रुस्तम-सोहराब – Songs of Rustom Sohrab (1963)


फ़िल्म: रुस्तम-सोहराब / Rustom Sohrab (1963)
गायक/गायिका: आशा भोंसले
संगीतकार: सज्जाद हुसैन
गीतकार: कमर जलालाबादी
अदाकार: प्रेम नाथ, मुमताज़, सुरैया, पृथ्वीराज कपूर

(अब देर हो गई वल्ला
तू छोड़ दे मेरा पल्ला) – 2
फिर मिलेंगे इन्शा-अल्ला
अब देर हो गई वल्ला
तू छोड़ दे मेरा पल्ला
फिर मिलेंगे इन्शा-अल्ला
अब देर हो गई वल्ला – 2

(मुझे रोक न ज़ालिम बेदर्दी
हाय लगती है मुझको सरदी) – 2
मुझ जैसी फिर न पाओगे
मर जाउँगी मैं उई अल्ला
अब देर हो गई वल्ला
तू छोड़ दे मेरा पल्ला
अब देर हो गई वल्ला

(ऐ जान-ए-मोहब्बत जाने दे
दे मुझको इजाज़र जाने दे) – 2
मैं तुमसे वादा करती हूँ
कल आऊँगी इन्शा-अल्ला
अब देर हो गई वल्ला
तू छोड़ दे मेरा पल्ला
अब देर हो गई वल्ला

(अच्छा सरकार ख़ुदा-हाफ़िज़
मेरे दिलदार ख़ुदा-हाफ़िज़) – 2
क्यूँ
ख़फ़ा हो गये
क्या कहने हैं सुभान-अल्ला
अब देर हो गई वल्ला
तू छोड़ दे मेरा पल्ला
अब देर हो गई वल्ला – 2


फ़िल्म: रुस्तम-सोहराब / Rustom Sohrab (1963)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: सज्जाद हुसैन
गीतकार: जांनिसार अख्तर
अदाकार: निम्मी, सुरैया

ऐ दिलरुबा ऐ दिलरुबा
ऐ दिलरुबा नज़रें मिला
कुछ तो मिले ग़म का सिला
ऐ दिलरुबा…

अश्क़ों का इक दरिया बहा
प्यासा था दिल प्यासा रहा
नज़रें मिला, नज़रें मिला
रहने न दे कोई गिला
ऐ दिलरुबा…


फ़िल्म: रुस्तम-सोहराब / Rustom Sohrab (1963)
गायक/गायिका: तलत मेहमूद
संगीतकार: सज्जाद हुसैन
गीतकार: जांनिसार अख्तर
अदाकार: प्रेम नाथ, मुमताज़, सुरैया, पृथ्वीराज कपूर

माज़न्दरान! माज़न्दरान! – 2
मेरे वतन! मेरे जहान! ऐ गुलसितान! जन्नत-निशान!

हर फूल तेरा इक चमन,
हर शाख़ है नाज़ुक दुल्हन
ऐ जान-ए-मन, ऐ जान-ए-मन
सदक़े तेरे…
सदक़े तेरे ये जिस्म-ओ-जान
माज़न्दरान! माज़न्दरान!

ज़र्रे हैं तेरे या गुहर,


फ़िल्म: रुस्तम-सोहराब / Rustom Sohrab (1963)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, मन्ना डे, सादत खान
संगीतकार: सज्जाद हुसैन
गीतकार: कमर जलालाबादी
अदाकार: प्रेम नाथ, मुमताज़, सुरैया, पृथ्वीराज कपूर

फिर तुम्हारी याद आई ऐ सनम, ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें, अल्लाह क़सम
अल्लाह क़सम, अल्लाह क़सम, अल्लाह क़सम

हाल-ए-दिल यार को लिखूँ कैसे
हाथ दिल से जुदा नहीं होता
किस तरह उनको बताएं अपना ग़म, ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें, अल्लाह क़सम

तुम मेरे दिल में, मेरी आँखों में हो
तुम मेरे ख़्वाबों, मेरी आहों में हो
दूर रहकर भी जुदा होंगे न हम, ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें, अल्लाह क़सम

जबसे देकी सूरत उनकी, हम शमा जलाना भूल गए
रुख़सार की सुर्खी क्या कहिए, फूलों का फ़साना भूल गए
बस इतनी कहानी है अपनी, जब आँख मिली बेहोश हुए
दामन से हवा तुम कर न सके, हम होश में आना भूल गए
कितने प्यारे हैं मोहब्बत के सितम, ऐ सनम

क्या लुत्फ़ आ रहा था – 3, दिलबर की दिल्लगी से
नज़रें भी थी मुझी पर, परदा भी था मुझी से
क्या हसीं तसवीर थी, अल्लाह क़सम, ऐ सनम
हम न भूलेंगे तुम्हें, अल्लाह क़सम
अल्लाह क़सम, अल्लाह क़सम, अल्लाह क़सम


फ़िल्म: रुस्तम-सोहराब / Rustom Sohrab (1963)
गायक/गायिका: सुरैया
संगीतकार: सज्जाद हुसैन
गीतकार: कमर जलालाबादी
अदाकार: प्रेम नाथ, मुमताज़, सुरैया, पृथ्वीराज कपूर

(ये कैसी अजब दास्ताँ हो गई है
छुपाते छुपाते बयाँ हो गई है) – 2
ये कैसी…

ये दिल का धड़कना, ये नज़रों का झुकना
जिगर में जलन सी ये साँसों का रुकना
ख़ुदा जाने क्या दास्ताँ हो गई है
छुपाते छुपाते बयाँ हो गई है
ये कैसी….

बुझा दो बुझा दो, बुझा दो सितारों की शम्में बुझा दो
छुपा दो छुपा दो, छुपा दो हसीं चाँद को भी छुपा दो
यहाँ रौशनी महमाँ हो गई है
ये कैसी….

इलाही ये तूफ़ान है किस बला का
कि हाथों से छुटा है दामन हया का
(ख़ुदा की क़सम आज दिल कह रहा है) – 2
कि लुट जाऊँ मैं नाम लेकर वफ़ा का
तमन्ना तड़प कर जवाँ हो गई है
ये कैसी….
छुपाते छुपाते…..

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