शागिर्द – Full Movie and Songs of Shagird (1967)


फ़िल्म: शागिर्द / Shagird (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आई. एस. जौहर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: जॉय मुखर्जी, सायरा बानो, आई. एस. जौहर

बड़े मियाँ दीवाने ऐसे ना बनो
हसीना क्या चाहे हमसे सुनो
बड़े मियाँ दीवाने…

सबसे पहले सुनो मियाँ करके वर्जिश बनो जवाँ
चेहरा पॉलिश किया करो थोड़ी मालिश किया करो
स्टाइल से उठे क़दम सीना ज़्यादा तो पेट कम
ऐ किबला उजले बालों को रंग डालो बन जाओ गुलफ़ाम
बड़े मियाँ दीवाने…

हसीना क्या चाहे
यही तो मालूम नहीं
हमसे सुनो

सीखो करतब नए-नए फैशन के ढंग नए-नए
ढीला-ढाला लिबास क्यों रेशम पहनो कपास क्यों
फ़न ये जादूगरी का है अरमाँ तुझको परी का है
तो किबला मारो मंतर टेढ़ी बन कर निकलो वक़्त-ए-शाम
बड़े मियाँ दीवाने…

तन्हाई में अगर कहीं आ जाए वो नज़र कहीं
कहिए हाथों में हाथ डाल ए गुल-चेहरा परी-जमाल
मुद्दत से दिल उदास है तेरे होंठों की प्यास है
ऐ दिलबर मेरे लब पर कब छलकेगा तेरे लब का जाम
बड़े मियाँ दीवाने…


फ़िल्म: शागिर्द / Shagird (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: जॉय मुखर्जी, सायरा बानो, आई. एस. जौहर

दिल-विल प्यार-व्यार मैं क्या जानूँ रे
जानूँ तो जानूँ बस इतना जानूँ कि तुझे अपना जानूँ रे

तू है बुरा तो होगा पर बातों में तेरी रस है
जैसा भी है मुझे क्या अपना लगे तो बस है
घर हो तेरा जिस नगरी में चाहे जो हो तेरा नाम रे
घर-वर नाम-वाम मैं क्या जानूँ रे…

आदत नहीं कि सोचूँ कितनों में हसीन है तू
लट में हैं कितने घूँघर नैनों में कितना जादू
बस तू मोहे अच्छा लागे इतने ही से मुझ को काम रे
लट-वट नैं-वैन मैं क्या जानूँ रे…

कुछ जानती तो कहती रुत बन कर के मैं खिली हूँ
डालों सी झूमती मैं साजन से आ मिली हूँ
तू ही जाने रुत है कैसी और है कितनी रँगीं शाम रे
रुत-वुत शाम-वाम मैं क्या जानूँ रे…

पाया है जब से तुझको दिल पर नहीं है क़ाबू
एक प्यास है लबों पर बिखरे पड़े हैं गेसू
कुछ तो कह दे दर्द है कैसा, कैसी प्यास है ये हर गाम रे
लब-वब, प्यास-व्यास मैं क्या जानूँ रे…


फ़िल्म: शागिर्द / Shagird (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आई. एस. जौहर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: सायरा बानो, आई. एस. जौहर, जॉय मुखर्जी

दुनिया पागल है या फिर मैं दीवाना
मुझको चाहती है ज़ुल्फ़ों में उलझाना
दुनिया पागल है…

ये बाहें जिनको तुम गले का हार समझे हो
ग़ेसु कि जिनको तुम महकता प्यार समझे हो
हार है फन्दा, प्यार है खंजर
तुम हो निशाना
जियो मेरे शागिर्द
Thank You
दुनिया पागल है…

आज़ादी है तो तुम हो शहज़ादे मेरे प्यारों
शादी हुई तो समझो भिखारी बन गये यारों
जो है अकेला, वो अलबेला
उसका ज़माना
शाबाश मेरे शागिर्द
Thank You
दुनिया पागल है…

चूड़ी जो छनके तो कहो तलवार छनकी है
पायल बजे भागो कि ये खतरे की घंटी है
पड़ने न पाये, हुस्न का साया
देखो बचाना
अरे वाह-वाह मेरे शागिर्द
Thank You
दुनिया पागल है…


फ़िल्म: शागिर्द / Shagird (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: जॉय मुखर्जी, सायरा बानो, आई. एस. जौहर

वो हैं ज़रा खफ़ा खफ़ा
तो नैन यूं मिलाए हैं कि हो हो
ना बोल दूं तो क्या करूँ
वो हँस के यूँ बुलाए हैं कि हो हो

हँस रही है चाँदनी
मचल के रो ना दूं कहीं
ऐसे कोई रूठता नहीं
ये तेरा खयाल है
करीब आ मेरे हंसीं
मुझको तुझसे कुछ गिला नहीं
बात यूँ बनाए हैं कि ओ हो…
वो हैं…

ऐसे मत सताइये
ज़रा तरस तो खाइये
दिल की धड़कन मत जगाइये
कुछ नहीं कहूंगा मैं
ना अँखियां झुकाइये
सर को कन्धे से उठाइये
ऐसे नींद आए है कि हम…
वो हैं…

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