आरती – All Songs of Aarti (1962)



फ़िल्म: आरती / Aarti (1962)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, लता मंगेशकर
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

आप ने याद दिलाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया
आप ने याद दिलाया…

मैं भी क्या चीज़ हूँ खाया था कभी तीर कोई
दर्द अब जा के उठा चोट लगे देर हुई
तुमको हमदर्द जो पाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया…

मैं ज़मीं पर हूँ न समझा न परखना चाहा
आसमाँ पर ये कदम झूम के रखना चाहा
आज जो सर को झुकाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया…

मैंने भी सोच लिया साथ निभाने के लिये
दूर तक आऊंगी मैं तुमको मनाने के लिये
दिल ने एहसास दिलाया तो मुझे याद आया
के मेरे दिल पे पड़ा था कोई ग़म का साया…


फ़िल्म: आरती / Aarti (1962)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

अब क्या मिसाल दूँ मैं तुम्हारे शबाब की
इनसान बन गई है किरण माहताब की
अब क्या मिसाल दूँ…

चेहरे में घुल गया है हसीं चाँदनी का नूर
आँखों में है चमन की जवाँ रात का सुरूर
गरदन है एक झुकी हुई डाली गुलाब की
अब क्या मिसाल दूँ…

गेसू खुले तो शाम के दिल से धुआँ उठे
छूले कदम तो झुक के न फिर आस्माँ उठे
सौ बार झिलमिलाये शमा आफ़ताब की
अब क्या मिसाल दूँ…

दीवार-ओ-दर का रंग, ये आँचल, ये पैरहन
घर का मेरे चिराग़ है बूटा स ये बदन
तसवीर हो तुम्हीं मेरे जन्नत के ख़्वाब की
अब क्या मिसाल दूँ…


फ़िल्म: आरती / Aarti (1962)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

बने हो एक ख़ाक से, तो दूर क्या क़रीब क्या – 3
लहू का रंग एक है, अमीर क्या गरीब क्या
बने हो एक…

वो ही जान वो ही तन, कहाँ तलक़ छुपाओगे – 2
पहन के रेशमी लिबाज़, तुम बदल न जाओगे
के एक जात हैं सभी – 2
तो बात है अजीब सी
लहू का रंग एक है…

गरीब है वो इस लिये, तुम अमीर हो गये – 2
के एक बादशाह हुआ, तो सौ फ़कीर हो गये
खता यह है समाज की – 2
भला बुरा नसीब क्या
लहू का रंग एक है…

जो एक हो तो क्यूँ ना फिर, दिलों का दर्द बाँट लो – 2
लहू की प्यास बाँट लो, रुको कि दर्द बाँट लो
लगा लो सब को तुम गले – 2
हबीब क्या, रक़ीब क्या
लहू का रंग एक है…


फ़िल्म: आरती / Aarti (1962)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

कभी तो मिलेगी, कहीं तो मिलेगी
बहारों की मंज़िल राही
बहारों की मंज़िल राही…

लम्बी सही दर्द की राहें
दिल की लगन से काम ले
आँखों के इस तूफ़ाँ को पी जा
आहों के बादल थाम ले
दूर तो है पर, दूर नहीं है
नज़ारों की मंज़िल राहि
बहारों की मंज़िल राही…

आ हा हा हा, ल ला, ला ल ल, अह हा हा ह ह

माना कि है गहरा अन्धेरा
गुम है डगर की चाँदनी
मैली न हो धुँधली पड़े न
देख नज़र की चाँदनी
डाले हुए है, रात की चादर
सितारों की मंज़िल राही
बहारों की मंज़िल राही…


फ़िल्म: आरती / Aarti (1962)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

ना भँवरा ना कोई गुल
अकेला हूँ मैं तेरा बुलबुल
है एक तनहाई
मेरी जाँ मेरे जहाँ में आ
मेरे जहाँ में रंग-ओ-बू
कहीं पर हँसी कहीं आँसू
ये ही बता सौदाई
मैं ये ज़िंदगी भुला दूँ क्या

उल्फ़त की है यहाँ बू बास
मन में लगी लबों पर प्यास
मन में लगी लबों पर प्यास
चाँदी सोना हो न हो
दिल है अपने पास
मेरी दुनिया और हसीं है
यहाँ दंगा शोर नहीं है

है एक तनहाई
मेरी जाँ मेरे जहाँ में आ
ना भँवरा ना कोई गुल
अकेला हूँ मैं तेरा बुलबुल
है एक तनहाई
मेरी जाँ मेरे जहाँ में आ

तेरा जहाँ है जिसका नाम
ग़म की सुबह दुखों की शाम
हो नो नो नो
मामूली सी बात पे
लड़ना इसका काम
फिर भी ये सब हैं अपने
मिल जुल कर देखें सपने

ये ही बता सौदाई
मैं ये ज़िंदगी भुला दूँ क्या
मेरे जहाँ में रंग-ओ-बू
कहीं पर हँसी कहीं आँसू
ये ही बता सौदाई
मैं ये ज़िंदगी भुला दूँ क्या

ना भँवरा ना कोई गुल
अकेला हूँ मैं तेरा बुलबुल
है एक तनहाई
मेरी जाँ मेरे जहाँ में आ


फ़िल्म: आरती / Aarti (1962)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी, आशा भोंसले
संगीतकार: रोशन
गीतकार: मज़रूह सुल्तानपुरी
अदाकार: अशोक कुमार, प्रदीप कुमार, मीना कुमारी

वो तीर दिल पे चला जो तेरी कमान में है
हाय किसी की आँख में जादू तेरी ज़ुबान में है

नज़र में आते ही तुम तो जिगर में समाए सनम
जिगर में आते ही दिल की तरफ़ बढ़ाए क़दम
कहीं ठहरती नहीं जो उसी अदा की क़सम – 2
ज़मीं पे है वही बिजली जो आसमान में है
हाय किसी की आँख…

ये माना रंग मोहब्बत के हो चले गहरे
मगर लबों पे हैं दिलों पे हैं पहरे
जो बेक़रार हो दिल से कहीं वो क्या ठहरे
अभी तो हुस्न मोहब्बत के इम्तहान में है
वो तीर दिल पे चला…

तुम्हारी आँखों के आगे ये दिन ये रात कहाँ
गुलों की शाख कहाँ एक सनम का हाथ कहाँ
हसीन देखे हज़ारों मगर ये बात कहाँ – 2
ये बात और है जो तेरी आनबान में है
किसी की आँख…

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