देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से – Dekha Hai Zindagi Ko

फ़िल्म – एक महल हो सपनों का (1975)
गायक/गायिका – किशोर कुमार
संगीतकार – रवि
गीतकार – साहिर लुधियानवी
अदाकार – धर्मेंद्र

देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से
चहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से

कहने को दिल की बात जिन्हें ढूँढते थे हम – 2
महफ़िल मेइं आ गये हैं वो अपने नसीब से
देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से

नीलाम हो रहा था किसी नाज़नीन का प्यार – 2
क़ीमत नहीं चुकाई गैइ इक ग़रीब से
देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से

तेरी वफ़ा की लाश पे ला मैं ही डाल दूँ – 2
रेशम का ये कफ़न जो मिला है रक़ीब से
देखा है ज़िंदगी को, कुछ इतना करीब से

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