संजोग – All Songs of Sanjog (1961)


फ़िल्म: संजोग / Sanjog (1961)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: प्रदीप कुमार, अनिता गुहा, शोभा खोटे

बदली से निकला है चाँद
परदेसी सैंया लौट के तू घर आ जा घर आ जा
बदली से निकला है …

पूछे पता तेरा ठंडी हवाएँ
चुप मुझे देख के चुप हो जाएँ
लाएँ तो कैसे तुझे ढूँढ के लाएँ हो ढूँढ के लाएँ
बदली से निकला है …

आ के गुज़र गईं कितनी बहारें
और बरस गईं कितनी फुहारें
आजा तुझे हम कब से पुकारें हो कब से पुकारें
बदली से निकला है …


फ़िल्म: संजोग / Sanjog (1961)
गायक/गायिका: मुकेश
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: प्रदीप कुमार, अनिता गुहा

भूली हुई यादों, मुझे इतना ना सताओ
अब चैन से रहने दो, मेरे पास न आओ
भूली हुई यादों …

दामन में लिये बैठा हूँ, (टूटे हुए तारे – 2)
कब तक मैं जियूँगा यूँही, (ख्वाबों के सहारे – 2)
दीवाना हूँ, अब और ना दीवाना बनाओ
अब चैन से रहने दो, मेरे पास न आओ
भूली हुई यादों …

लूटो ना मुझे इस तरह, (दोराहे पे लाके – 2)
आवाज़ न दो एक (नयी राह दिखाके – 2)
संभला हूँ मैं गिर-गिरके मुझे, फिर ना गिराओ
अब चैन से रहने दो मेरे पास ना आओ

भूली हुई यादों, मुझे इतना ना सताओ
अब चैन से रहने दो, मेरे पास न आओ
भूली हुई यादों …


फ़िल्म: संजोग / Sanjog (1961)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मुकेश
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: प्रदीप कुमार, अनिता गुहा, शोभा खोटे

इक मंज़िल राही दो (फिर प्यार न कैसे हो) – 2
साथ मिले जब दिल दो (फिर प्यार ना कैसे हो) – 2

हम भी वही हैं दिल भी वही है धड़कन मगर नई है
देखो तो मीत आँखों में प्रीत (क्या रंग भर गई है) – 2
इक मंज़िल राही दो …

निकले हैं धुन में अपनी लगन में मंज़िल बुला रही है
ठंडी हवा भी अब तो मिलन के (नग़में सुना रही है) – 2
इक मंज़िल राही दो …

देखो वो फूल दुनिया से दूर आकर कहाँ खिला है
मेरी तरह ये ख़ुश है ज़रूर (इसको भी कुछ मिला है) – 2
इक मंज़िल राही दो …


फ़िल्म: संजोग / Sanjog (1961)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: मदन मोहन
गीतकार: राजेंद्र कृष्ण
अदाकार: प्रदीप कुमार, अनिता गुहा, शोभा खोटे

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गई – 2
नज़र के सामने घटा सी छा गयी – 2
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

कहाँ से फिर चले आये, वो कुछ भटके हुए साये
वो कुछ भूले हुए नग़मे, जो मेरे प्यार ने गाये
वो कुछ बिखरी हुई यादें, वो कुछ टूटे हुए नग़मे
पराये हो गये तो क्या, कभी ये भी तो थे अपने
न जाने इनसे क्यों मिलकर, नज़र शर्मा गयी
वो भूली …

बड़े रंगीन ज़माने थे, तराने ही तराने थे
मगर अब पूछता है दिल, वो दिन थे या फ़साने थे
फ़क़त इक याद है बाकी, बस इक फ़रियाद है बाकी
वो खुशियाँ लुट गयी लेकिन, दिल-ए-बरबाद है बाकी
कहाँ थी ज़िन्दगी मेरी, कहाँ पर आ गयी
वो भूली …

उम्मीदों के हँसी मेले, तमन्नाओं के वो रेले
निगाहों ने निगाहों से, अजब कुछ खेल से खेले
हवा में ज़ुल्फ़ लहराई, नज़र पे बेखुदी छाई
खुले थे दिल के दरवाज़े, मुहब्बत भी चली आई
तमन्नाओं की दुनिया पर, जवानी छा गयी
वो भूली …

वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी – 2
नज़र के सामने घटा सी छा गयी – 2
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गयी

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