उल्फ़त में ज़माने की (किशोर) – Ulfat Men Zamane Ki


फिल्मः कॉल गर्ल (1974)
गायक/गायिकाः किशोर कुमार
संगीतकारः सपन-जगमोहन
गीतकारः नक्श लायलपुरी
कलाकारः विक्रम, ज़ाहिरा


उल्फ़त में, ज़माने की …
हर रस्म को, ठुकराओ …

उल्फ़त में ज़माने की, हर रस्म को ठुकराओ
फिर साथ मेरे आओ ओ
उल्फ़त में ज़माने की …

क़दमों को ना रोकेगी, ज़ंजीर रिवाज़ों की
हम तोड़ के निकलेंगे, दीवार समाजों की
दूरी पे सही मंज़िल, दूरी से, ना घबराओ
उल्फ़त में ज़माने की …

मैं अपनी बहारों को, रंगीन बन लूँगा
सौ बार तुम्हें अपनी, पलकों पे बिठा लूँगा
शबनम की तरह मेरे, गुलशन में, बिखर जाओ
उल्फ़त में ज़माने की …

आ जाओ के जीने के, हालात बदल डालें
हम तुम ज़माने के, दिन रात बदल डालें
तुम मेरी वफ़ाओं की, एक बार, क़सम खाओ
उल्फ़त में ज़माने की …

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