बने हो एक ख़ाक से, तो दूर क्या क़रीब क्या – Bane Ho Ek Khaak Se (Aarti)

फ़िल्म: आरती / Aarti (1962)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी



बने हो एक ख़ाक से, तो दूर क्या क़रीब क्या – 3
लहू का रंग एक है, अमीर क्या गरीब क्या
बने हो एक…

वो ही जान वो ही तन, कहाँ तलक़ छुपाओगे – 2
पहन के रेशमी लिबाज़, तुम बदल न जाओगे
के एक जात हैं सभी – 2
तो बात है अजीब सी
लहू का रंग एक है…

गरीब है वो इस लिये, तुम अमीर हो गये – 2
के एक बादशाह हुआ, तो सौ फ़कीर हो गये
खता यह है समाज की – 2
भला बुरा नसीब क्या
लहू का रंग एक है…

जो एक हो तो क्यूँ ना फिर, दिलों का दर्द बाँट लो – 2
लहू की प्यास बाँट लो, रुको कि दर्द बाँट लो
लगा लो सब को तुम गले – 2
हबीब क्या, रक़ीब क्या
लहू का रंग एक है…

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