किसी न किसी से कभी न कभी – Kisi Na Kisi Se Kabhi Na Kabhi (Kashmir Ki Kali)

फ़िल्म: कश्मीर की कली / Kashmir Ki Kali (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: ओ. पी. नय्यर
गीतकार: एस. एच. बिहारी
अदाकार: शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर



(किसी न किसी से कभी न कभी
कहीं न कहीं दिल लगाना पड़ेगा) – 2

एक से एक हसीं चेहरे हैं
किस-किस को मैं देखूँ
किसको इनमें अपना समझूँ
और संग मैं अपने ले लूँ
कोई रंगीली छैल-छबीली – 2
आज मेरी ज़िन्दगी में आ के रहेगी
किसी न किसी से…

ढूँढ रहा हूँ मैं वो दुनिया
प्यार जिसे कहते हैं
कौन वो क़िस्मत वाले हैं
जो लोग वहाँ रहते हैं
मुझको मेरे दिल ले के वहीं चल – 2
आए जहाँ हाथ कोई रेशमी आँचल
किसी न किसी से…

ऐसी नाज़ुक हो वो जिसका
शबनम मुँह धोती हो
चाँद भी सदके होता हो
जब रात को वो सोती हो
आँख शराबी गाल गुलाबी – 2
प्यार से सँवार दे जो ज़िन्दगी मेरी
किसी न किसी से…

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