काजल – Songs of Kaajal (1965)



फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: महेंद्र कपूर
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, राज कुमार

आप के भीगे हुए जिसम से आँच आती है
दिल को गर्माती है, जज़्बात को भड़काती है

आप के पास जो आएगा, पिघल जाएगा
इस हरारत से जो उलझेगा, वो जल जाएगा

आप का हुस्न वो शबनम है जो शोलों में पले
गर्म खुश्बुओं में तपते हुए रँगों में ढले
किसका दिल है जो सम्भाले से सम्भल जाएगा

होंठ हैं या किसी शायर की दुआओं का जवाब
ज़ुल्फ़ हैं या किसी सावन के तलबगार का ख़्वाब
ऐसे जलवों को जो देखेगा मचल जाएगा

इस कदर हुस्न ज़माने में न देखा न सुना
उसका क्या कहना जिसे आपने हमराज़ चुना
उसकी तक़दीर का ईनाम बदल जाएगा


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

छम-छम घुँघरू बोले
देखो छम-छम घुँघरू बोले
राधा लाज की मारी इत-उत डोले
देखो छम-छम घुँघरू बोले

(बाट चले तो आँचल ढलके
पग-पग रूप-गगरिया छलके) – 2
कंचन काया झिलमिल झलके
खाय कमरिया हिचकोले

देखो छम-छम घुँघरू बोले – 2


ग म ग स
ग नि ध म
नि स नि ध
नि स नि ध म

ग म ध ग म ध नि स -३

पल-पल बढ़ती जाये उलझन
पार करे कैसे घर-आँगन
जान की दुश्मन बन की झाँझन
भेद जियरवा के खोले

देखो छम-छम घुँघरू बोले






(पी बिन ऐसे तड़पे गोरी
बिन चन्दा जिस तरह चकोरी) – 2
जायेगी मिलने चोरी-चोरी
सास-ननदिया जब सो ले

देखो छम-छम घुँघरू बोले – 2


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

छू लेने दो नाज़ुक होठों को
कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हमको बख़्शा है
वो सबसे हंसीं ईनाम हैं ये

शरमा के न यूँ ही खो देना
रंगीन जवानी की घड़ियाँ
बेताब धड़कते सीनों का
अरमान भरा पैगाम है ये, छू…

अच्छों को बुरा साबित करना
दुनिया की पुरानी आदत है
इस मै को मुबारक चीज़ समझ
माना की बहुत बदनाम है ये, छू…


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

कबिरा निर्भय राम जप
जब लगदी में बाति (?)
तेल घटा बाती बुझी
सोवेगा दिन-राति

महफ़िल में तेरी यूँ ही रहे
जश-ए-चराग़ाँ
आँखों में ही ये रात
ग़ुज़र जाये तो अच्छा

साच बराबर तप नहीं
झूठ बराबर पाप
जा के हिरदय साच है
ता के हिरदय आप

जा कर तेरी महफ़िल से
कहाँ चैन मिलेगा
अब अपनी जगह अपनी
ख़बर जाये तो अच्छा

जब मैं था तब हरि नहीं
अब हरि है मैं नाहीं
सब अंधियारा मिट गया
जब दीपक देखा माहिं

जिस सुबह की तक़दीर में
लिखी हो जुदाई
उस सुबह से पहले
कोई मर जाये तो अच्छा – 2


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, राज कुमार

(मेरे भैया मेरे चँदा
मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं ज़माने की
कोई चीज़ न लूँ) – 2

तेरी साँसों की कसम खाके, हवा चलती है
तेरे चहरे की खलक पाके, बहार आती है
एक पल भी मेरी नज़रों से तू जो ओझल हो
हर तरफ़ मेरी नज़र तुझको पुकार आती है

(मेरे भैया मेरे चँदा
मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं ज़माने की
कोई चीज़ न लूँ) – 2

तेरे चहरे की महकती हुई लड़ियों के लिए
अनगिनत फूल उम्मीदों के चुने हैं मैंने
वो भी दिन आएं कि उन ख़्वाबों के ताबीर मिलें
तेरे ख़ातिर जो हसीं ख़्वाब बुने हैं मैंने

(मेरे भैया मेरे चँदा
मेरे अनमोल रतन
तेरे बदले मैं ज़माने की
कोई चीज़ न लूँ) – 2


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

प्राणी अपने प्रभु से पूछे किस विधी पाऊँ तोहे
प्रभु कहे तु मन को पा ले, पा जयेगा मोहे

तोरा मन दर्पण कहलाये – 2
भले बुरे सारे कर्मों को, देखे और दिखाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

मन ही देवता, मन ही ईश्वर, मन से बड़ा न कोय
मन उजियारा जब जब फैले, जग उजियारा होय
इस उजले दर्पण पे प्राणी, धूल न जमने पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

सुख की कलियाँ, दुख के कांटे, मन सबका आधार
मन से कोई बात छुपे ना, मन के नैन हज़ार
जग से चाहे भाग लो कोई, मन से भाग न पाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2

तन की दौलत ढलती छाया मन का धन अनमोल
तन के कारण मन के धन को मत माटि मेइन रौंद
मन की क़दर भुलानेवाला वीराँ जनम गवाये
तोरा मन दर्पण कहलाये – 2


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

समझी थी के ये घर मेरा है
मालूम हुआ मेहमान थी मैं
हो जिन्हें अपना-अपना कहती थी
हो उन सबके लिये अनजान थी मैं

इस तरह न मुझको ठुकराओ
इक बार गले से लग जाओ
हाय मैं अब भी तुम्हारी हूँ लोगों
रूठो न अगर नादान थी मैं

मेरा खोया हुआ बचपन ला दो मुझे
क्या दोष हुआ समझा दो मुझे
वो होंठ भी ना क्यूँ कहते हैं
जिन होंठों की मुस्कान थी मैं

तुम शाद रहो आबाद रहो
अब मैं तुम सबसे दूर चली
हाय परदेस बनी हैं वो गलियाँ
जिन गलियों की पहचान थी मैं


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है
बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

दुनिया की निगाहों में बुरा क्या है भला क्या
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…

वैसे तो तुम्हीं ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और पे आ जाए तो अच्छा
ये ज़ुल्फ़…


फ़िल्म: काजल / Kaajal (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: धर्मेंद्र, मीना कुमारी, पद्मिनी, राज कुमार

(ज़रा सी और पिला दो भंग
मैं आया देख के ऐसा रंग
के दिल मेरा डोला
ओ जै बम-भोला) – 2

मेरी तो अकल हुई है दंग
ये कैसा बदला तेरा ढंग
के तू था भोला

ओ जै बम-भोला

मुझे समझ न तू बैरागी
मैने आज तपस्या त्यागी
ऊं हूँ ऊं हूँ
ए हे ए हे
मुझे समझ न तू बैरागी
मैने आज तपस्या त्यागी
तेरे रूप का झटका खा के
मेरी सोई जवानी जागी – 2
जा हट जा परे मलंग
करे क्यूँ बीच सभी के तंग
के तू था भोला

ओ जै बम-भोला

ज़रा सी और पिला दो भंग
मैं आया देख के ऐसा रंग
के दिल मेरा डोला
ओ जै बम-भोला

मेरे दिल से निकले हाय
गोरी क्यूँ नखरे दिखलाये
एं हूँ एं हूँ
ए हे ए हे
एं हूँ एं हूँ
जा जा
मेरे दिल से निकले हाय
गोरी क्यूँ नखरे दिखलाये
ज़रा हँस के गले से लग जा
तुझे क्वारा प्यार बुलाये – 2
तेरे तन पर चड़ गया ज़ंग
यूं ही अब क्यूँ छड़काये अंग
के तू था भोला

ओ जै बम-भोला

ज़रा सी और पिला दो भंग
मैं आया देख के ऐसा रंग
के दिल मेरा डोला
ओ जै बम-भोला

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