कश्मीर की कली – Songs of Kashmir Ki Kali (1964)



फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

बलमा खुली हवा में महकी हुई फ़िज़ा में
दिल चाहता है मेरा बहकना इधर उधर

पग पग चलूँ बलखाती
खुद भी न जानूँ कहाँ
कहता है ये दिल मतवाला
आज अपना है सारा जहाँ
हो हो हो… बलमा खुली हवा में…

छुन छुन बोले मोरी पायल
आजा कहे साजना
आजा के ये सारे नज़ारे
सैंया फीके हैं तेरे बिना
हो हो हो… बलमा खुली हवा में…


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

ये देखके दिल झूमा, ली प्यार ने अंगड़ाई
दीवाना हुआ बादल
सावन की घटा छाई
ये देखके दिल झूमा, ली प्यार ने अंगड़ाई
दीवाना हुआ बादल

ऐसी तो मेरी तक़दीर न थी
तुमसा जो कोई महबूब मिले
(दिल आज खुशी से पागल है) – 2
(ऐ जानेवफ़ा तुम खूब मिले) – 2
दिल क्यूँ ना बने पागल, क्या तुमने अदा पाई
ये देखके दिल झूमा, ली प्यार ने अंगड़ाई
दीवाना हुआ बादल

जब तुमसे नज़र टकराई सनम
जज़बात का एक तूफ़ान उठा
(तिनके की तरह मैं बह निकली) – 2
(सैलाद मेरे रोके न रुका) – 2
जीवन में मची हलचल
और बजने लगी शहनाई
ये देखके दिल झूमा, ली प्यार ने अंगड़ाई
दीवाना हुआ बादल

है आज नये अरमानों से, आबाद मेरी दिल की नगरी
(बरसों से फ़िज़ाँ का मौसम था) – 2
(वीरान बड़ी दुनिया थी मेरी) – 2
हाथों में तेरा आँचल, आया जो बहार आई
ये देखके दिल झूमा, ली प्यार ने अंगड़ाई

दीवाना हुआ बादल, सावन कि घटा छाई
ये देखके दिल झूमा, ली प्यार ने अंगड़ाई
दीवाना हुआ बादल, सावन की घटा छाई
ये देखके दिल झूमा, ली प्यार ने अंगड़ाई,
दीवाना हुआ बादल


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

हाए रे हाए, ये मेरे हाथ में तेरा हाथ, नए जज़्बात,
मेरी जाँ बल्ले बल्ले!
ओए ओए होए ओए ओए ओए
हाए रे हाए, यही जज़्बात रहें दिन रात, तो फिर क्या बात,
मेरी जाँ बल्ले बल्ले!
ओ ओए होए ओए ओए ओए

ओ ओ ओए
जब से दिल में तेरी तस्वीर बनी है
यूँ लगता है जैसे तक़दीर बनी है
ओ ओ ओए
जब से तू इस दिल का मेहमान हुआ है
जीवन में ख़ुशियों का सामान हुआ है
जितनी दूर नज़र मैं डालूँ चारों ओर बहार है!
हाए रे हाए,
यही जज़्बात रहें दिन रात… मेरी जाँ बल्ले बल्ले!
ओए ओए होए ओए ओए ओए

ओ ओ ओए
तेरे घर शहनाई जिस रात बजेगी,
तेरी मेरी जोड़ी क्या ख़ूब सजेगी
ओ ओ ओए
पूरे होंगे दिल के अरमान हमारे
आँचल में भर लेंगे हम चाँद सितारे
तेरे आगे चाँद सितारे, ओ गोरी, क्या चीज़ है?
हाए रे हाए,
यही जज़्बात रहें दिन रात… मेरी जाँ बल्ले बल्ले!
ओए ओए होए ओए ओए ओए

ओ ओ ओए
तेरी सूरत प्यारी, अरे, जो भी देखे,
सच कहता हूँ अपना ईमान ही खो दे
ओ ओ ओए
तेरी आँखों में भी, अरे, वो जादू है
जब से आँख मिली है, दिल बेक़ाबू है
ख़ुद को खो कर तुझको पाया, क्या मेरी तक़दीर है!
हाए रे हाए,
यही जज़्बात रहें दिन रात… मेरी जाँ बल्ले बल्ले!

ओए ओए होए ओए ओए ओए
हाए रे हाए, ये तेरे हाथ में मेरा हाथ, नए जज़्बात
मेरी जाँ बल्ले बल्ले!
ओए ओए होए ओए ओए ओए
हाए रे हाए, यही जज़्बात रहें दिन रात, तो फिर क्या बात!
मेरी जाँ बल्ले बल्ले!


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शर्मिला टैगोर, शम्मी कपूर

है दुनिया उसी की, ज़माना उसी का
मोहब्बत में जो हो गया हो किसी का

(लुटा जो मुसाफ़िर दिल के सफ़र में
है जन्नत यह दुनिया उसकी नज़र में) – 2
उसी ने है लूटा मज़ा ज़िंदगी का
मोहब्बत में…

(है सजदे के काबिल हर वो दीवाना
के जो बन गया हो तसवीर-ए-जाना) – 2
करो एह्तराम उस की दीवानगी का
मोहब्बत में…

(बर्बाद होना जिसकी अदा (???) हो
दर्द-ए-मोहब्बत जिसकी दवा हो) – 2
सताएगा क्या ग़म उसे ज़िंदगी का
मोहब्बत में…


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

इशारों इशारों में दिल लेने वाले
बता ये हुनर तूने सीखा कहाँ से
निगाहों निगाहों में जादू चलाना
मेरी जान सीखा है तुमने जहाँ से

मेरे दिल को तुम भा गए
मेरी क्या थी इस में खता
मेरे दिल को तड़पा दिया
यही थी वो ज़ालिम अदा, यही थी वो ज़ालिम अदा
ये राँझा की बातें, ये मजनू के किस्से
अलग तो नहीं हैं मेरी दास्तां से

मुहब्बत जो करते हैं वो
मुहब्बत जताते नहीं
धड़कने अपने दिल की कभी
किसी को सुनाते नहीं, किसी को सुनाते नहीं
मज़ा क्या रहा जब की खुद कर लिया हो
मुहब्बत का इज़हार अपनी ज़ुबां से

माना की जान-ए-जहाँ
लाखों में तुम एक हो
हमारी निगाहों की भी
कुछ तो मगर दाद दो, कुछ तो मगर दाद दो
बहारों को भी नाज़ जिस फूल पर था
वही फूल हमने चुना गुलसितां से


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

(किसी न किसी से कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा) – 2

एक से एक हसीं चेहरे हैं
किस-किस को मैं देखूँ
किसको इनमें अपना समझूँ
और संग मैं अपने ले लूँ
कोई रंगीली छैल-छबीली – 2
आज मेरी ज़िन्दगी में आ के रहेगी
किसी न किसी से…

ढूँढ रहा हूँ मैं वो दुनिया
प्यार जिसे कहते हैं
कौन वो क़िस्मत वाले हैं
जो लोग वहाँ रहते हैं
मुझको मेरे दिल ले के वहीं चल – 2
आए जहाँ हाथ कोई रेशमी आँचल
किसी न किसी से…

ऐसी नाज़ुक हो वो जिसका
शबनम मुँह धोती हो
चाँद भी सदके होता हो
जब रात को वो सोती हो
आँख शराबी गाल गुलाबी – 2
प्यार से सँवार दे जो ज़िन्दगी मेरी
किसी न किसी से…


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

फिर ठेस लगी दिल को फिर याद ने तड़पाया
फिर बहने लगे आँसू दिल दर्द से भर आया
फिर ठेस लगी…

दुनिया तेरे गुलशन से इक फूल चुना हमने – 2
इक फूल चुना हमने
अफ़सोस कि दामन को काँटों से भरा पाया
फिर ठेस लगी…

इक वो हैं ख़ुदा रखे जो भूल गए हमको – 2
जो भूल गए हमको
इक हम हैं कि होंठों पर शिक़वा ना कभी आया
फिर बहने लगे…


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

सुभान अल्लाह हाय हसीं चेहरा हाय
सुभान अल्लाह हसीं चेहरा ये मस्ताना अदाएँ
ख़ुदा महफ़ूज़ रखे हर बला से हर बला से

तुम्हें देखा हाय तो दिल बोला हाय
तुम्हें देखा तो दिल बोला तुमको दूँ दुआएँ
ख़ुदा महफ़ूज़ रखे…

करे पूजा ज़माना जिसकी वो तस्वीर हो तुम
मिला करती है जन्नत जिससे वो तक़दीर हो तुम
क़मर पतली हाय नज़र बिजली हाय ज़ुल्फ़ें हैं या घटाएँ
ख़ुदा महफ़ूज़ रखे…

न जाने किसकी क़िस्मत में है मुखड़ा चाँद सा ये
न जाने किसके घर चमकेगा टुकड़ा चाँद का ये
इजाज़त हो तो फिर हम भी मुक़द्दर आज़माएँ
ख़ुदा महफ़ूज़ रखे…

बड़ी हसरत से तुमको देखता है ये ज़माना
सुनाना चाहता है हर कोई अपना फ़साना
कोई दिल हो कोई महफ़िल जहाँ भी आप जाएँ
ख़ुदा महफ़ूज़ रखे…


फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर

ये चांद सा रोशन चेहरा, ज़ुल्फ़ों का रंग सुनहरा
ये झील सी नीली आँखें, कोई राज़ है इनमें गहरा
तारीफ़ करूँ क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया
तारीफ़ करूँ क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया…

एक चीज़ क़यामत सी है, लोगों से सुना करते थे
तुम्हे देखके मैने माना, वो ठीक कहा करते थे
वो ठीक कहा करते थे
है चाल में तेरी ज़ालिम, कुछ ऐसी बला का जादू
सौ बार सम्भाला दिल को, पर होके रहा बेकाबू
तारीफ़ करूँ क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया…

हर सुबह किरन की लाली, है रंग तेरे गालों का
हर शाम की चादर काली, साया है तेरे बालों का
साया है तेरे बालों का
तू बलखाती एक नदिया, हर मौज तेरी अंगड़ाई
जो इन मौजों में डूबा, उसने ही दुनिया पाई
तारीफ़ करूँ क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया…

मैं खोज में हूँ मंज़िल के, और मंज़िल पास है मेरे
मुखड़े से हटा दो आंचल, हो जाएं दूर अंधेरे
हो जाएं दूर अंधेरे
माना के ये जलवे तेरे, कर देंगे मुझे दीवाना
जी भर के ज़रा मैं देखूँ, अंदाज़ तेरा मस्ताना
तारीफ़ करूँ क्या उसकी, जिसने तुम्हें बनाया…

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