ये ज़िंदगी के मेले – Ye Zindagi Ke Mele

फ़िल्म – मेला (1948)
गायक/गायिका – मोहम्मद रफ़ी
संगीतकार – नौशाद
गीतकार – शकील बदायूंनी
अदाकार – दिलीप कुमार

(ये ज़िंदगी के मेले – 2), दुनिया में कम न होंगे
अफ़सोस हम न होंगे

इक दिन पड़ेगा जाना, क्या वक़्त, क्या ज़माना
कोई न साथ देगा, सब कुछ यहीं रहेगा
जाएंगे हम अकेले, ये ज़िंदगी …

दुनिया है मौज-ए-दरिया, क़तरे की ज़िंदगी क्या
पानी में मिल के पानी, अंजाम ये के पानी
दम भर को सांस ले ले, ये ज़िंदगी …

होंगी यही बहारें, उल्फ़त की यादगारें
बिगड़ेगी और चलेगी, दुनिया यही रहेगी
होंगे यही झमेले, ये ज़िंदगी …

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