अपनी उल्फ़त पे ज़माने का न पहरा होता – Apni Ulfat Pe Jamane Ka Pahra (Sasural)

फ़िल्म: ससुराल / Sasural (1961)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मुकेश
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: हसरत जयपुरी
अदाकार: राजेंद्र कुमार, मेहमूद



अपनी उल्फ़त पे ज़माने का न पहरा होता
तो कितना अच्छा होता – 2
प्यार की रात का कोई न सवेरा होता
तो कितना अच्छा होता – 2
अपनी उल्फ़त पे …

पास आकर भी बहुत दूर बहुत दूर रहे
एक बन्धन में बँधे फिर भी तो मजबूर रहे
मेरी राहों में न उलझन का अँधेरा होता
तो कितना अच्छा होता – 2

दिल मिले आँख मिली प्यार न मिलने पाए
बाग़बाँ कहता है दो फूल न खिलने पाएँ
अपनी मंज़िल को जो काँटों ने न घेरा होता
तो कितना अच्छा होता – 2

अजब सुलगती हुई लकड़ियाँ हैं जग वाले
मिलें तो आग उगल दें कटें तो धुआँ करें
अपनी दुनिया में भी सुख चैन का फेरा होता
तो कितना अच्छा होता – 2
अपनी उल्फ़त पे …

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