जहांआरा – Songs of Jahan Ara (1964)


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

ऐ सनम
ऐ सनम आज ये क़सम खाएँ
मुड़ के अब देखने का नाम ना लें
प्यार की वादियों में खो जाएँ
ऐ सनम आज ये क़सम खाएँ
फ़ासले प्यार के मिटा डालें
और दुनिया से दूर हो जाएँ
ऐ सनम आज ये…

जिस तरफ़ जाएँ बहारों के सलाम आएँगे – 2
आसमानों से भी रंगीन पयाम आएँगे
तेरा जलवा है जहाँ मेरी जन्नत है वहाँ
तेरे होंठों की हँसी सौ बहारों का समाँ
ऐ सनम आज ये…

अपना ईमान फ़क़त अपनी मोहब्बत होगी
हर घड़ी इश्क़ की इक ताज़ा क़यामत होगी
देख कर रंग-ए-वफ़ा मुस्कुराएगा ख़ुदा
और सोचेगा ज़रा इश्क़ क्यों पैदा किया
इश्क़ क्यों पैदा किया – 2
ऐ सनम आज ये…


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, सुमन कल्याणपुर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

बाद मुद्दत के यह घड़ी आई
आप आए तो ज़िंदगी आई
इश्क़ मर मरके कामयाB हुआ
आज एक ज़र्रा आफ़्ताब हुआ

शुक्रिया ऐ हुज़ूर आने का
वक़्त जागा गरीब-खाने का
एक ज़माने के बाद ईद हुई
ईद से पहले मेरी दीद हुई

ईद का चाँद आज देखा है
ईद का क्यों न ऐतबार आए
हाथ उठाकर दुआ यह करता हूँ
ईद फिर ऐसी बार-बार आए

दिन ज़माने का रात अपनी है
इस घड़ी क़ायनात अपनी है
इश्क़ पर हुस्न की इनायत है
मेरे पहलू में मेरी जन्नत है

फ़ासले वक़्त ने मिटा ही दिये
दिल तड़पते हुए मिला ही दिये
काश इस वक़्त मौत आ जाए
ज़िंदगानी पे आके छा जाए

बात मुद्दत के…


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

हाल-ए-दिल यूँ उन्हें सुनाया गया
आँख ही को ज़ुबाँ बनाया गया

ज़िन्दगी की उदास रातों को
आपकी याद में सजाया गया
हाल-ए-दिल यूँ…

इश्क़ की वो भी इक मंज़िल थी
हर क़दम पर फ़रेब खाया गया
हाल-ए-दिल यूँ…

दिल पे एक वह भी हादसा गुज़रा – 2
आज तक दिल से न छुपाया गया
हाल-ए-दिल यूँ…

लाख तूफ़ाँ समेट कर या रब – 2
किसलिए एक दिल बनाया गया
हाल-ए-दिल यूँ…


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, आशा भोंसले
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

जब-जब तुम्हें भुलाया तुम और याद आए
(जब-जब तुम्हें भुलाया हाँ तुम और याद आए तुम और याद आए) – 2
जाते नहीं हैं दिल से अब तक तुम्हारे साए – 2
जाते नहीं हैं दिल से हाँ अब तक तुम्हारे साए
जब-जब तुम्हें भुलाया…

तुमसे बिछड़ के हमने दिल को बहुत संभाला -४
दिल को बहुत संभाला
गुलशन में ये न बहला आ
गुलशन में ये न बहला सहरा में भी सताए
तुम और याद आए
जब-जब तुम्हें भुलाया…

मरने की आरज़ू में हम जी रहे हैं ऐसे – 2
मरने की आरज़ू में हो हम जी रहे हैं ऐसे – 2
हम जी रहे हैं ऐसे
जैसे की लाश अपनी खुद ही कोई उठाए
तुम और याद आए
जब-जब तुम्हें भुलाया…


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

किसी की याद में दुनिया को हैं भुलाये हुये
ज़माना गुज़रा है अपना ख़्हयाल आअये हुये

बड़ी अजीब ख़्हुशी है ग़म-ए-मुहब्बत भी
हँसी लबों पे मगर दिल पे चोट खाये हुये

हज़ार पर्दे हों पहरें हों या हों दीवारें
रहेंगे मेरी नज़र में तो वो समाये हुये

किसी के हुस्न की बस इक किरण ही काफ़ी है
ये लोग क्यूँ मेरे आगे हैं शम्मा लाये हुये


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

मैं तेरी नज़र का सुरूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
तेरे पास रहके भी दूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
मैं तेरी नज़र का सुरूर हूँ

(मुझे आँख से तो गिरा दिया
कहो दिल से भी क्या भुला दिया) – 2
तेरी आशिक़ी का ग़ुरूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
मैं तेरी नज़र का…

(तेरी ज़ुल्फ़ है मेरे हाथ में
के तू आज भी मेरे साथ है) – 2
तेरे दिल में भी मैं ज़रूर हूँ
तुझे याद हो के ना याद हो
मैं तेरी नज़र का…


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

फिर वही शाम वही ग़म वही तनहाई है
दिल को समझाने तेरी याद चली आई है

फिर तसव्वुर तेरे पहलू में बिठा जाएगा
फिर गया वक़्त घड़ी भर को पलट आएगा
दिल बहल जाएगा आखिर ये तो सौदाई है
फिर वही शाम…

जाने अब तुझ से मुलाक़ात कभी हो के न हो
जो अधूरी रहे वो बात कभी हो के न हो
मेरी मंज़िल तेरी मंज़िल से बिछड़ आई है
फिर वही शाम…

फिर तेरे ज़ुल्फ़ के रुखसार की बातें होंगी
हिज्र की रात मगर प्यार की बातें होंगी
फिर मुहब्बत में तड़पने की क़सम खाई है
फिर वही शाम…


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: तलत महमूद
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: माला सिन्हा, भारत भूषण

तेरा ग़मख़्वार हूँ लेकिन मैं तुझ तक आ नहीं सकता
मैं अपने नाम तेरी बेकसी लिखवा नहीं सकता

तेरी आँख के आँसू पी जाऊं ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ
तेरे ग़म में तुझको बहलाऊं ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ

ऐ काश जो मिल कर रोते, कुछ दर्द तो हलके होते
बेकार न जाते आँसू, कुछ दाग़ जिगर के धोते
फिर रंज न होता इतना, है तनहाई में जितना
अब जाने ये रस्ता ग़म का, है और भी लम्बा कितना
हालात की उलझन सुलझाऊँ ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ
तेरी आँख के आँसू पी जाऊँ

क्या तेरी ज़ुल्फ़ का लेहरा, है अब तक वही सुनहरा
क्या अब तक तेरे दर पे, देती हें हवाएं पहरा
लेकिन है ये खाम-ओ-खयाली, तेरी ज़ुल्फ़ बनी है सवाली
मोहताज है एक कली की, इक रोज़ थी फूलों वाली
वो ज़ुल्फ़ें परेशां महकाऊं ऐसी मेरी तक़दीर कहाँ
तेरी आँख के आँसू पी जाऊँ


फ़िल्म: जहांआरा / Jahan Ara (1964)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: मीना कुमारी, भारत भूषण

वो चुप रहें तो मेरे दिल के दाग़ जलते हैं
जो बात कर लें तो बुझते चराग़ जलते हैं

कहो बुझें के जलें
हम अपनी राह चलें या तुम्हारी राह चलें
कहो बुझें के जलें
बुझें तो ऐसे के किसी ग़रीब का दिल
किसी ग़रीब का दिल
जलें तो ऐसे के जैसे चराग़ जलते हैं

यह खोई खोई नज़र
कभी तो होगी या सदा रहेगी उधर
यह खोई खोई नज़र
उधर तो एक सुलग़ता हुआ है वीराना
है एक वीराना
मगर इधर तो बहारों में बाग़ जलते हैं

जो अश्क़ पी भी लिए
जो होंठ सी भी लिए, तो सितम ये किसपे किए
जो अश्क़ पी भी लिए
कुछ आज अपनी सुनाओ कुछ आज मेरी सुनो
ख़ामोशिओं से तो दिल और दिमाग़ जलते हैं

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