धन धन धन धरती रे – Dhan Dhan Dhan Dharti Re (Raajniti)


फ़िल्म: राजनीति (2010)
संगीतकार: प्रीतम चक्रबर्ती
गीतकार: गुलज़ार
गायक/गायिका: शंकर महादेवन, सोनू निगम


बूढ़ा आसमां, धरती देखे रे
धन है धरती रे, धन-धन धरती रे

वो बहता है तो ये धरती सहती है
पीठ पे देह लेकर गंगा बहती है
तारे गिरे हैं कितने
धरती सूरज बुझे हैं कितने
ओ धरती रे धन धरती रे
धन धन धन धरती रे

बंटवारे हो तो ये धरती कटती है
सूखा पड़ता है तो धरती फटती है
एक पल जीती रे, एक पल मरती रे
धन है धरती रे, धन-धन धरती रे

कोई तो धोये ये दाग ज़मीं के
फिर से हरे हो जाएं बाग़ जमीं के
ये सोच के हर दिन हर रात
ओंस उतरती रे
ओ धरती रे धन धरती रे
बूढ़ा आसमां…

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अजनबी क्यूं हो गया है मितरा – Ajnabi Kyun Ho Gaya Hai Mitra (Band Baaja Baaraat)


फ़िल्म: बैंड बाजा बारात (2010)
संगीतकार: सलीम-सुलेमान
गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य
गायक/गायिका: अमिताभ भट्टाचार्य


रास्तो में खो गया है मितरा
अजनबी क्यूं हो गया है मितरा, मितरा
कुछ तो कमी है सावन
सावन सा क्यूं न लागे मितरा, मितरा
शाम-ओ-सहर क्यूं मन का
आंगन ये सूना लागे मितरा, मितरा
धूप ले के जो गया है मितरा
अजनबी क्यूं हो गया है मितरा

यारा हाए यारा, कैसे जाने यारा, बिछड़ा
यारा हाए यारा, संग चैन सारा बिछड़ा

दिल के तारों में, क्यूं हज़ारों में, दर्द जागे हैं
हमने बांधे जो, रेशमी सारे टूटे धागे हैं
बिरहा तो ये हरजाना है, हमको अदा कर जाना है
सिर्फ यादों का ताना बाना है, क्या छुपाना है
हाल-ए-दिल जो हो गया है मितरा, मितरा
अजनबी क्यूं हो गया है…

तू गन्दी अच्छी लगती है – Tu Gandi Achchhi Lagti Hai (Love Sex Aur Dhokha)


फ़िल्म: लव सेक्स और धोखा (2010)
संगीतकार: स्नेहा खानवलकर
गीतकार: दिबाकर बैनर्जी
गायक/गायिका: कैलाश खेर


तू गन्दी अच्छी लगती है
तू बंदी अच्छी लगती है
तू कली सी कच्ची
तू तली सी मच्छी लगती है…

मैं सात जनम उपवासा हूं
और सात समंदर प्यासा हूं
जी भर के तुझको पी लूंगा
तू गन्दी अच्छी लगती है…

मैं ना जानूं क्या शर्म हया
तुझे जान के मैं सब भूल गया
जो कहते हैं ये कुफ़र खता
आखिर क्या है मुझको क्या पता
तू गन्दी अच्छी लगती है…

सच सच मैं बोलने वाला हूं
मैं मन का बेहद काला हूं
तेरे रंग में मन रंग लूंगा
तू रंगी अच्छी लगती है
तू सच्ची अच्छी लगती है
तू अच्छी अच्छी लगती है
तू झूठी, तू रूठी लगती है
तू गन्दी…

बाबू राव मस्त है मस्त है – Baburao Mast Hai (Once Upon A Time In Mumbai)


फ़िल्म: वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई (2010)
संगीतकार: प्रीतम चक्रबर्ती
गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य
गायक/गायिका: मीका सिंह


अक्खा ये शहर बड़ा, अपनी जेब में पड़ा
खुल्ला राज है बस क्या
उंगली ये ट्रिग्गर पे है, डेरिंग भी जिग़र में है
अपनी ठाठ है बस क्या
ओ अपना टाइम है, ऐश-कैश भी ज़बरदस्त है
अंडरग्राउंड हर चीज़ का, यहां बंदोबस्त है
बाबू राव मस्त है मस्त है
मस्त मस्त है…

ओ कल तक तो चार सिक्के ही जेब में खनखना रहे थे
नोटों के बिस्तर आज है
काले धंधे के बाज़ार में जो बिकता कभी नहीं है
अपने सर पे वो ताज़ है
रोके जो कोई अगर, सीधा ठोक दे उधर
छः फुट गाड़ दे बस क्या
उंगली ये ट्रिग्गर पे है, डेरिंग भी जिग़र में है
अपनी ठाठ है बस क्या
ऐ ब्लैक वाइट में, रॉंग राईट सब, एडजस्ट है
अंडरग्राउंड हर चीज़ का यहां बंदोबस्त है
बाबू राव मस्त है…

ओ दुनिया ये मतलबी है, बड़ी कमीनी जगह है यारों
मांगे कुछ मिलता है कहां
जो चाहे ये वो कॉलर पकड़ के, हम तो निकालते हैं
वट अपना चलता है यहां
ओ अपने पैर के तले, सिस्टम सारा ये चले
जी ले फाड़ के बस क्या
उंगली ये ट्रिग्गर पे है, डेरिंग भी जिग़र में है
अपनी ठाठ है बस क्या
पीछे लाइन में है सब खड़े, अपन फर्स्ट है
अंडरग्राउंड हर चीज़ का यहां बंदोबस्त है
बाबू राव मस्त है…

अल्लाह ही रहम, मौला ही रहम – Allah Hi Raham (My Name Is Khan)



फ़िल्म: माई नेम इज़ खान (2010)
संगीतकार: शंकर-एहसान-लॉय
गीतकार: निरंजन अयंगर
गायक/गायिका: राशिद खान


अल्लाह ही रहम, मौला ही रहम

कैसे इश्क़ से सज गई राहें
जब से देखी हैं तेरी निगाहें
या खुदा, मैं तो तेरा हो गया
कैसे इश्क़ से सज…

तू जो करम फरमाये
अगम इंसान हो जाए
मस्ताना हो के, दीवाना हो के
तुझे पल में पा जाए
सांसें फ़िज़ा में तू है
रूह-ए-बयां में तू है
हर इब्तिदा में, हर इंतेहा में
हर एक नज़र-ए-ज़बां में तू है
अल्लाह ही रहम…

ओ हर ज़र्रे में तू है छुपा
फिर ढूंढे क्यूं तेरा पता
तू है धूप में, तू है साए में
अपने में है, तू पराए में
अल्लाह, अल्लाह…

मेरी रोम रोम भी एक अदा
तू है इश्क़ मेरा, ऐ मेरे खुदा
हर सांस में है बस तेरी दुआ
तू इश्क़ मेरा, ऐ मेरे खुदा
तुझे पाने से बढ़कर कुछ भी नहीं
तुझे देखते ही दिल बोले यही
अल्लाह ही रहम…
कैसे इश्क़ से…