बाग़ों में कैसे ये फूल खिलते हैं – Bagon Men Kaise Ye Phool Khilte Hain

फ़िल्म – चुपके-चुपके (1975)
गायक/गायिका – किशोर कुमार, लता मंगेशकर
संगीतकार – एस. डी. बर्मन
गीतकार – आनंद बख्शी
अदाकार – धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर

बाग़ों में कैसे ये फूल खिलते हैं
खिलते हैं भँवरों से जब फूल मिलते हैं
ओ~ बाग़ों में …

ओ~ आ~
मौसम बहारों के लगते हैं क्यों प्यारे
हँसते हैं रोते हैं कलियों के संग सारे
कलियों के खिलने से दिल भी खिलते हैं
बाग़ों में …

अच्छा अब तुम बोलो ऐसा कब होता है
बड़े वो हो मत छेड़ो ऐसा तब होता है
जब तेरे नयनों से मेरे नैन मिलते हैं
बाग़ों में …

Advertisements

Leave a comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s