छोटी सी मुलाकात प्यार – Chhoti Si Mulaqat Pyar Ban Gayi (Chhoti Si Mulaqat)


फ़िल्म/एल्बम: छोटी सी मुलाकात (1967)
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: हसरत जयपुरी
गायक/गायिका: मो.रफ़ी, आशा भोंसले


छोटी सी मुलाक़ात प्यार बन गई
प्यार बन के गले का हार बन गई
या या यिप्पी यिप्पी या या या…
छोटी सी मुलाकात…

बांकपन तेरा, प्यार की अदा
होश ले गई, सरकार की अदा
सरकार की अदा दिलदार बन गई
दिलदार बन के गले का हार बन गई
या या यिप्पी…

आगे बढ़ चुके मंज़िलों से हम
पीछे रह गए चांद के कदम
रात ये सुहानी बहार बन गई
बहार बन के गले का हार बन गई
या या यिप्पी…
छोटी सी मुलाकात…

तुम हो बांह में, दिल की राह में
तुम खयाल में, तुम निगाह में
जब झुकी नज़र इकरार बन गई
इकरार बन के गले का हार बन गई
या या यिप्पी…
छोटी सी मुलाकात…

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तौबा ये मतवाली चाल, झुक जाए फूलों की डाल – Tauba Ye Matwali Chaal


फ़िल्म: पत्थर के सनम / Patthar Ke Sanam (1967)
गायक/गायिका: मुकेश
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: मुमताज़, मनोज कुमार


तौबा ये मतवाली चाल, झुक जाए फूलों की डाल
चाँद और सूरज आकर माँगें, तुझसे रँग-ए-जमाल
हसीना! तेरी मिसाल कहाँ

सितम ये अदाओं की रानाइयाँ हैं
कयामत है क्या तेरी अँगड़ाइयाँ हैं
बहार-ए-चमन हो, घटा हो धनक हो
ये सब तेरी सूरत की परछैयाँ हैं
के तन से, उड़ता गुलाल कहाँ

हूँ मैं भी दीवानों का इक शहज़ादा
तुझे देखकर, हो गया कुछ ज़्यादा
ख़ुदा के लिए मत बुरा मान जाना
ये लब छू लिये हैं, यूँ ही बे-इरादा
नशे में इतना ख़याल कहाँ

यही दिल में है तेरे नज़दीक आ के
मिलूँ तेरे पलकों पे पलके झुका के
जो तुझ सा हसीं सामने हो तो कैसे
चला जाऊँ पहलू में दिल को दबा के
कि मेरी इतनी मजाल कहाँ

पत्थर के सनम तुझे हमने मुहब्बत का ख़ुदा जाना – Patthar Ke Sanam Tujhe Hamne


फ़िल्म: पत्थर के सनम / Patthar Ke Sanam (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: वहीदा रहमान, मुमताज़, मनोज कुमार


पत्थर के सनम, तुझे हमने, मुहब्बत का ख़ुदा जाना
बड़ी भूल हुई, अरे हमने, ये क्या समझा ये क्या जाना

चेहरा तेरा दिल में लिये, चलते चले अंगारों पे
तू हो कहीं, सजदे किये हमने तेरे रुख़सारों पे
हम सा न हो, कोई दीवाना, पत्थर के…

सोचा न था बढ़ जाएंगी, तनहाइयां जब रातों की
रस्ता हमें दिखलाएंगी, शमा-ए-वफ़ा इन आँखों की
ठोकर लगी, फिर पहचाना, पत्थर के…

ऐ काश के होती ख़बर तूने किसे ठुकराया है
शीशा नहीं, सागर नहीं, मंदिर-सा इक दिल ढाया है
सारा आसमान, है वीराना, पत्थर के…

महबूब मेरे तू है तो दुनिया कितनी हसीं है – Mehboob Mere Tu Hai To Duniya


फ़िल्म: पत्थर के सनम / Patthar Ke Sanam (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मुकेश
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: वहीदा रहमान, मुमताज़, मनोज कुमार


महबूब मेरे महबूब मेरे – 2
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे महबूब मेरे
तू है तो दुनिया कितनी हसीं है
जो तू नहीं तो कुछ भी नहीं है
महबूब मेरे…

तू हो तो बढ़ जाती है क़ीमत मौसम की
ये जो तेरी आँखें हैं शोला शबनम सी
यहीं मरना भी है मुझको मुझे जीना भी यहीं है
महबूब मेरे…

अरमाँ किसको जन्नत की रंगीं गलियों का
मुझको तेरा दामन है बिस्तर कलियों का
जहाँ पर हैं तेरी बाँहें मेरी जन्नत भी वहीं है
महबूब मेरे…

रख दे मुझको तू अपना दीवाना कर के
नज़दीक आजा फिर देखूँ तुझको जी भर के
मेरे जैसे होंगे लाखों कोई भी तुझसा नहीं है
महबूब मेरे…
हो महबूब मेरे…
महबूब मेरे…

कोई नहीं है फिर भी है मुझको क्या जाने किसका इंतज़ार – Koi Naheen Hai Fir Bhi


फ़िल्म: पत्थर के सनम / Patthar Ke Sanam (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: वहीदा रहमान, मुमताज़, मनोज कुमार


कोई नहीं है फिर भी है मुझको – 2
क्या जाने किसका इंतज़ार हो ओ ओ
कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार हो ओ ओ
ये भी ना जानूँ लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार

सोचूँ ये हैं उंगलियां किसके प्यार की
गालों को छुये जो डाली बहार की
छुये जो डाली बहार की
सोचूँ ये हैं उंगलियां किसके प्यार की
कौन है ऐ हवा ऐ बहार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार – 2

पानी में छबी मैं देखूँ खड़ी खड़ी
बालों में सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी
सजा के कलियाँ बड़ी बड़ी
पानी में छबी मैं देखूँ खड़ी खड़ी
फिर बनूँ आप ही बेकरार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार – 2

वादी में निशान मेरे ही पाँव के
फूलों पे हैं रंग मेरी ही छाँव के
हैं रंग मेरी ही छाँव के
वादी में निशान मेरे ही पाँव के
फिर भी क्यूँ आये ना ऐतबार

कोई नहीं है फिर भी है मुझको
क्या जाने किसका इंतज़ार हो ओ ओ
ये भी ना जानूँ लहरा के आँचल
किसको बुलाये बार बार
क्या जाने किसका इंतज़ार – 2