दो बदन – Full Movie and All Songs of Do Badan (1966)



फ़िल्म: दो बदन / Do Badan (1966)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: मनोज कुमार, आशा पारेख

भरी दुनिया में आख़िर दिल को समझाने कहाँ जाएं
मुहब्बत हो गई जिनको वो दीवाने कहाँ जाएं

लगे हैं शम्मा पर पहरे ज़माने की निगाहों के
जिन्हें जलने की हसरत है वो परवाने कहाँ जाएं

सुनाना भी जिन्हें मुश्किल छुपाना भी जिन्हें मुश्किल
ज़रा तू ही बता ऐ दिल वो अफ़साने कहाँ जाएं


फ़िल्म: दो बदन / Do Badan (1966)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: मनोज कुमार, आशा पारेख

(जब चली ठण्डी हवा, जब उठी काली घटा
मुझको ऐ जान-ए-वफ़ा तुम याद आए) – 2

ज़िंदगी की दास्तां, चाहे कितनी हो हंसीं
बिन तुम्हारे कुछ नहीं, बिन तुम्हारे कुछ नहीं
क्या मज़ा आता सनम, आज भूलेसे कहीं
तुम भी आजाते यहीं, तुम भी आजाते यहीं
ये बहारें ये फ़िज़ा, देखकर ओ दिलरुबा
जाने क्या दिल को हुआ, तुम याद आये
जब चली…

ये नज़ारे ये समा, और फिर इतने जवाँ
हाये रे ये मस्तियाँ, हाये रे ये मस्तियाँ
ऐसा लगता हैं मुझे, जैसे तुम नज़दीक हो
इस चमन से जान-ए-जां, इस चमन से जान-ए-जां
सुन के उसकी सदा, दिल धड़कता हैं मेरा
आज पहलेसे सिवा तुम याद आए
जब चली…


फ़िल्म: दो बदन / Do Badan (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: रवि
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: मनोज कुमार, आशा पारेख

लो आ गयी उनकी याद, वो नहीं आये

दिल में गये हैं, ग़म के सिंगार कर के
आँखें भी थक गयी हैं, अब इंतज़ार कर के
इक आस रह गयी है, वो भी न टूट जाये
लो आ गयी उनकी याद…

रूठी हैं आज हम से, तनहाइयाँ हमारी
वो भी न पाये शायद, परछाइयाँ हमारी
बढ़ते ही जा रही हैं, मायूसियों के साये
लो आ गयी उनकी याद…

लौ थरथरा रही है, अब शम्म-ए-मुहब्बत की
उजड़ी हुई मुहब्बत, महमाँ है दो घड़ी की
मर कर ही अब मिलेंगे, जी कर तो मिल न पाये
लो आ गयी उनकी याद…


फ़िल्म: दो बदन / Do Badan (1966)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: मनोज कुमार, आशा पारेख

मत जईयो नौकरिया छोड़ के तोरे पैयाँ पड़ूँ बलमा – 2
तोरे पैयाँ पड़ूँ मैं बिनती करूँ – 2
मत जईयो नौकरिया…

देख पिया परदेस में ऐसी रूप की छया नाहीं मिलेगी – 2
पैसा रुपईया मिल जाएगा प्रेम की माया नाहीं मिलेगी
प्रीत नहीं तो कुछ भी नहीं है साँची कहूँ बलमा
मत जईयो नौकरिया…

प्रीत करो और रीत न जानो तुम तो हो सैयाँ एक अनाड़ी – 2
भूल भई ये मोसे प्रीतम जो मैं जियरवा तोसे हारी
जाओ मैं तुमसे ना बोलूँगी साँची कहूँ बलमा
मत जईयो नौकरिया…

दीपक लईके ढूँढ लो जग में हमसी मोहनिया ना पाओगे – 2
जिसके गोरे गाल पे तिल हो ऐसी सजनिया ना पाओगे
हमसे बिछड़ के पछताओगे साँची कहूँ बलमा
मत जईयो नौकरिया…


फ़िल्म: दो बदन / Do Badan (1966)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: मनोज कुमार, आशा पारेख

नसीब में जिसके जो लिखा था
वो तेरी महफ़िल में काम आया
किसी के हिस्से में प्यास आई
किसी के हिस्से में जाम आया

मैं इक फ़साना हूँ बेकसी का
ये हाल है मेरी ज़िंदगी का
न हुस्न ही मुझको रास आया
न इश्क़ ही मेरे काम आया
नसीब में…

बदल गईं तेरी मंज़िलें भी
बिछड़ गया मैं भी कारवां से
तेरी मुहब्बत के रास्ते में
न जाने ये क्या मकाम आया
नसीब में…

तुझे भुलाने कि कोशिशें भी
तमाम नाकाम हो गई हैं
किसी ने ज़िक्र-ए-वफ़ा किया जब
ज़ुबाँ पे तेरा ही नाम आया
नसीब में…


फ़िल्म: दो बदन / Do Badan (1966)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: शकील बदांयुनी
अदाकार: मनोज कुमार

रहा गर्दिशों में हरदम मेरे इश्क़ का सितारा
कभी डगमगायी कश्ती, कभी लुट गया किनारा

कोई दिल का खेल देखे, कि मुहब्बतों की बाज़ी
वो क़दम क़दम पे जीते, मैं क़दम क़दम पे हारा

ये हमारी बदनसीबी जो नहीं तो और क्या है
कि उसी के हो गये हम, जो न हो सका हमारा

पड़े जब ग़मों के पाले, रहे मिटके मिटनेवाले
जिसे मौत भी न पूछा, उसे ज़िंदगी ने मारा

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