गोरे-गोरे चाँद से मुख पर काली-काली आँखें हैं – Gore Gore Chaand Se Mukhde Pe


फ़िल्म: अनीता / Anita (1967)
गायक/गायिका: मुकेश
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आरज़ू लखनवी
अदाकार: मनोज कुमार, साधना


गोरे-गोरे चाँद से मुख पर काली-काली आँखें हैं
देख के जिनको नींद उड़ जाए वो मतवाली आँखें हैं
गोरे-गोरे चाँद से…

मुँह से पल्ला क्या सरकाना इस बादल में बिजली है
(दूर ही रहना) – 2 इनसे क़यामत ढाने वाली आँखें हैं
गोरे-गोरे चाँद से…

बे जिनके अंधेर है सब कुछ ऐसी बात है इनमें क्या
(आँखें-आँखें) – 3 सब हैं बराबर कौन निराली आँखें हैं
गोरे-गोरे चाँद से…

बे देखे आराम नहीं है देखो तो दिल का चैन गया
(देखने वाले) – 3 यूँ कहते हैं क्या भोली-भाली आँखें हैं
गोरे-गोरे चाँद से…

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