ज़रा सी और पिला दो भंग – Zara Si Aur Pila Do Bhang (Kajal)

फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार



(ज़रा सी और पिला दो भंग
मैं आया देख के ऐसा रंग
के दिल मेरा डोला
ओ जै बम-भोला) – 2

मेरी तो अकल हुई है दंग
ये कैसा बदला तेरा ढंग
के तू था भोला

ओ जै बम-भोला

मुझे समझ न तू बैरागी
मैने आज तपस्या त्यागी
ऊं हूँ ऊं हूँ
ए हे ए हे
मुझे समझ न तू बैरागी
मैने आज तपस्या त्यागी
तेरे रूप का झटका खा के
मेरी सोई जवानी जागी – 2
जा हट जा परे मलंग
करे क्यूँ बीच सभी के तंग
के तू था भोला

ओ जै बम-भोला

ज़रा सी और पिला दो भंग
मैं आया देख के ऐसा रंग
के दिल मेरा डोला
ओ जै बम-भोला

मेरे दिल से निकले हाय
गोरी क्यूँ नखरे दिखलाये
एं हूँ एं हूँ
ए हे ए हे
एं हूँ एं हूँ
जा जा
मेरे दिल से निकले हाय
गोरी क्यूँ नखरे दिखलाये
ज़रा हँस के गले से लग जा
तुझे क्वारा प्यार बुलाये – 2
तेरे तन पर चड़ गया ज़ंग
यूं ही अब क्यूँ छड़काये अंग
के तू था भोला

ओ जै बम-भोला

ज़रा सी और पिला दो भंग
मैं आया देख के ऐसा रंग
के दिल मेरा डोला
ओ जै बम-भोला

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