फ़र्ज़ – Full Movie and Songs of Farz (1967)


फ़िल्म: फ़र्ज़ / Farz (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: जीतेंद्र, बबीता

हैप्पी बर्थडे टु यू – 2
हैप्पी बर्थडे टु यू, सुनीता, हैप्पी बर्थडे टु यू

बार बार दिन यह आये, बार बार दिल यह गाये
तू जिये हज़ारों साल, यह मेरी आरज़ू है
हैप्पी बर्थडे टु यू – 2
हैप्पी बर्थडे टु यू, सुनीता, हैप्पी बर्थडे टु यू

बेक़रार होके दामन, थाम लूँ मैं किसका – 2
क्या मिसाल दूँ मैं तेरी, नाम लूँ मैं किसका
नहीं, नहीं, ऐसा हसीं, कोई नहीं है
जिस पे यह नज़र रुक जाये, बेमिसाल जो कहलाये
तू जिये हज़ारों साल, यह मेरी आरज़ू है
हैप्पी बर्थडे टु यू – 2
हैप्पी बर्थडे टु यू, सुनीता, हैप्पी बर्थडे टु यू

औरों की तरह कुछ मैं भी, तोह्फ़ा ले आता
मैं तेरी हसीं महफ़िल में, फूल ले के आता
जिन्हें कहा उसे चाहा, फूलों की ज़रूरत
जो पहर खुद कहलाये, हर कली का दिल धड़काये
तू जिये हज़ारों साल, यह मेरी आर्अज़ू है
हैप्पी बर्थडे टु यू – 2
हैप्पी बर्थडे टु यू, सुनीता, हैप्पी बर्थडे टु यू


फ़िल्म: फ़र्ज़ / Farz (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: जीतेंद्र, बबीता

(देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बाग़ों में फूलों के मेले हैं
फिर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम हम तुम) – 2

ऐसे रूठो ना हमसे ख़ुदा के लिये – 2
के हम हैं तैयार हर इक सज़ा के लिये
जो चाहे कह लो हमसे सुन लो हमसे

देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बाग़ों में फूलों के मेले हैं
फिर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम हम तुम

हुस्न तो इश्क़ की दास्ताँ बन गया – 2
जी इश्क़ ऐसे में क्यूँ बेज़ुबाँ बन गया
हाँ छोड़ो ना ही कह दो कुछ तो बोलो

हाँ देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बाग़ों में फूलों के मेले हैं
फिर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम हम तुम

महबूब हमारे तुम्हें क्या पता – 2
के हर कली बन गई आज महबूबा
ऐसे में तुम भी हमको दिलबर कह दो

हाँ (देखो देखो जी
सोचो जी कुछ समझो जी
बाग़ों में फूलों के मेले हैं
फिर क्यूँ अकेले हैं
हम तुम हम तुम हम तुम हम तुम) – 2


फ़िल्म: फ़र्ज़ / Farz (1967)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मुकेश
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: जीतेंद्र, बबीता

हम तो तेरे आशिक़ हैं सदियों पुराने
चाहे तू माने चाहे न माने

हम भी ज़माने से हैं तेरे दीवाने
चाहे तू माने चाहे न माने

आई हैं यूं प्यार से जवानियां
अरमां दिल में है दिल मुश्किल में है जान-ए-तमन्ना
तेरे इसी प्यार की कहानियां
हर महफ़िल में हैं सबके दिल में हैं जान-ए-तमन्ना
छेड़ते हैं सब मुझको अपने बेगाने
चाहे तू माने…

सोचो मोहब्बत में कभी हाथ से
दामन छूटे तो दो दिल रूठे तो तो फिर क्या हो
ऐसा न हो काश कभी प्यार में
वादे टूटे तो दो दिल रूठे तो तो फिर क्या हो
हम तो चले आएं सनम तुझको मनाने
चाहे तू माने…

मस्त निगाहों से इस दिल को
मस्त बनाए जा और पिलाए जा प्यार के सागर
दिल पे बड़े शौक से सितमगर
ठेस लगाए जा तीर चलाए जा याद रहे पर
तीर कभी बन जाते हैं खुद निशाने
चाहे तू माने…


फ़िल्म: फ़र्ज़ / Farz (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: जीतेंद्र, बबीता

ऊ ऊ
मस्त बहारों का मैं आशिक़ मैं जो चाहें यार करूँ
चाहें गुलों के साए से खेलूँ चाहें कली से प्यार करूँ
सारा जहाँ है मेरे लिए मेरे लिए
ऊ ऊ मस्त बहारों का…

मैं हूँ वो दीवाना जिसके सब दीवाने हाँ
किसको है ज़रूरत तेरी ऐ ज़माने हाँ
मेरा अपना रास्ता दुनिया से क्या वास्ता
मेरे दिल में तमन्नाओं की
दुनिया जवां है मेरे लिए
ऊ ऊ मस्त बहारों का…

मेरी आँखों से ज़रा आँखें तो मिला दे हाँ
मेरी राहें रोक ले नज़रें तो बिछा दे हाँ
तेरे सर की है कसम मैं जो चला गया सनम
तो ये रुत भी चली जाएगी
ये तो यहाँ है मेरे लिए
ऊ ऊ मस्त बहारों का…

सबको ये बता दो कह दो हर नज़र से हाँ
कोई भी मेरे सिवा गुज़रे ना इधर से हाँ
बतला दो जहां को समझा दो ख़िज़ां को
आए जाए यहाँ ना कोई
ये गुलिस्तां है मेरे लिए
ऊ ऊ मस्त बहारों का…


फ़िल्म: फ़र्ज़ / Farz (1967)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: जीतेंद्र, बबीता

तुमसे ओ हसीना कभी मोहब्बत न मैने करनी थी
मगर मेरे दिल ने मुझे धोखा दे दिया

तुमसे ओ दीवाने कभी मोहब्बत न मैने करनी थी
मगर मेरे दिल ने मुझे धोखा दे दिया

आग सुलग गई नस नस में
नींद रही न रहा चैन बस में
तोड़ी जाए ना अब मुझसे
प्यार की ये रस्में कसमें
आ गई बुलबुल कफ़स में
तौबा मेरी तौबा ये हालत न मैने करनी थी
मगर मेरे दिल ने मुझे…

लोग ये मुझको हैं समझाते
बीत रही थी हँसते गाते
मैने तुम्हें किसलिए छेड़ा
राहों में आते जाते
मुझे सब हैं सताते
तौबा मेरी तौबा ये शरारत न मैने करनी थी
मगर मेरे दिल ने मुझे…

शाम सवेरे दिल घबराए
राज़-ए-दिल ना खुल जाए
रात हमारे सपनों में छुप के
रोज़ कोई आए जाए
काहे नेहा लगाए
तौबा मेरी तौबा ये क़यामत न मैने करनी थी
मगर मेरे दिल ने मुझे…

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