मैंने होठों से लगाई तो हंगामा हो गया – Hungama Ho Gaya (Anhonee)


फ़िल्म/एल्बम: अनहोनी (1973)
संगीतकार: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
गीतकार: वर्मा मलिक
गायक/गायिका: आशा भोंसले


हां हां जाम भी है, हां हां शाम भी है
अरे चोरी नहीं, सारा आम भी है
सबने पी है, मुझपे इल्ज़ाम क्यूं है
खाम-खां मेरा नाम बदनाम क्यूं है
देखो न लोगों ने, बोतलों की बोतलें
ख़त्म कर दी तो कुछ न हुआ
मगर मगर
मैंने होठों से लगाई तो, हंगामा हो गया
हंगामा हो गया, हंगामा, हंगामा हो गया
मुझे यार ने पिलाई तो, हंगामा हो गया…

दिन को कसमें खाते हैं, तौबा-तौबा करते हैं
शाम होती है तो फिर प्याले भरते हैं
रात को सब पीते हैं, सुबह को सब डरते हैं
क्या कशिश हैं, सब इसपे मरते हैं
कैसे ये लोग हैं, पता नहीं क्या करते हैं
कौन सी बात है इसमें, सब इसको अपनाते हैं
देखो ना, सबको तमाशा दिखाते हैं
गिरते हैं, लड़खड़ाते हैं, शोर मचाते हैं
उनको तो आप कुछ नहीं कहते
मगर मगर
मुझे हिचकी जो आई तो, हंगामा हो गया
हंगामा हो गया…

क्यूं घबरा गई, शर्मा गई, या गुस्सा खा गई
हाथ लगाने से इतना तिलमिला गए
अरे हुस्न वाले तो आग लगा देते हैं
फ़ना कर देते हैं, होश उड़ा देते हैं
दिल, जिगर, चैन, आराम, रातें
सुबह, दोपहर और शाम छीन ले जाते हैं
और आंख चुरा लेते हैं
सामने होते हैं और आप बोल नहीं पाते हैं
देखो ना दर्द, ठेस और ज़ख्म दे जाते हैं
पर आप कुछ नहीं कहते
मगर मगर
मैंने आंख जो मिलाई तो, हंगामा हो गया
हंगामा हो गया…

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