तेरी बिंदिया उड़ा के ले गई मेरी निंदिया – Teri Bindiya Uda Ke Le Gayi (Jodi No.1)


फ़िल्म: जोड़ी नं.1 (2001)
संगीतकार: आनंद राज आनंद
गीतकार: देव कोहली
गायक/गायिका: सुनिधि चौहान, अभिजीत


तेरी बिंदिया उड़ा के ले गई मेरी निंदिया
मैं जाग रहा हूं, सो गया सारा इंडिया
मेरी बिंदिया उड़ा के ले गई तेरी निंदिया
तू जाग रहा है, सो गया सारा इंडिया
तेरी बिंदिया उड़ा…

मेरी जान किसी की जान को जाते देखा है
मैं जान लुटा दूंगा तुझपे ये सोचा है
तू एक लुटेरा है, दिल तूने लूटा है
मैं क्या जानूं तू सच्चा है कि झूठा है
तूने कर लिया काबू, जादू मुझपे किया किया
मैं जाग रहा हूं…

मैंने जब से दिया है जानेमन ये दिल तुझको
मुझे तेरी कसम है चैन नहीं इक पल मुझको
हालत मेरी भी कुछ-कुछ तेरे जैसी है
बेचैन बड़ा करती है मोहब्बत कैसी है
अब क्या डरना, जब प्यार किया तो किया किया
मैं जाग रहा हूं…

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धन धन धन धरती रे – Dhan Dhan Dhan Dharti Re (Raajniti)


फ़िल्म: राजनीति (2010)
संगीतकार: प्रीतम चक्रबर्ती
गीतकार: गुलज़ार
गायक/गायिका: शंकर महादेवन, सोनू निगम


बूढ़ा आसमां, धरती देखे रे
धन है धरती रे, धन-धन धरती रे

वो बहता है तो ये धरती सहती है
पीठ पे देह लेकर गंगा बहती है
तारे गिरे हैं कितने
धरती सूरज बुझे हैं कितने
ओ धरती रे धन धरती रे
धन धन धन धरती रे

बंटवारे हो तो ये धरती कटती है
सूखा पड़ता है तो धरती फटती है
एक पल जीती रे, एक पल मरती रे
धन है धरती रे, धन-धन धरती रे

कोई तो धोये ये दाग ज़मीं के
फिर से हरे हो जाएं बाग़ जमीं के
ये सोच के हर दिन हर रात
ओंस उतरती रे
ओ धरती रे धन धरती रे
बूढ़ा आसमां…

कलियों का चमन तब बनता है – Kaliyon Ka Chaman Tab Banta Hai (Jyoti)


फ़िल्म: ज्योति (1981)
संगीतकार: बप्पी लाहिड़ी
गीतकार: आनंद बक्षी
गायक/गायिका: लता मंगेशकर


हमारी इस नज़ाकत को, क़यामत से ना कम समझो
हमें ऐ चाहने वालों, न मिट्टी का सनम समझो

थोड़ा रेशम लगता है, थोड़ा शीशा लगता है
हीरे मोती जड़ते हैं, थोड़ा सोना लगता है
ऐसा गोरा बदन तब बनता है
थोड़ा रेशम लगता है…

दिल को प्यार का रोग लगा के, ज़ख़्म बनाने पड़ते हैं
ख़ून-ए-जिगर से अरमानों के, फूल खिलाने पड़ते हैं
दर्द हज़ारों उठते हैं, कितने कांटे चुभते हैं
कलियों का चमन तब बनता है
थोड़ा रेशम लगता है…

हंस के दो बातें क्या कर ली, तुम तो बन बैठे सैयां
पहले इनका मोल तो पूछो, फिर पकड़ो हमरी बैयां
दिल दौलत दुनिया तीनों, प्यार में कोई हारे तो
वो मेरा सजन तब बनता है
थोड़ा रेशम लगता है…

अजनबी क्यूं हो गया है मितरा – Ajnabi Kyun Ho Gaya Hai Mitra (Band Baaja Baaraat)


फ़िल्म: बैंड बाजा बारात (2010)
संगीतकार: सलीम-सुलेमान
गीतकार: अमिताभ भट्टाचार्य
गायक/गायिका: अमिताभ भट्टाचार्य


रास्तो में खो गया है मितरा
अजनबी क्यूं हो गया है मितरा, मितरा
कुछ तो कमी है सावन
सावन सा क्यूं न लागे मितरा, मितरा
शाम-ओ-सहर क्यूं मन का
आंगन ये सूना लागे मितरा, मितरा
धूप ले के जो गया है मितरा
अजनबी क्यूं हो गया है मितरा

यारा हाए यारा, कैसे जाने यारा, बिछड़ा
यारा हाए यारा, संग चैन सारा बिछड़ा

दिल के तारों में, क्यूं हज़ारों में, दर्द जागे हैं
हमने बांधे जो, रेशमी सारे टूटे धागे हैं
बिरहा तो ये हरजाना है, हमको अदा कर जाना है
सिर्फ यादों का ताना बाना है, क्या छुपाना है
हाल-ए-दिल जो हो गया है मितरा, मितरा
अजनबी क्यूं हो गया है…

तू गन्दी अच्छी लगती है – Tu Gandi Achchhi Lagti Hai (Love Sex Aur Dhokha)


फ़िल्म: लव सेक्स और धोखा (2010)
संगीतकार: स्नेहा खानवलकर
गीतकार: दिबाकर बैनर्जी
गायक/गायिका: कैलाश खेर


तू गन्दी अच्छी लगती है
तू बंदी अच्छी लगती है
तू कली सी कच्ची
तू तली सी मच्छी लगती है…

मैं सात जनम उपवासा हूं
और सात समंदर प्यासा हूं
जी भर के तुझको पी लूंगा
तू गन्दी अच्छी लगती है…

मैं ना जानूं क्या शर्म हया
तुझे जान के मैं सब भूल गया
जो कहते हैं ये कुफ़र खता
आखिर क्या है मुझको क्या पता
तू गन्दी अच्छी लगती है…

सच सच मैं बोलने वाला हूं
मैं मन का बेहद काला हूं
तेरे रंग में मन रंग लूंगा
तू रंगी अच्छी लगती है
तू सच्ची अच्छी लगती है
तू अच्छी अच्छी लगती है
तू झूठी, तू रूठी लगती है
तू गन्दी…