kaise Kaise


फ़िल्म: बहारों के सपने / Baharon Ke Sapne (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: आर. डी. बर्मन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: राजेश खन्ना, आशा पारेख


ज़माने ने मारे जवाँ कैसे-कैसे
ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे-कैसे
पले थे जो कल रंग में धूल में
हुए दर-ब-दर कारवाँ कैसे-कैसे
ज़माने ने मारे…

हज़ारों के तन कैसे शीशे हों चूर
जला धूप में कितनी आँखों का नूर
चेहरे पे ग़म के निशाँ कैसे-कैसे
ज़माने ने मारे…

लहू बन के बहते वो आँसू तमाम
कि होगा इन्हीं से बहारों का नाम
बनेंगे अभी आशियाँ कैसे-कैसे
ज़माने ने मारे…

क्या जानूँ सजन होती है क्या ग़म की शाम – Kya Janoon Sajan Hoti Hai Kya


फ़िल्म: बहारों के सपने / Baharon Ke Sapne (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: आर. डी. बर्मन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: राजेश खन्ना, आशा पारेख


क्या जानूँ सजन होती है क्या ग़म की शाम
जल उठे सौ दिये जब लिया तेरा नाम
क्या जानूं साजन…

काँटों में मैं खड़ी
नैनों के द्वार पे
निस दिन बहार के देखूँ सपने
चेहरे की धूल क्या
चंदा की चाँदनी
उतरी तो रह गई मुख पे अपने
क्या जानूँ साजन…

जबसे मिली नज़र
माथे पे बन गये
बिंदिया नयन तेरे देखो सजना
धर ली जो प्यार से
मेरी कलायियाँ
पिया तेरी उँगलियाँ हो गई कंगना
क्या जानूँ साजन…

चुनरी सम्भाल गोरी, उड़ी चली जाए रे – Chunri Sambhal Gori Udi Udi Jaay Re


फ़िल्म: बहारों के सपने / Baharon Ke Sapne (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मन्ना डे
संगीतकार: आर. डी. बर्मन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: राजेश खन्ना, आशा पारेख


चुनरी सम्भाल गोरी, उड़ी चली जाए रे
मार न दे डंक कहीं, नज़र कोई हाय
देख देख पग न फिसल जाए रे
सारा रारा रारा राह ह आह

फिसलें नहीं चल के, कभी दुख की डगर पे
ठोकर लगे हँस दें, हम बसने वाले, दिल के नगर के
अरे, हर कदम बहक के सम्भल जाए रे! STOP!
सारा रारा रारा राह ह आह

किरणें नहीं अपनी, तो है बाहों का सहारा
दीपक नहीं जिन में, उन गलियों में है हमसे उजाले
अरे, भूल ही से चाँदनी खिल जाए रे! STOP!
सारा रारा रारा राह ह आह

पल छिन पिया पल छिन, अँखियों का अंधेरा
रैना नहीं अपनी, पर अपना होगा कल का सवेरा
अरे, रैन कौन सी जो न ढल जाए रे! STOP!
सारा रारा रारा राह ह आह