भीगी रात – Songs of Bheegi Raat (1965)


फ़िल्म: भीगी रात / Bheegi Raat (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

ऐसे तो न देखो के बहक जाएं कहीं हम
आखिर को इक इनसां हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
हाय, ऐसे न कहो बात के मर जाएं यहीं हम
आखिर को इक इनसां हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

अंगड़ाई सी लेती है जो खुशबू भरी ज़ुल्फ़ें
खुशबू भरी ज़ुल्फ़ें
गिरती है तेरे सुर्ख लबों पर तेरी ज़ुल्फ़ें
लबों पर तेरी ज़ुल्फ़ें
ज़ुल्फ़ें न तेरी चूम लें, ऐ महजबीं हम
आखिर को इक इनसां हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम

सुन सुन के तेरी बात नशा छाने लगा है
नशा छाने लगा है
खुद अपने पे भी प्यार सा कुछ आने लगा है
आने लगा है
रखना है कहीं पाँव तो रखते हैं कहीं हम

आखिर को इक इनसां हैं फ़रिश्ता तो नहीं हम
आहा हा आहा हा हा, हम्म हम्म हम्म हम्म…
आहा हा आहा हा हा, हम्म हम्म हम्म हम्म…


फ़िल्म: भीगी रात / Bheegi Raat (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रोशन
गीतकार: साहिर लुधियानवी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

दिल जो ना कह सका
वोही राज़-ए-दिल कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका

तौबा ये किस ने अंजुमन सजा के
टुकड़े किये हैं गुंच-ए-वफ़ा के – 2
उछालो गुलों के टुकड़े
के रंगीं फ़िज़ाओं में रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका

चलिये मुबारक ये जश्न दोस्ती का
दामन तो थामा आप ने किसी का – 2
हमें तो खुशी यही है
तुम्हें भी किसी को अपना कहने की रात आई
दिल जो ना कह सका

सागर उठाओ दिल का किस को ग़म है
आज दिल की क़ीमत जाम से भी कम है – 2
पियो चाहे खून-ए-दिल हो
के पीते पिलाते ही रहने की रात आई
दिल जो ना कह सका


फ़िल्म: भीगी रात / Bheegi Raat (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

जाने वो कौन है क्या नाम है उन आँखों का

दिल पे अन्जानी सी इक तस्वीर बना देती हैं
बुझ के रह जाती है जब कोई तमन्ना दिल में
एक चिराग़ और भी चुपके से जला देती हैं
जाने वो कौन है…

मुझको बहलाती हैं नाशाद जो होता हूँ कभी
नींद में रंग मिलाती हैं जो सोता हूँ कभी
(जागता हूँ तो) – 2 कई ख़्वाब दिखा देती हैं
जाने वो कौन है…

जब भी उठती हैं छलकती हैं गुलाबों की तरह
देर तक मैं बहकता हूँ शराबी की तरह
क्या कहूँ चुपके से क्या चीज़ पिला देती हैं
जाने वो कौन है…

रोज़ मिलती हैं वो तनहा नहीं रहने देतीं
ये है बात और कि अपना नहीं कहने देतीं
(और कह दूँ तो) – 2 पलक हँस के झुका देती हैं
जाने वो कौन है…


फ़िल्म: भीगी रात / Bheegi Raat (1965)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

मोहब्बत से देखा ख़फ़ा हो गये हैं
हसीं आजकल के ख़ुदा हो गये हैं
मोहब्बत से देखा ख़फ़ा हो गये हैं

अदाओं में थी सादगी अबसे पहले
हो ओ ओ अदाओं में थी सादगी अबसे पहले
वल्लाह
कहाँ रंग थे ये सुनहरे रुपहले
नज़र मिलते ही
नज़र मिलते ही क्या से क्या हो गये हैं
हसीं आजकल के ख़ुदा हो गये हैं
मोहब्बत से देखा ख़फ़ा हो गये हैं

किसी मोड़ से बन के सूरज निकलना
हो ओ ओ किसी मोड़ से बन के सूरज निकलना
तौबा
कहीं धूप में चाँदनी बन के चलना
जिधर देखो जलवा
जिधर देखो जलवा नुमाँ हो गये हैं
हसीं आजकल के ख़ुदा हो गये हैं
मोहब्बत से देखा ख़फ़ा हो गये हैं

यहाँ तो लगा दिल पे इक ज़ख़्म गहरा
हो ओ ओ यहाँ तो लगा दिल पे इक ज़ख़्म गहरा
हाय
वहाँ सिर्फ़ उनका ये अंदाज़ ठहरा
ख़ता करके भी
ख़ता करके भी बेख़ता हो गये हैं
हसीं आजकल के ख़ुदा हो गये हैं
मोहब्बत से देखा ख़फ़ा हो गये हैं

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