वक्त – All Songs of Waqt (1965)


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: सुनील दत्त, बलराज साहनी, साधना, राज कुमार

आगे भी जाने न तू, पीछे भी जाने न तू
जो भी है, बस यही एक पल है

अन्जाने सायों का राहों में डेरा है
अन्देखी बाहों ने हम सबको घेरा है
ये पल उजाला है बाक़ी अंधेरा है
ये पल गँवाना न ये पल ही तेरा है
जीनेवाले सोच ले यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू
आगे भी…

इस पल की जलवों ने महफ़िल संवारी है
इस पल की गर्मी ने धड़कन उभारी है
इस पल के होने से दुनिया हमारी है
ये पल जो देखो तो सदियों पे वारि है
जीनेवाले सोच ले यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू
आगे भी…

इस पल के साए में अपना ठिकाना है
इस पल की आगे की हर शय फ़साना है
कल किसने देखा है कल किसने जाना है
इस पल से पाएगा जो तुझको पाना है
जीनेवाले सोच ले यही वक़्त है कर ले पूरी आरज़ू
आगे भी…


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: मन्ना डे
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: सुनील दत्त, बलराज साहनी, राज कुमार

ऐ मेरी ज़ोहरा-ज़बीं
तुझे मालूम नहीं
तू अभी तक है हंसीं
और मैं जवाँ
तुझपे क़ुरबान मेरी जान मेरी जान
ऐ मेरी…

ये शोखियाँ ये बाँकापन
जो तुझ में है कहीं नहीं
दिलों को जीतने का फ़न
जो तुझ में है कहीं नहीं
मैं तेरी
मैं तेरी आँखों में पा गया दो जहाँ
ऐ मेरी…

तू मीठे बोल जान-ए-मन
जो मुस्कुराके बोल दे
तो धडकनों में आज भी
शराबी रंग घोल दे
ओ सनम
ओ सनम मैं तेरा आशिक़-ए-जाबिदाँ
ऐ मेरी…


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: शशिकला, शशि कपूर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, शर्मिला टैगोर, साधना, राज कुमार

चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है – 2
जब तुम मुझे अपना कहते हो अपने पे ग़ुरूर आ जाता है
चेहरे पे ख़ुशी…

तुम हुस्न की ख़ुद एक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं – 2
शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
जब तुम मुझे अपना…

हम पास से तुमको क्या देखें तुम जब भी मुक़ाबिल आते हो – 2
तुम जब भी मुक़ाबिल आते हो
बेताब निगाहों के आगे परदा सा ज़रूर आ जाता है
जब तुम मुझे अपना…

जब तुमसे मुहब्बत की हमने तब जा के कहीं ये राज़ खुला – 2
तब जा के कहीं ये राज़ खुला
मरने का सलीका आते ही जीने का शऊर आ जाता है
जब तुम मुझे अपना…


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले, महेंद्र कपूर
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: शशिकला, शशि कपूर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, शर्मिला टैगोर, साधना, राज कुमार

(दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आ जा प्यार करें) – 2
दुश्मन हैं प्यार के जब लाखों ग़म संसार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें

(दुनिया का बोझ ज़रा दिल से उतार दे
छोटी सी ज़िंदगी है हंस के गुज़ार दे) – 2
अपनी तो ज़िंदगी जीती है जी को मार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें
दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आ जा प्यार करें

(अच्छा नहीं होता यूँही सपनों से खेलना
बड़ा ही कठिन है हक़ीक़तों को झेलना) – 2
अपनी हक़ीक़तें मेरे सपनों पे वार के
दिल के सहारे आ जा प्यार करें
दुश्मन हैं प्यार के जब लाखों ग़म संसार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें

(ऐसी वैसी बातें सभी दिल से निकाल दे
जीना है तो कश्ती को धारे पे डाल दे) – 2
धारे की गोद में घेरे भी हैं मझधार के
दिल के सहारे कैसे प्यार करें
(दिन हैं बहार के तेरे मेरे इक़रार के
दिल के सहारे आ जा प्यार करें) – 2


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले, महेंद्र कपूर
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: शशिकला, शशि कपूर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, शर्मिला टैगोर, साधना, राज कुमार

हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये – 2
लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये – 2

खुश्बू चमन को छोड़ के साँसों में घुल गई – 2
लहरा के अपने आप जवाँ ज़ुल्फ़ खुल गई
हम अपनी दिल पसंद पनाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये

लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये

कह दी है दिल की बात नज़ारों के सामने – 2
इक़रार कर लिया है बहारों के सामने
दोनों ज़हान आज गवाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये

मस्ती भरी घटाओं की परछाइयों तले
मस्ती भरी घटाओं की परछाइयों तले
हाथों में हाथ थाम के जब साथ हम चले
शाख़ों से फूल टूट के राहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये
लाखों हसीन ख्वाब निगाहों में आ गये
हम जब सिमट के आपकी बाँहों में आ गये


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: शशिकला, शशि कपूर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, शर्मिला टैगोर, साधना, राज कुमार

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
दिल के सोए हुए तारों में खनक जाग उठी – 2
कौन आया

किसके आने की ख़बर ले के हवाएँ आईं – 2
जिस्म के फूल चटकने की सदाएँ आईं – 2
ओ ओ ओ आ
(रूह खिलने लगी) – 2 साँसों में महक जाग उठी
दिल के सोए हुए…

किसने ये मेरी तरफ़ देख के बाँहें खोलीं – 2
शोख़ जज़्बात ने सीने में निगाहें खोलीं – 2
ओ ओ ओ आ
(होंठ तपने लगे) – 2 ज़ुल्फ़ों में लचक जाग उठी
दिल के सोए हुए…

किसके हाथों ने मेरे हाथों से कुछ माँगा है – 2
किसके ख़्वाबों ने मेरी रातों से कुछ माँगा है – 2
ओ ओ ओ आ
(साज़ बजने लगे) – 2 आँचल में खनक जाग उठी
दिल के सोए हुए…


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले, महेंद्र कपूर
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: राज कुमार, शर्मिला टैगोर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, साधना, शशि कपूर

मैं ने एक ख़्वाब सा देखा है
कहो
सुन के शरमा तो नहीं जाओगी?
नहीं, तुम से नहीं

मैं ने देखा है कि फूलों से लदी शाखों में
तुम लचकती हुई यूँ मेरी क़रीब आई हो
जैसे मुद्दत से यूँ ही साथ रहा हो अपना
जैसे अब की नहीं सदियों की शनासाई हो

मैं ने भी ख़्वाब सा देखा है
कहो, तुम भी कहो
खुद से इतरा तो नहीं जाओगे?
नहीं खुद से नहीं

मैं ने देखा कि गाते हुए झरनों के क़रीब
अपनी बेताबी-ए-जज़बात कही है तुम ने
काँपते होंठों से रुकती हुई आवाज़ के साथ
जो मेरे दिल में थी वो बात कही है तुम ने

आँच देने लगा क़दमों के तले बर्फ़ का फ़र्श
आज जाना कि मुहब्बत में है गर्मी कितनी
संगमरमर की तरह सख़्त बदन में तेरे
आ गयी है मेरे छू लेने से नर्मी कितनी

हम चले जाते हों और दूर तलक कोई नहीं
सिर्फ़ पत्तों के चटकने की सदा आती है
दिल में कुछ ऐसे ख़यालात ने करवट ली है
मुझ को तुम से नहीं अपने से हया आती है

मैं देखा है कि कोहरे से भरी वादी में
मैं ये कहता हूँ चलो आज कहीं खो जायें
मैं ये कहती हूँ कि खोने की ज़रूरत क्या है
ओढ़ कर धुंध की चादर को यहीं सो जायें


फ़िल्म: वक्त / Waqt (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: राज कुमार, शशि कपूर, शर्मिला टैगोर, सुनील दत्त, बलराज साहनी, साधना

वक़्त से दिन और रात
वक़्त से कल और आज
वक़्त की हर शै ग़ुलाम
वक़्त का हर शै पे राज

वक़्त की पाबन्द हैं
आती जाती रौनकें
वक़्त है फूलों की सेज
वक़्त है काँटों का ताज
वक़्त से दिन और रात…

आदमी को चाहिये
वक़्त से डर कर रहे
कौन जाने किस घड़ी
वक़्त का बदले मिज़ाज
वक़्त से दिन और रात…

Advertisements

Leave a comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s