भरोसा – Songs of Bharosa (1963)


फ़िल्म: भरोसा / Bharosa (1963)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, महेंद्र कपूर
संगीतकार: रवि
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: गुरु दत्त, आशा पारेख

आज की मुलाकात बस इतनी,
कर लेना बातें कल चाहे जितनी
अच्छी नहीं होती है ज़िद इतनी,
देखो हमें तुमसे है प्रीत कितनी

प्यार जो किया है जताते हो क्यूं,
बात ऐसी होठों पे लाते हो क्यूं
और हम जो पूछें सताते हो क्यूं,
अभी अभी आये अभी जाते हो क्यूं

कभी कभी ऐसे भी आया करो
चाँद निकले तो घर जाया करो
आयेंगे जायेंगे मरज़ी से हम
प्यार है तो नाज़ भी उठाया करो

ठहरो मैं दिल को सम्भालूं ज़रा
पलकों में तुमको छुपा लूं ज़रा
समझे ना अब तक मोहब्बत है क्या
आओ तुम्हे ये भी समझा दूं ज़रा


फ़िल्म: भरोसा / Bharosa (1963)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: गुरु दत्त, आशा पारेख, मेहमूद, शोभा खोटे

धड़का ओ दिल धड़का
गुज़रा गली से तेरे-मेरे सपनों वाला लड़का

मैने भी देखा उसने भी देखा
आँखों ही आँखों में हुईं बतियाँ
एक भूल हुई पता भी न पूछा
कैसे अब तो लिखूँ पतियाँ
धड़का ओ दिल…

होगा मिलन कब मैं तो न जानूँ जान-ए-मन रसिया
उनकी लगन में गाती रहूँगी आए न मन-बसिया
धड़का ओ दिल…


फ़िल्म: भरोसा / Bharosa (1963)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: गुरु दत्त, आशा पारेख, मेहमूद, शोभा खोटे

इस भरी दुनिया में, कोई भी हमारा न हुआ
गैर तो गैर हैं, अपनों का सहारा न हुआ

लोग रो-रो के भी इस दुनिया में जी लेते हैं
एक हम हैं की हंसे भी तो गुज़ारा न हुआ

इक मुहब्बत के सिवा और न कुछ माँगा था
क्या करें ये भी ज़माने को गंवारा न हुआ

आसमान जितने सितारे हैं तेरी महफ़िल में
अपनी तक़दीर का ही कोई सितारा न हुआ


फ़िल्म: भरोसा / Bharosa (1963)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रवि
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: गुरु दत्त, आशा पारेख, मेहमूद, शोभा खोटे

काहे इतना गुमान छोरिए ये मेला दो दिन का – 2
काहे करता है प्यार छोरवा ये मेला दो दिन का
जा-जा डोरे न डाल छोरवा ये मेला दो दिन का

अरे सुन-सुन
अरे जा-जा-जा
ओ चल ठुमक-ठुमक ज़रा ठुमक-ठुमक

तेरी ख़ातिर खोल के रखा है दिल का दरवाज़ा
पइयाँ हम नहीं पड़ने वाले मरज़ी हो तो आजा
बड़ा आया दिलदार छोरवा ये मेला दो दिन का
काहे करता है प्यार…

देख ज़रा ये काली-काली ज़ुल्फ़ों की ज़ंजीरें
बँधी हुई है इनमें तेरे जैसों की तक़दीरें
लुट जाएगा जहान छोरिए ये मेला दो दिन का
काहे इतना गुमान…


फ़िल्म: भरोसा / Bharosa (1963)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: रवि
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: गुरु दत्त, आशा पारेख, मेहमूद, शोभा खोटे

(वो दिल कहाँ से लाऊँ, तेरी याद जो भुलादे) – 2
मुझे याद आने वाले कोई रासता बतादे
वो दिल कहाँ से लाऊँ, तेरी याद जो भुलादे

(रहने दे मुझको अपने क़दमों की ख़ाक बनकर) – 2
जो नहीं तुझे गवारा मुझे ख़ाक में मिलादे
वो दिल कहाँ से लाऊँ, तेरी याद जो भुलादे

(मेरे दिल ने तुझको चाहा, क्या यही मेरी ख़ता है) – 2
माना खता है लेकिन, ऐसी तो ना सज़ा दे
वो दिल कहाँ से लाऊँ, तेरी याद जो भुलादे
मुझे याद आने वाले कोई रासता बतादे
वो दिल कहाँ से लाऊँ, तेरी याद जो भुलादे


फ़िल्म: भरोसा / Bharosa (1963)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रवि
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: गुरु दत्त, आशा पारेख, मेहमूद, शोभा खोटे

ये झुके-झुके नैना ये लट बलखाती
तो दिल क्यूँ ना मेरा दीवाना हो तेरा
ये झुके-झुके…

ये शरम से दहके गाल चैन के दुश्मन हो गए
ये उलझे-उलझे बाल दिलों की उलझन हो गए
तेरे गालों की ख़ैर तेरे बालों की ख़ैर – 2
क्यों न ज़ुल्मी ओ ज़ालिम लजाना हो तेरा
ये झुके-झुके…

तेरी ज़ुल्फ़ का साथी बनता अगर मैं गजरा होता
तेरी अँखियों में बस जाता अगर मैं कजरा होता
तेरे कजरे की ख़ैर तेरे गजरे की ख़ैर – 2
जो देखे तो क्यूँ ना दीवाना हो तेरा
ये झुके-झुके…

कई देखे मोर चकोर चल ना ऐसी देखी
ये क़मर लचकती डाल डाल ना ऐसी देखी
ये रंग ये रूप जैसे चढ़ती हो धूप – 2
गोरी फिर क्यों ना ज़ालिम ज़माना हो तेरा
ये झुके-झुके…

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