अनुपमा – Full Movie and Songs of Anupama (1966)



फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर

भीगी भीगी फ़ज़ा सन सन सन के जिया
ज़ुल्फ़ें उड़ाती है, ख़ुशबू चुराती है
पागल चंचल मस्त हवा
भीगी भीगी फ़ज़ा सन सन सन के जिया…

कोयल बन में बोले
नस नस में रस घोले
कोई नटखट जैसे घूँघट चोरी चोरी खोले
कोई आया नहीं, भाया नहीं
किसका साया साथ चला
भीगी भीगी फ़ज़ा…

पल पल झोंका आये
आँचल सरका जाये
तन मन मेरा जीवन मेरा धीरे धीरे गाये
देखो देखो हँसी, दिल की कली
दिल में ऐसा दर्द उठा
भीगी भीगी फ़ज़ा…

हँसते हैं दीवाने
बनते हैं अफ़साने
दिल की बातें दिल की घातें कैसे कोई जाने
मुझे रोको नहीं, टोको नहीं
मैं ने रस्ता ढूँढ लिया
भीगी भीगी फ़ज़ा…


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: शशिकला, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, तरुण बोस

धीरे धीरे मचल ऐ दिल-ए-बेक़रार
कोई आता है
यूँ तड़पके न तड़पा मुझे बालमा
कोई आता है
धीरे धीरे…

उसके दामन की ख़ुशबू हवाओं में है
उसके कदमों की आहट फ़ज़ाओं में है
मुझको करने दे, करने दे सोलह श्रिंगार
कोई आता है
धीरे धीरे मचल…

रूठकर पहले जी भर सताऊँगी मैं
जब मनाएंगे वो, मान जाऊँगी हैं
मुझको करने दे, करने दे सोलह श्रिन्गार
कोई आता है
धीरे धीरे मचल…

मुझको छुने लगीं उसकी पर्छाइयाँ
दिलके नज़दीक बजती हैं शहनाइयाँ
मेरे सपनों के आँगन में गाता है प्यार
कोई आता है

धीरे धीरे मचल…


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर

कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं – 2
ऐसी भी बातें होती हैं – 2
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं

लेता है दिल अंगड़ाइयां, इस दिल को समझाये कोई
अरमान ना आँखें खोल दें, रुसवा ना हो जाये कोई
पलकों की ठंडी सेज पर, सपनों की परियां सोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं – 2
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं

दिल की तस्सली के लिये, झूठी चमक झूठ निखार
जीवन तो सूना ही रहा, सब समझे आयी बहार
कलियों से कोई पूछता, हंसती हैं या रोती हैं
ऐसी भी बातें होती हैं – 2
कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: शशिकला, धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, तरुण बोस

क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल
कहीं मचल न जाऊँ, कहीं फिसल न जाऊँ
मचल न जाऊँ, फिसल न जाऊँ
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल

एक मैं हूँ और बहारें बेशुमार
हो न जाये आज आँचल तार-तार
धक से हो जाता है मेरा जी जो इतराता है दिल
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल

खिल गई हूँ अपनी सूरत देखकर
लग न जाये मुझको मेरी ही नज़र
ये वो रुत है जिसमें अपने पर ख़ुद आ जाता है दिल
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल

ज़िन्दगी बेताब है मेरे लिये
प्यार रंगीं ख़्वाब है मेरे लिये
सब बहक जाते हैं जाने क्यूँ, जो बहकाता है दिल
क्यूँ मुझे इतनी ख़ुशी दे दी, कि घबराता है दिल


फ़िल्म: अनुपमा / Anupama (1966)
गायक/गायिका: हेमंत कुमार
संगीतकार: हेमंत कुमार
गीतकार: कैफ़ी आज़मी
अदाकार: धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, तरुण बोस

या दिल की सुनो दुनियावालो
या मुझको अभी चुप रहने दो
मैं ग़म को खुशी कैसे कह दूँ
जो कहते हैं उनको कहने दो

ये फूल चमन मे कैसा खिला
माली की नज़र मे प्यार नहीं
हँसते हुए क्या क्या देख लिया
अब बहते हैं आँसू बहने दो
या दिल की सुनो…

एक ख्वाब खुशी का देखा नहीं
देखा जो कभी तो भूल गये
माना हम तुम्हें कुछ दे ना सके
जो तुमने दिया वो सहने दो
या दिल की सुनो…

क्या दर्द किसी का लेगा कोई
इतना तो किसी में दर्द नहीं
बहते हुए आँसू और बहें
अब ऐसी तसल्ली रहने दो
या दिल की सुनो…

Advertisements

Leave a comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s