आओ प्यार करें – Songs of Aao Pyar Karen (1964)


फ़िल्म: आओ प्यार करें / Aao Pyar Karen (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: ऊषा खन्ना
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: जॉय मुखर्जी, सायरा बानो

बहार-ए-हुस्न तेरी, मौसम-ए-शबाब तेरा
कहाँ से ढूँढ के लाए कोई जवाब तेरा
ये सुबह भी तेरे रुखसार की झलक ही तो है
के नाम लेके निकलता है आफ़ताब तेरा

जहाँ तू है वहाँ फिर चाँदनी को कौन पूछेगा – 2
तेरा दर हो तो जन्नत की गली को कौन पूछेगा
जहाँ तू है…

कली हो हाथ में ले कर बहारों को न शरमाना
ज़माना तुझको देखेगा कली को कौन पूछेगा
जहाँ तू है…

फ़रिश्तों को पता देना न अपनी रहगुज़ारों का
वो क़ाफ़िर हो गए तो बन्दगी को कौन पूछेगा
जहाँ तू है…

किसी को मुस्करा के ख़ूबसूरत मौत ना देना
क़सम है ज़िन्दगी की ज़िन्दगी को कौन पूछेगा
जहाँ तू है…


फ़िल्म: आओ प्यार करें / Aao Pyar Karen (1964)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: ऊषा खन्ना
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: जॉय मुखर्जी, सायरा बानो

दिल के आईने में तस्वीर तेरी रहती है
मैं ये समझा कोई जन्नत की परी रहती है
दिल के आईने में…

शरबती आँखें तेरी ज़िन्दगी भर का नशा
दिल की धड़कन है मेरी तेरी पायल की सदा ऐ जान-ए-वफ़ा
दिल के आईने में…

सोचता हूँ मैं कभी क्या तुझे भी है ख़बर
कि तेरी एक नज़र है मेरी शाम-ओ-सहर
तू बहारों का है दिल तू नज़ारों का जिगर ऐ जान-ए-वफ़ा
दिल के आईने में…

हुस्न-ए-मासूम तेरा कभी मग़रूर न हो
अपनी तारीफ़ तुझे कभी मंज़ूर न हो
इश्क़ वालों से जफ़ा तेरा दस्तूर न हो ऐ जान-ए-वफ़ा
दिल के आईने में…


फ़िल्म: आओ प्यार करें / Aao Pyar Karen (1964)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: ऊषा खन्ना
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: जॉय मुखर्जी, सायरा बानो

इक सुनहरी शाम थी बहकी-बहकी ज़िंदगी
राह में हम तुम मिले मेरी पलकों के तले आशियाँ तेरा बन गया
इक सुनहरी शाम

दो क़दम मिलकर चले तो फ़ासले कम हो गए
प्यार ने दुनिया बदल दी क्या से क्या हम हो गए
शोले शबनम हो गए
इक सुनहरी शाम थी…

शाम तो अब तक वही है रंग है लेकिन जुदा
जाने किस वादी में अपनाअ क़ाफ़िला गुम हो गया
फिर है दिल तन्हा मेरा
इक सुनहरी शाम थी…


फ़िल्म: आओ प्यार करें / Aao Pyar Karen (1964)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: ऊषा खन्ना
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: जॉय मुखर्जी, सायरा बानो

मेरी दास्ताँ मुझे ही मेरा दिल सुना के रोए
कभी रो के मुस्कराए कभी मुस्करा के रोए
मेरी दास्ताँ मुझे…

मिले ग़म से अपने फ़ुरसत तो मैं हाल पूछूँ उनका
शब-ए-ग़म से कोई कह दे कहीं और जा के रोए
मेरी दास्ताँ मुझे…

हमें वास्ता तड़प से हमें काम आँसुओं से
तुझे याद करके रोए या तुझे भुला के रोए
मेरी दास्ताँ मुझे…

वो जो आजमा रहे थे मेरी बेक़रारियों को
मेरे साथ-साथ वो भी मुझे आजमा के रोए
मेरी दास्ताँ मुझे…

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