दुल्हन एक रात की – Full Movie and Songs of Dulhan Ek Raat Ki (1967)


फ़िल्म: दुल्हन एक रात की / Dulhan Ek Raat Ki (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजा मेहंदी अली खान
अदाकार: जॉनी वाकर, धर्मेंद्र, नूतन, रहमान

इक हसीन शाम को दिल मेरा खो गया
पहले अपना हुआ करता था
अब किसीका हो गया

मुद्दतों से आरज़ू थी
मेरे दिल मे कोई आये
सूनी सूनी ज़िन्दगी में
एक शम्मा झिलमिलाये
वो जो आये तो रोशन ज़माना हो गया
इक हसीन…

मेरे दिल के कारवां को
ले चला है आज कोई
शबनमी सी जिसकी आँखें
थोड़ी जागी थोड़ी सोयी
उनको देखा तो मौसम सुहाना हो गया
इक हसीन…


फ़िल्म: दुल्हन एक रात की / Dulhan Ek Raat Ki (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजा मेहंदी अली खान
अदाकार: जॉनी वाकर, धर्मेंद्र, नूतन, रहमान

कई दिन से जी है बेकल
ऐ दिल की लगन अब ले चल
मुझे भी वहाँ मेरे पिया है जहाँ

बिछड़ी नज़र नज़र से तो बेचैन हो गई
ऐसे लगा के जैसे कोई चीज़ खो गई
अब उनके बिना हूँ ऐसे
जैसे नैना बिन काजल
कई दिन से…

आती हैं उनके प्यार की मौजें मचल-मचल
कब तक कहूँगी दिल से मैं अपने सम्भल-सम्भल
जा देस पिया के उड़ जा तू मन के पंछी घायल
कई दिन से…

आई जो उनकी याद तो साँसें महक गईं
आँखों में बिजलियाँ सी हज़ारों चमक गईं
जिस ओर उठीं ये नज़रें लहराए प्यार के बादल
कई दिन से…


फ़िल्म: दुल्हन एक रात की / Dulhan Ek Raat Ki (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: अल्लामा इकबाल
अदाकार: धर्मेंद्र, नूतन

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र, नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में
के हज़ारों सजदे तड़प रहे हैं मेरी जबीन-ए-नियाज़ में

न बचा-बचा के तू रख इसे, तेरा आईना है वो आईना
के शिकस्ता हो तो अज़ीज़तर है निगाह-ए-आईनासाज़ में

न वो इश्क़ में रहीं गर्मियाँ, न वो हुस्न में रहीं शोख़ियाँ
न वो ग़ज़नवी में तड़प रही
न वो खम है ज़ुल्फ़-ए-आयाज़ में

मैं जो सर-ब-सजदा कभी हुआ, तो ज़मीं से आने लगी सदा
तेरा दिल तो है सनम आशना, तुझे क्या मिलेगा नमाज़ में

कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र, नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में
के हज़ारों सजदे तड़प रहे हैं मेरी जबीन-ए-नियाज़ में


फ़िल्म: दुल्हन एक रात की / Dulhan Ek Raat Ki (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजा मेहंदी अली खान
अदाकार: जॉनी वाकर, धर्मेंद्र, नूतन, रहमान

मैने रंग ली आज चुनरिया सजना तोरे रंग में – 2
मैने रंग ली…

जिया मोरा चाहे मैं भी खेलूँ ओ सजनवा होली ऐसे
राधा ने कन्हैया से प्रेम की होली खेली जैसे
प्रेम के मैं रंग फेंकूं
बिन तुम्हारे कुछ न देखूँ
मैने रंग ली…

कितने जतन से ये रूप सजाया मैने सजना
सोए हुए सपने को फिर जगाया मैने सजना
मैं तो डूबी प्रेम रस में
अब नहीं मैं अपने बस में
मैने रंग ली…

जळी से आ मेरी बावरी अँखियाँ तेरी प्यासी
चरणों में तेरे पिया स्वर्ग बसा ले तेरे दासी
तुम बता दो मेरे क्या हो
मैं तो जानूँ देवता हो
मैने रंग ली…


फ़िल्म: दुल्हन एक रात की / Dulhan Ek Raat Ki (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजा मेहंदी अली खान
अदाकार: रहमान, धर्मेंद्र, नूतन

सपनों में अगर मेरे
तुम आओ तो सो जाऊँ – 2
सपनों में अगर मेरे
बाहों कि अगर माला
पेहनाओ तो सो जाऊँ – 2
सपनों में अगर मेरे

सपनों में कभी साजन
बैठो मेरे पास आके
जब सीने पे सर रख दूं
मैं प्यार में शरमाते
एक गीत मुहब्बत का
तुम गाओ तो सो जाऊँ – 2
सपनों में अगर मेरे

बीती हुई वो यादें
हँसती हुई आती हैं
लेहरों की तरह दिल में
आती कभी जाती हैं
यादों की तरह तुम भी
आ जाओ तो सो जाऊँ – 2
सपनों में अगर मेरे
तुम आओ तो सो जाऊँ – 2
सपनों में अगर मेरे

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