आए दिन बहार के – Full Movie and Songs of Aaye Din Bahar Ke (1966)



फ़िल्म: आए दिन बहार के / Aaye Din Bahar Ke (1966)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: धर्मेंद्र, आशा पारेख

ये सावन की रातें
देख ले मेरी ये बेचैनी
और लिख दे दो बातें…

खत लिख दे सांवरिया के नाम बाबू
कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
(वो मान जाएंगे, पहचान जाएंगे
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू) – 2
खत लिख दे…

सारे वादे निकले झूठे
सामने हो तो कोई उनसे रूठे
ले गई बैरन शहर पिया को
राम करे कि ऐसी नौकरी छूटे
उन्हें जिसने बनाया गुलाम बाबू
कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
वो जान जाएंगे, पहचान जाएंगे
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू

जब आएंगे सजना मेरे
खन खन खनकेंगे कँगना मेरे
पास गली में घर है मेरा
उस दिन तू भी आना अँगना मेरे
कुछ तुझको मैं दूँगी ईनाम बाबू
कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
वो जान जाएंगे, पहचान जाएंगे
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू
खत लिख दे…

और बहुत कुछ है लिखवाना
कैसे बता दूँ तुझे तू बेगाना
शर्म से आँखें झुक जाएंगी
धड़क उठेगा मोरा दिल दीवाना
बस आगे नहीं तेरा काम बाबू
कोरे कागज़ पे लिख दे सलाम बाबू
वो मान जाएंगे, पहचान जाएंगे
कैसे होती है सुबह से शाम बाबू
खत लिख दे…


फ़िल्म: आए दिन बहार के / Aaye Din Bahar Ke (1966)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: धर्मेंद्र, बलराज साहनी, आशा पारेख

मेरे दुश्मन तू मेरी दोस्ती को तरसे
मुझे ग़म देने वाले तू खुशी को तरसे

तू फूल बने पतझड़ का, तुझ पे बहार न आए कभी
मेरी ही तरह तू तड़पे तुझको क़रार न आए कभी
जिये तू इस तरह की ज़िंदगी को तरसे

इतना तो असर कर जाएं मेरी वफ़ाएं ओ बेवफ़ा
जब तुझे याद आएं अपनी जफ़ाएं ओ बेवफ़ा
पशेमान होके रोए, तू हंसी को तरसे

तेरे गुलशन से ज़्यादा वीरान कोई वीराना न हो
इस दुनिया में तेरा जो अपना तो क्या, बेगाना न हो
किसी का प्यार क्या तू बेरुख़ी को तरसे


फ़िल्म: आए दिन बहार के / Aaye Din Bahar Ke (1966)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: धर्मेंद्र, बलराज साहनी, आशा पारेख

फूलों से मुखड़े वाली निकली है एक मतवाली
गुलशन की करने सैर
(ख़ुदाया ख़ैर) – 2

ले थाम ले मेरी बाँहें ऊँची-नीची हैं राहें
कहीं फिसल न जाए पैर
ख़ुदाया ख़ैर…

क्या हाल नज़ारों का होगा क्या रंग बहारों का होगा
ये हुस्न अगर मुस्काया तो क्या इश्क़ के मारों का होगा
मतवाले नैन हैं ऐसे तालाब में जैसे
दो फूल रहे हों तैर
ख़ुदाया ख़ैर…

ये होंठ नहीं अफ़साने हैं अफ़साने नहीं मैख़ाने हैं
न जाने किसकी क़िस्मत में ये प्यार भरे पैमाने हैं
इन होंठों का मस्ताना इन ज़ुल्फ़ों का दीवाना
बन जाए न कोई ग़ैर
ख़ुदाया ख़ैर…

हर एक अदा मस्तानी है ये वक़्त की रानी है
जो पहली बार सुनी मैने वो रंगीन कहानी है
मौजों की तरह चलती है शबनम सी ये जलती है
कलियों से है बैर
ख़ुदाया ख़ैर…


फ़िल्म: आए दिन बहार के / Aaye Din Bahar Ke (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: धर्मेंद्र, बलराज साहनी, आशा पारेख

सुनो सजना पपीहे ने
सुनो सजना पपीहे ने कहा सबसे पुकार के
सम्भल जाओ चमन वालों
सम्भल जाओ चमन वालों के आये दिन बहार के
सुनो सजना – 2

फूलों की डालियाँ भी यही गीत गा रही हैं
घड़ियाँ पिया मिलन की नज़दीक आ रही हैं
नज़दीक आ रही हैं
हवाओं ने जो छेड़े हैं
हवाओं ने जो छेड़े हैं फ़साने हैं वो प्यार के
सम्भल जाओ चमन वालों के आये दिन बहार के
सुनो सजना – 2

देखो न ऐसे देखो मरज़ी है क्या तुम्हारी
बेचैन कर न देना तुमको क़सम हमारी
तुमको क़सम हमारी
हमीं दुशमन न बन जायें
हमीं दुशमन न बन जायें कहीं अपने क़रार के
सम्भल जाओ चमन वालों के आये दिन बहार के
सुनो सजना – 2

बाग़ों में पड़ गये हैं सावन के मस्त झूले
ऐसा समाँ जो देखा राही भी राह भूले
राही भी राह भूले
के जी चाहा यहीं रख दें
के जी चाहा यहीं रख दें उमर सारी ग़ुज़ार के
सम्भल जाओ चमन वालों के आये दिन बहार के
सुनो सजना – 2


फ़िल्म: आए दिन बहार के / Aaye Din Bahar Ke (1966)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, महेंद्र कपूर
संगीतकार: लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकार: आनंद बख्शी
अदाकार: धर्मेंद्र, बलराज साहनी, आशा पारेख

ये कली जब तलक फूल बन के खिले,
इन्तज़ार, इन्तज़ार, इन्तज़ार करो, इन्तज़ार करो
इन्तज़ार वो भला क्या करे, तुम जिसे
बेकरार, बेकरार, बेकरार करो,
इन्तज़ार करो

प्यार में प्यार की भी इज़ाज़त नहीं – 2
बेरुखी है अजी ये मुहौब्बत नहीं
आ रहा है मज़ा, तुम शिकायत यही,
बार बार, बार बार, बार बार करो, इन्तज़ार करो

हुस्न पे तो असर होने वाला नहीं – 2
इश्क़ तुम को ना कर दे दीवाना कहीं
है ये दीवानगी भी क़ुबूल, तुम अगर
हमसे प्यार, हमसे प्यार, हमसे प्यार करो,
इन्तज़ार करो

रोज़ हमने बयान ये फ़साना किया – 2
रोज़ तुमने नया एक बहाना किया
ये बहाना मगर, आखिरी है सनम
ऐतबार, ऐतबार, ऐतबार करो, इन्तज़ार करो

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