खुली-खुली ज़ुल्फ़ों को बाँध भी लो – Khuli Khuli Zulfon Ko (Banarsi Thug)

फ़िल्म: बनारसी ठग / Banarsi Thug (1962)
गायक/गायिका: मुकेश, ऊषा मंगेशकर?
संगीतकार: इकबाल कुरेशी
गीतकार: अज़ीज कैसी
अदाकार: मनोज कुमार, आई. एस. जौहर, विजया चौधरी



खुली-खुली ज़ुल्फ़ों को बाँध भी लो
हो जाए न दुनिया में शाम कहीं
(यूँ न देखो) – 2 तुम मुझको
हो जाएं न हम बदनाम कहीं

आँखें क्यों झुकने लगी हैं आँचल क्यों ढल जाता है
कुछ तो बताओ ऐ जादूगर ये जादू क्यों चल जाता है
(भोली) – 3 बातें छोड़ भी दो
हो जाए न बातें ये आम कहीं
यूँ न देखो…

जाम चुराकर इन आँखों के आज नशे में चूर हूँ मैं
चोर नहीं मैं जान-ए-तमन्ना आदत से मजबूर हूँ मैं
(चोरी) – 3 की ये बात करो न आ जाए न कोई इल्ज़ाम कहीं
खुली-खुली ज़ुल्फ़ों…

जान तुम्हारे बस में कर दी दिल नज़राना दे डाला
तुम भी सनम क्या याद करोगे हमने क्या-क्या दे डाला
ऐ जी हमपे ना एहसान करो हो जाएं न हम नीलाम कहीं
यूँ न देखो…

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