सीमा – All Songs of Seema (1955)


फ़िल्म: सीमा / Seema (1955)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: हसरत जयपुरी
अदाकार: नूतन, बलराज साहनी, शोभा खोटं

बात-बात में रूठो न
अपने आप को लूटो न
( ये रंग बदलती दुनिया है
तक़दीर पे अपनी रूठो न ) – 2
बात-बात में रूठो न

( लाज की लाली आज बनी है
भीगी पलकें अबरू तनी है ) – 2
( आँखों में सुर्ख़ी दिल में मुहब्बत
होँठों पे छुप्पी हँसी है ) – 2

बात-बात में रूठो न
अपने आप को लूटो न
ये रंग बदलती दुनिया है
तक़दीर पे अपनी रूठो न
बात-बात में रूठो न

( ढलती हैं रातें ले कर अंधेरा
लायीं बहारें नया सवेरा ) – 2
( जीवन सफ़र में दुख हो या सुख हो
करना है फिर भी बसेरा ) – 2

बात-बात में रूठो न
अपने आप को लूटो न
ये रंग बदलती दुनिया है
तक़दीर पे अपनी रूठो न
बात-बात में रूठो न

( फूल ख़ुशी के हर कोई ले-ले
कोई न देखे आँसू के मेले ) – 2
( तुम जो हँसे तो हँस देगी दुनिया
रोना पड़ेगा अकेले ) – 2

बात-बात में रूठो न
अपने आप को लूटो न
ये रंग बदलती दुनिया है
तक़दीर पे अपनी रूठो न
बात-बात में रूठो न


फ़िल्म: सीमा / Seema (1955)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: नूतन, बलराज साहनी, शोभा खोटं

कहाँ जा रहा है तू ऐ जाने वाले – 2
अँधेरा है मन का दिया तो जला ले
कहाँ जा रहा है …

ये जीवन सफ़र एक अंधा सफ़र है – 2
बहकना है मुमकिन भटकने का डर है – 2
सम्भलता नहीं दिल किसी के स.म्भाले
कहाँ जा रहा है …

जो ठोकर न खाए नहीं जीत उसकी
जो गिर के संभल जाए है जीत उसकी
निशाँ मंज़िलों के ये पैरों के छाले
कहाँ जा रहा है …

कभी ये भी सोचा कि मंज़िल कहाँ है – 2
बड़े से जहाँ में ( तेरा घर कहां है ) – 2
जो बाँधे थे बंधन वो क्यों तोड़ डाले
कहाँ जा रहा है …


फ़िल्म: सीमा / Seema (1955)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: नूतन, बलराज साहनी, शोभा खोटं

मनमोहना बड़े झूठे
हार के हार नहीं माने
मनमोहना …

बने थे खिलाड़ी पिया
निकले अनाड़ी पिया
मोसे बेइमानी करे
मुझसे ही रूठे
मनमोहना …

तुम्हरी ये बाँसी कान्हा
बनी गला फाँसी
तान सुनाके मेरा
तन मन लूटे
मनमोहना …


फ़िल्म: सीमा / Seema (1955)
गायक/गायिका: लता मंगेशकर
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: हसरत जयपुरी
अदाकार: नूतन, बलराज साहनी, शोभा खोटं

सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानी – 2
जैसे तारों की बात सुने रात सुहानी
सुनो छोटी सी …

जिसकी क़िस्मत में ग़म के बिछौने थे
आँसू ही खिलौने थे
दर्द की ख़ुशियाँ थीं दुख भरी अँखियाँ थीं
घर भी न था कोई और दर भी न था कोई
भरे आँचल में ग़म छिपाए आँखों में पानी
सुनो छोटी सी …

दिल में ये अरमान थे इक छोटा सा बंगला हो
चाँदी की दीवारें हो और सोने का जंगला हो
खेल हों जीवन के यहाँ मेल हों जीवन के – 2 हो
गया बचपन तो आँसू भरी आई जवानी
सुनो छोटी सी …

चाँद का डोला हो बिजली का बाजा हो
डोले पे रानी हो घोड़े पे राजा हो
प्यार के रस्ते हों और फूल बरसते हों – 2 हो
बनना चाहती थी इक दिन वो तारों की रानी
सुनो छोटी सी …

टूट गए पल भर में सपनों के मोती भी
लुट गई ज्योति भी
रह गए अन्धेरे उजड़े हुए सबेरे
बात यह पूरी थी फिर भी अधूरी थी – 2 हो
होगा अन्जाम क्या ख़बर कुछ भी न जानी
सुनो छोटी सी …

आई ख़ुशियाँ भी प्यार की रातों पर
इठलाती हवाओं पर
ग़म के हटे बादल चाँद बनी पायल
जम के बहारें आईं और झूम के लहराईं – 2 हो
हँसे आँचल में तारे रुत आई सुहानी
सुनो छोटी सी …

सच हुए आख़िर अरमान भरे सपने
गीत बनीं आहें और बन गए सब अपने
गैर की दुनिया और बन गए सब अपने
यह है जीवन की गति और दिल की जवानी
सुनो छोटी सी …

सुनो छोटी सी गुड़िया की कहानी


फ़िल्म: सीमा / Seema (1955)
गायक/गायिका: मन्ना डे
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: शैलेंद्र सिंह
अदाकार: नूतन, बलराज साहनी, शोभा खोटं

तू प्यार का सागर है
तेरी इक बूँद के प्यासे हम
लौटा जो दिया तुमने, चले जायेंगे जहाँ से हम
तू प्यार का सागर है …

घायल मन का, पागल पंछी उड़ने को बेक़रार
पंख हैं कोमल, आँख है धुँधली, जाना है सागर पार
जाना है सागर पार
अब तू हि इसे समझा, राह भूले थे कहान से हम
तू प्यार का सागर है …

इधर झूमती गाये ज़िंदगी, उधर है मौत खड़ी
कोई क्या जाने कहाँ है सीमा, उलझन आन पड़ी
उलझन आन पड़ी
कानों में ज़रा कह दे, कि आये कौन दिशा से हम
तू प्यार का सागर है …


फ़िल्म: सीमा / Seema (1955)
गायक/गायिका: मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार: शंकर-जयकिशन
गीतकार: हसरत जयपुरी
अदाकार: नूतन, बलराज साहनी, शोभा खोटं

ये दुनिया ग़म का मेला है – 2
मुसीबत की कहानी है
कोई रोये कोई गाये
अजब ये ज़िंदगानी है

हमें भी दे दो
हमें भी दे दो सहारा के बेसहारे हैं
हमें भी दे दो सहारा के बेसहारे हैं – 2
फ़लक़ की गोद से टूटे हुये सितारे हैं – 2
हमें भी दे दो सहारा

भरा हो पेट तो

भरा हो पेट तो सन्सार जगमगाता है
भरा हो पेट तो सन्सार जगमगाता है
सताये भूख तो ईमान डगमगाता है
सताये भूख तो ईमान डगमगाता है
सताये भूख तो ईमान डगमगाता है
भलाई कीजीये

भलाई कीजीये दो दिन के ये नज़ारे हैं

हमें भी दे दो सहारा के बेसहारे हैं
फ़लक़ की गोद से टूटे हुये सितारे हैं
हमें भी दे दो सहारा

तेरे जहान से

तेरे जहान से मालिक बता किधर जाये
तेरे जहान से मालिक बता किधर जाये
तेरे हुज़ूर में रह कर भी ठोकरें खायें
तेरे हुज़ूर में रह कर भी ठोकरें खायें
तेरे हुज़ूर में रह कर भी ठोकरें खायें
ग़रीब ही सही

ग़रीब ही सही आख़िर तो हम तुम्हारे हैं

हमें भी दे दो सहारा के बेसहारे हैं
फ़लक़ की गोद से टूटे हुये सितारे हैं
हमें भी दे दो सहारा

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