वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो – Watan Ki Raah Men Watan Ke Naujawan

फ़िल्म – शहीद (1948)
गायक/गायिका – मोहम्मद रफ़ी, खान मस्ताना
संगीतकार – ग़ुलाम हैदर
गीतकार – राजा मेहंदी अली खान
अदाकार – दिलीप कुमार

वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो
पुकारते हैं ये ज़मीन-ओ-आसमां शहीद हो

शहीद तेरी मौत ही तेरे वतन की ज़िंदगी
तेरे लहू से जाग उठेगी इस चमन में ज़िंदगी
खिलेंगे फूल उस जगह कि तू जहाँ शहीद हो, वतन की …

गुलाम उठ वतन के दुश्मनों से इंतक़ाम ले
इन अपने दोनों बाजुओं से खंजरों का काम ले
चमन के वास्ते चमन के बाग़बां शहीद हो, वतन की …

पहाड़ तक भी कांपने लगे तेरे जुनून से
तू आसमां पे इन्क़लाब लिख दे अपने खून से
ज़मीं नहीं तेरा वतन है आसमां शहीद हो, वतन की …

वतन की लाज जिसको थी अजीज़ अपनी जान से
वो नौजवान जा रहा है आज कितनी शान से
इस एक जवान की खाक पर हर इक जवां शहीद हो
वतन की …

है कौन खुशनसीब माँ कि जिसका ये चिराग़ है
वो खुशनसीब है कहाँ ये जिसके सर का ताज है
अमर वो देश क्यूँ न हो कि तू जहाँ शहीद हो, वतन की …

Advertisements

Leave a comment

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s