ए री जाने न दूंगी – Ae Ri Jaane Na Dungi (Chitralekha)


फ़िल्म/एल्बम: चित्रलेखा (1964)
संगीतकार: रोशन
गीतकार: साहिर लुधियानवी
गायक/गायिका: लता मंगेशकर


आली ए री, रोको ना कोई
करने दो मुझको मनमानी
आज मेरे घर आए प्रीतम
जिनके लिए सब नगरी छानी
आज कोई बंधन ना भाए
आज है खुल खेलन की ठानी

ए री जाने न दूंगी, ए री जाने न दूंगी
मैं तो अपने रसिक को नैनों में रख लूंगी
पलकें मूंद-मूंद
ए री जाने न दूंगी…

अलकों में कुंडल डालो और देह सुगंध रचाओ
जो देखे मोहित हो जाये, ऐसा रूप सजाओ
आज सखी
ध प म रे प, म प ध नि ध, प ध प प सां
रे सा ध, प रे
आज सखी पी डालूंगी
मैं दर्शन-जल की बूंद-बूंद
ए री जाने न दूंगी…

मधुर मिलन की दुर्लभ बेला, यूं ही बीत न जाये
ऐसी रैन जो व्यर्थ गंवाए, जीवन भर पछताये
सेज सजाओ
ध प म रे प, म प ध नि ध, प ध प प सां
रे सा ध, प रे
सेज सजाओ मेरे साजन की
ले आओ कलियां गूंद-गूंद
ए री जाने न दूंगी…

Advertisements

Leave a comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s