गोरे गोरे ओ बाँके छोरे कभी मेरी गली आया करो – Gore Gore O Banke Chhore


फ़िल्म – समाधि (1950)
गायक/गायिका – लता मंगेशकर, अमीरबाई कर्नाटकी
संगीतकार – सी. रामचंद्र
गीतकार – राजेंद्र कृष्ण
अदाकार – अशोक कुमार, नलिनी जयवंत


लता: गोरे गोरे ओ बाँके छोरे कभी मेरी गली आया करो
अमीर: गोरी गोरी ओ बाँकी छोरी चाहे रोज़ बुलाया करो

लता: रोज़ रोज़ मुलाक़ात अच्छी नहीं
प्यार में ऐसी बात अच्छी नहीं
थोड़ा थोड़ा मिलना थोड़ी सी जुदाई
सदा चाँदनी रात अच्ची नहीं
अमीर: छोड़ो छोड़ो, जिया न तोड़ो
किसी और को जलाया करो

दोनों:
गोरी गोरी ओ बाँकी छोरी चाहे रोज़ बुलाया करो
गोरे गोरे ओ बाँके छोरे, कभी मेरी गली आया करो
गोरी गोरी ओ बाँकी छोरी, चाहे रोज़ बुलाया करो

लता: छोटी-सी बात पर ये लड़ाई?
प्यार की दुहाई है, प्यार की दुहाई
अखियों में अखियाँ डाल के तो देखो
चेहरे पे ग़ुस्सा हाय दिल में सफ़ाई
अमीर: घड़ी घड़ी, ओ बड़ी बड़ी,
ऐसी बातें न बनाया करो

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