आओ ट्विस्ट करें – Aao Twist Karein (Bhoot Bangla)


फ़िल्म/एल्बम: भूत बंगला (1965)
संगीतकार: आर.डी.बर्मन
गीतकार: हसरत जयपुरी
गायक/गायिका: मन्ना डे


सुनो और गौर से सुनो
अरे पहले तालियां तो बजाओ
आज रात का मैं आखिरी गाना गा रहा हूं
और गाने में ये कहना चाहता हूं
के दुनिया में कुछ करना हो तो मानो मेरी बात
आओ ट्विस्ट करें, गा उठा मौसम
ज़िन्दगी है यही
नाच उठी है ज़िन्दगानी, ओ मेरी जां
छम छमा छम, छम छमा छम
आओ ट्विस्ट करें…

परवानों, दिलवालों आओ
मस्ती के सितारों पे गा गाओ
खुशियों को महफ़िल में ला, लाओ
इतना सा कहना है आ, आओ
हे ट्विस्ट करें…

अरे क्या सोच रहे हो तुम लोग
तुम लोग रोना चाहते हो? नहीं
तुम लोग उदास रहना चाहते हो? नहीं
तुम लोग हंसना चाहते हो? हां

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प्यार करता जा – Pyar Karta Ja (Bhoot Bangla)


फ़िल्म/एल्बम: भूत बंगला (1965)
संगीतकार: आर.डी.बर्मन
गीतकार: हसरत जयपुरी
गायक/गायिका: मन्ना डे


प्यार करता जा, प्यार करता जा
दिल कहता है, दिल कहता है
कांटों में भी गुल खिला
प्यार करता जा…

हम नौजवां, मस्ती भरे
धरती पे हम आसमान हैं
सब झूमने वाले
कौन है क्या, किसे है खबर
पहले तो हम इन्सान हैं
हम हिम्मत वाले
प्यार करता जा…

छोटा बड़ा, कोई भी हो
अपने लिए, सभी एक हैं
ये प्यार धरम है
सबसे गले, मिल के चलो
जग बेवफा, सभी नेक हैं
ये प्यार का रंग है
प्यार करता जा…

दिल की अगन, बढ़ती रहे
जलते रहें, मीठी आग में
हम प्यार के राही
गुंचा-ए-दिल, खिल ही गया
है वो असर, मेरे राग में
दिल, दिल से मिले हैं
प्यार करता जा…

वक़्त से दिन और रात, वक़्त से कल और आज – Waqt Se Din Aur Raat (Waqt)


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: राज कुमार, शशि कपूर, शर्मिला टैगोर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, साधना


वक़्त से दिन और रात
वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै ग़ुलाम
वक़्त का हर शै पे राज

वक़्त की पाबन्द हैं
आती जाती रौनकें
वक़्त है फूलों की सेज
वक़्त है काँटों का ताज
वक़्त से दिन और रात…

आदमी को चाहिये
वक़्त से डर कर रहे
कौन जाने किस घड़ी
वक़्त का बदले मिज़ाज
वक़्त से दिन और रात…

मैंने एक ख़्वाब सा देखा है – Maine Ek Khwab Sa Dekha Hai (Waqt)


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले, महेंद्र कपूर
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: राज कुमार, शर्मिला टैगोर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, साधना, शशि कपूर


मैंने एक ख़्वाब सा देखा है
कहो
सुन के शरमा तो नहीं जाओगी?
नहीं, तुम से नहीं

मैंने देखा है कि फूलों से लदी शाखों में
तुम लचकती हुई यूँ मेरी क़रीब आई हो
जैसे मुद्दत से यूँ ही साथ रहा हो अपना
जैसे अब की नहीं सदियों की शनासाई हो

मैंने भी ख़्वाब सा देखा है
कहो, तुम भी कहो
खुद से इतरा तो नहीं जाओगे?
नहीं खुद से नहीं

मैंने देखा कि गाते हुए झरनों के क़रीब
अपनी बेताबी-ए-जज़बात कही है तुम ने
काँपते होंठों से रुकती हुई आवाज़ के साथ
जो मेरे दिल में थी वो बात कही है तुम ने

आँच देने लगा क़दमों के तले बर्फ़ का फ़र्श
आज जाना कि मुहब्बत में है गर्मी कितनी
संगमरमर की तरह सख़्त बदन में तेरे
आ गयी है मेरे छू लेने से नर्मी कितनी

हम चले जाते हों और दूर तलक कोई नहीं
सिर्फ़ पत्तों के चटकने की सदा आती है
दिल में कुछ ऐसे ख़यालात ने करवट ली है
मुझ को तुम से नहीं अपने से हया आती है

मैंने देखा है कि कोहरे से भरी वादी में
मैं ये कहता हूँ चलो आज कहीं खो जायें
मैं ये कहती हूँ कि खोने की ज़रूरत क्या है
ओढ़ कर धुंध की चादर को यहीं सो जायें

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी – Kaun Aaya Ki Nagahon Mein Chamak (Waqt)


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: शशिकला, शशि कपूर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, शर्मिला टैगोर, साधना, राज कुमार


कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी – 2
कौन आया

किसके आने की ख़बर ले के हवाएँ आईं – 2
जिस्म के फूल चटकने की सदाएँ आईं – 2
ओ ओ ओ आ
(रूह खिलने लगी) – 2 साँसों में महक जाग उठी
दिल के सोए हुए…

किसने ये मेरी तरफ़ देख के बाँहें खोलीं – 2
शोख़ जज़्बात ने सीने में निगाहें खोलीं – 2
ओ ओ ओ आ
(होंठ तपने लगे) – 2 ज़ुल्फ़ों में लचक जाग उठी
दिल के सोए हुए…

किसके हाथों ने मेरे हाथों से कुछ माँगा है – 2
किसके ख़्वाबों ने मेरी रातों से कुछ माँगा है – 2
ओ ओ ओ आ
(साज़ बजने लगे) – 2 आँचल में खनक जाग उठी
दिल के सोए हुए…