जी चाहता है – Songs of Ji Chahta Hai (1964)


फ़िल्म: जी चाहता है / Ji Chahta Hai (1964)
गायक/गायिका: मुकेश
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: इंदीवर
अदाकार: जॉय मुखर्जी, राजश्री

हम छोड़ चले हैं महफ़िल को याद आये कभी तो मत रोना
इस दिल को तसल्ली दे देना, घबराये कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को…

एक ख़्वाब सा देखा था हमने
जब आँख खुली वो टूट गया
ये प्यार अगर सपना बनकर
तड़पाये कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को

तुम मेरे ख़यालों में खोकर
बरबाद न करना जीवन को
जब कोई सहेली बात तुम्हें
समझाये कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को…

जीवन के सफ़र में तनहाई
मुझको तो न ज़िन्दा छोड़ेगी
मरने की खबर ऐ, जान-ए-जिगर
मिल जाये कभी तो मत रोना
हम छोड़ चले हैं महफ़िल को…


फ़िल्म: जी चाहता है / Ji Chahta Hai (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: हसरत जयपुरी
अदाकार: श्यामा, राजश्री, जॉय मुखर्जी

हमने देखा है तुम्हें ऐसा ग़ुमाँ होता है
आँख मिलती है तो क्यों दर्द जवाँ होता है
हमने देखा है…

ऐसा लगता है कि हमदम मेरा वापस आया
मेरे जीवन पे मुहब्बत का नशा सा छाया
दिल में चलने लगा फिर हुस्न का रोशन साया
हमने देखा है…

जाने क्यों मेरा दिल क़दमों पे झुक जाता है
कोई बिछड़ा हुआ साथी मुझे याद आता है
ये मिलन प्यार भरा किसलिए तड़पाता है
हमने देखा है…

आज सदियों की मुलाकात निकल आई है
जैसे तूफ़ान से बारात निकल आई है
दिल में रहती थी वो ही बात निकल आई है
हमने देखा है…


फ़िल्म: जी चाहता है / Ji Chahta Hai (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: कल्याणजी-आनंदजी
गीतकार: हसरत जयपुरी
अदाकार: श्यामा, राजश्री, जॉय मुखर्जी

मेरी ज़िन्दगी तेरे प्यार में हम कहाँ-कहाँ से गुज़र गए
मेरे दिल से आई तेरी सदा हम जहाँ-जहाँ से गुज़र गए

मेरे दिल ने ढूँढा जगह-जगह कि पता तुम्हारा नहीं चला
फिरे हम भी तेरी तलाश में गुल-ए-आरज़ू तो नहीं खिला – 2
(जहाँ आफ़ताब न जा सके) – 2 हम वहाँ-वहाँ से गुज़र गए
मेरी ज़िन्दगी तेरे…

तू हज़ार पर्दों में हो कहीं तुझे पा के मानेंगे एक दिन
तू कहीं रहे तू कहीं छुपे तुझे ला के मानेंगे एक दिन
(हमें मौत का कोई डर नहीं) – 2 तेरे आस्ताँ से गुज़र गए
मेरी ज़िन्दगी तेरे…

मेरे दिल से निकला है गीत जो तू सुने तो फिर कोई बात है
तू झलक दिखा तू नज़र तो आ मेरी हर दुआ तेरे साथ है
(तुझे देख लें इसी शौक़ में) – 2 ग़म-ए-दो-जहाँ से गुज़र गए
मेरी ज़िन्दगी तेरे…

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