ऑपेरा हाउस – All Songs of Opera House (1961)


फ़िल्म: ऑपेरा हाउस / Opera House (1961)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: चित्रगुप्त
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अजीत

बलमा माने ना
बैरी चुप न रहे
लागी मन की कहे
पा के अकेली मुझे
मोरी बहियाँ धरे

जब जब पलटूं गागर भर के आ~
लट रह जाये मुख पे बिखर के
बात करे ऐसी दिल वाला
तड़पे और तड़पाये
बलमा माने न …

घूँघट डारूं नैन चुराऊँ
घबराहट में राह न पाऊँ
वो बाँका रसिया मतवाला
सुने न मोरी अपनी ही कहे
बलमा माने न …


फ़िल्म: ऑपेरा हाउस / Opera House (1961)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मुकेश
संगीतकार: चित्रगुप्त
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अजीत

देखो मौसम
क्या बहार है
सारा आलम
बेक़रार है
ऐसे में क्यूँ हम
दीवाने हो जाएं ना

छलकी-छलकी
चाँदनी भी है
हल्की-हल्की
बेखुदी भी है
ऐसे में क्यूँ हम
यहीं पर खो जाएं ना

गाती सी हर साँस में बजती सी शहनाइयाँ
साया दिल पे डालती तारों की परछाइयाँ
झांके चन्दा
आसमान से
छेड़े हमको
जान-जान के
ऐसे में क्यूँ हम …

दरिया की हर मौज में अरमानों का ज़ोर है
दिलवालों के गीत का लहका-लहका शोर है
लहरें डोलें
झूम-झूम के
साहिल का मुँह
चूम-चूम के
ऐसे में क्यूँ हम …


फ़िल्म: ऑपेरा हाउस / Opera House (1961)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर, मुकेश
संगीतकार: चित्रगुप्त
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अजीत

ना मिलते हम तो कहो तुम किधर गए होते
तुम्हारा प्यार न मिलता तो मर गए होते

अगर ऐसे में हम ना तुम्हें पा जाते
छुपाए मुँह को अँधेरे में अश्क़ बरसाते हम अश्क़ बरसाते
वो अश्क़ तो मेरी आँखों में भर गए होते
तुम्हारा प्यार न …

हमें तो फ़ुरक़त में इसी ग़म ने मारा
मेरी बहार भटकती फिरेगी आवारा फिरेगी आवारा
तुम्हारी राह में होते जिधर गए होते
ना मिलते हम तो …

जाने फिर क्या होता ये न पूछो हमसे
ज़माना छीन ही लेता हमें अगर तुमसे – 2
दीवाने फिर तो कोई काम कर गए होते
तुम्हारा प्यार न …
फ़िल्म: ऑपेरा हाउस / Opera House (1961)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: चित्रगुप्त
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अजीत
रस्ते में तेरे कब से हैं खड़े
अजी ले लो सलाम गरीबों का
रस्ते में तेरे कब से हैं खड़े
अजी ले लो सलाम गरीबों का

गलियों में घूमते थे हम बेक़रार से
मिल जाओगे कहीं तो चलते फिरते प्यार से
मिल ही गये हैं तो खुल के मिलो
दिल तोड़ न दो मुँह मोड़ न लो
प्यारे ले लो सलाम गरीबों का

सुलझाना छोड़ देते उल्जहे से बाल का
सुन लेते आप जो अफ़्साना मेरे हाल का
हाँ हाँ सुनी नहीं फ़ुर्सत मगर
ले जाये किधर हसरत की नज़र
प्यारे ले लो सलाम गरीबों का

अब तक जो हम खड़े हैं ही चाहत आप की
तकते हैं देर से दीवाने सूरत आप की
कब तक यूँ ही कोई पीछा करे
अब हाथ मेरे मेरे थकने भी लगे
चाहे ले लो सलाम गरीबों का

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