ओ मनचली, कहाँ चली – O Manchali Kahan Chali


फिल्मः मनचली (1973)
गायक/गायिकाः किशोर कुमार
संगीतकारः लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
गीतकारः आनंद बख्शी
कलाकारः संजीव कुमार, लीना चंद्रावरकर


ओ मनचली, कहाँ चली – 2
देख देख देख देख मुझ से न शरमा
एक एक एक मैं हूँ भंवरा
और तू कली, ओ मनचली …

होठों पे लेके तेरा नाम
आई है रंग भरी शाम
फूलों से छलके हैं जाम
भंवरों ने दिल लिये थाम
ऐसे में, हे हे हो ए हे हो
ऐसे में, तोड़ के प्रेम की डोरी
ओ गोरी, चकोरी, तू कहाँ चली …

दुनिया से नहीं डरेंगे
हम तुम मुलाक़ाते करेंगे
आजा दो बाते करेंगे
रंगीं बरसातें करेंगे
ये सच है ए हे ओ ओ ए हे ओ ओ
ये सच है मैं हूँ एक दीवाना
न जाना, न माना, तू कहाँ चली …

रुत ऐसी आई हुई है
बदली सी छाई हुई है
तू क्यों शरमाई हुई है
मुझसे घबराई हुई है
प्यार में ए हे ओ ओ ए हे ओ ओ
प्यार में यार से आँख चुराके
छुपाके, बचाके, तू कहाँ चली …

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